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मोबाइल फोन : साल, दो साल का साथी, फिर बनता बहुआयामी बर्बादी

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-डॉ. शैलेश शुक्ला आज से दस साल पहले फोन का मतलब सिर्फ कॉल और संदेश था ,  पर आज सुबह के अलार्म से लेकर रात तक हमारी पूरी जिंदगी इसी छोटे से डिब्बे में बंद है। उसी में हमारा बैंक है ,  बच्चों की पढ़ाई है ,  दुकान का हिसाब है ,  जमीन के कागज हैं और परिवार की यादें भी हैं। पर कभी सोचा है कि जिस चीज पर इतनी बड़ी जिंदगी टिकी है ,  उसकी उम्र कौन तय करता है ?  हम या उसे बनाने वाली कंपनी ?  अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि उसकी उम्र हम नहीं ,  कंपनी तय करती है।  आप तीस-चालीस हजार का फोन लाते हैं ,  पहले साल वह मक्खन जैसा चलता है ,  दूसरे साल भी ठीक रहता है ,  पर दूसरे साल के आखिर में ही संकेत मिलने लगते हैं। कंपनी कहती है अब इस मॉडल को बड़ा अपडेट नहीं मिलेगा ,  फिर कुछ महीनों बाद सुरक्षा अपडेट भी बंद हो जाते हैं। फोन गर्म होने लगता है ,  बैटरी जल्दी खत्म होती है ,  बैंक का ऐप कहता है आपका सिस्टम पुराना और असुरक्षित है। नया कैमरा फीचर आपके फोन में आता ही नहीं। मन में डर बैठ जाता है कि फोन बेकार हो गया और आप मजबूरी में ...

राजस्थानी चित्रकला की विरासत को संजो रहे कलाकार, बीकानेर हाउस में कलाकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र

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 *बीकानेर हाउस में दस दिवसीय ‘तीजोत्सव-2026’* बनी-ठनी और पिछवाई शैली की चित्रकला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास। नई दिल्ली : दिल्ली के बीकानेर हाउस में 24 अगस्त तक आयोजित दस दिवसीय ‘तीजोत्सव-2026' में राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक खान-पान के साथ प्रदेश की समृद्ध चित्रकला परंपरा भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रमुख आवासीय आयुक्त श्री रोहित कुमार ने बताया कि मेले में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए चित्रकारों द्वारा हाथ से तैयार की गई बनी-ठनी, पिछवाई एवं अन्य पारंपरिक शैलियों की चित्रकलाओं का प्रदर्शन एवं विपणन का मंच दिया जा रहा है। प्राकृतिक रंगों एवं पारंपरिक तकनीकों से तैयार इन कलाकृतियों में राजस्थान की कला एवं सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है। तीजोत्सव में किशनगढ़, राजस्थान से आए चित्रकार श्री पुष्पेंद्र साहू ने बातचीत के दौरान बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से लगातार तीजोत्सव में अपनी चित्रकला का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे बनी-ठनी एवं पिछवाई शैली की पारंपरिक चित्रकला तैयार करते हैं और इस कला को अपने परिवार की दूसरी पीढ़ी के ...

परंपरा, स्वाद और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहा है तीजोत्सव 2026

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 *बीकानेर हाउस में महक रही राजस्थानी व्यंजनों के स्वाद की विशेष छटा* *तमिलनाडु के आवासीय आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने किया मेले का भ्रमण।* नई दिल्ली। नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में 24 अगस्त तक आयोजित हो रहे ‘तीजोत्सव 2026’ में राजस्थान की समृद्ध खान-पान परंपरा और पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों की विशेष झलक देखने को मिल रही है। तीजोत्सव के दौरान दिल्लीवासियों को राजस्थान के पारंपरिक स्वाद, आतिथ्य और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है।  इस अवसर पर प्रमुख आवासीय आयुक्त श्री रोहित कुमार ने बताया कि तीजोत्सव का उद्देश्य राजस्थान की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के साथ-साथ उसकी विशिष्ट पाक-कला को भी व्यापक मंच प्रदान करना है। राजस्थानी व्यंजन केवल स्वाद का विषय नहीं हैं, बल्कि वे राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपरा, आतिथ्य और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि तीजोत्सव में राजस्थान के विभिन्न अंचलों के पारंपरिक एवं लोकप्रिय व्यंजन विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इनमें दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी, बाजरे की राबड़ी, मिर्ची ब...

अब मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा की सड़के चार- लेन की हो जायेंगी

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 इस परियोजना का विकास हाइब्रिड एन्युइटी मोड तहत किया जाएगा और इसकी कुल पूंजी लागत 3590.73 करोड़ रुपये होगी नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज बिहार में राष्‍ट्रीय राजमार्ग-22 (एनएच-22) के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को चार लेन मानक में उन्‍नयन करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना का विकास हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम) के तहत किया जाएगा। इसकी कुल पूंजी लागत 3590.73 करोड़ रुपये होगी और इसकी कुल लंबाई 82.578 किलोमीटर है। प्रस्तावित परियोजना बिहार के विस्तारित राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ एकीकरण के कारण महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक महत्‍व रखती है। यह एक प्रमुख फीडर कॉरिडोर के रूप में सोनबरसा स्थित भारत-नेपाल सीमा को एनएच-27 (पूर्व-पश्चिम गलियारा) पर स्थित मुजफ्फरपुर जैसे आर्थिक केंद्रों से जोड़ेगा। परियोजना से मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, दुमरा, भुतही और सोनबरसा के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात की भीड़ को काफी कम करने में मदद मिलती है। इस परियोजना से यात्रियों और माल की तेज और सुरक्षित आवाजाही...

प्रधान मंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की आत्मकथा का किया लोकार्पण

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  नई दिल्ली : प्रधान मंत्री   नरेंद्र मोदी ने आज विज्ञान भवन , नई दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति ,   राम नाथ कोविंद की आत्मकथा - ' ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक : माय लाइफ , माय स्ट्रगल्स '   का विमोचन किया। इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष   ओम बिरला उपस्थित थे और उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का लोकार्पण गौरव का विषय है। इस अवसर पर विशिष्टजनों को संबोधित करते हुए , श्री बिरला ने कहा कि उच्च संवैधानिक आदर्शों के प्रतीक पूर्व राष्ट्रपति , श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा दृढ़ संकल्प , संघर्ष और उपलब्धि की प्रेरक गाथा है। श्री कोविंद के प्रारंभिक जीवन में शिक्षा प्राप्ति में आई कठिनायों और चुनौतियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की उनकी यात्रा से उनकी    असाधारण संकल्पशक्ति का परिचय मिलता है और उनकी यह संकल्पशक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा...