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वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए कुछ सरल लेकिन गहन आदतों को अपनाएं:डॉ कुसुम पथरिया

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नोएडा  प्रसिद्ध समाज सेविका व सामाजिक न्याय एवं महिला अधिकारिता बोर्ड की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष डॉ कुसुम पथरिया बताती हैं कि  हमें अपने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए कुछ सरल लेकिन गहन आदतों को अपनाना चाहिए । उनकी दिनचर्या में सचेतन भोजन, 30% फल शामिल करना, भोजन को अच्छी तरह चबाना और सुबह ब्रह्म मुहूर्त में आध्यात्मिक प्रक्रियाएं शामिल करना एक स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली की कुंजी है, खासकर 60+ उम्र के बाद। हमें उन्हें तनाव से बचने, शरीर की जरूरतों को समझने और जीवन को सहजता से जीने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि बुढ़ापा सिर्फ दवाइयों तक सीमित न रहे। उनकी देखभाल में उनकी आहार संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना शामिल होना चाहिए। उनके आहार में 30% फल शामिल करना शरीर को भीतर से ठीक करने और बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है। फाइबर युक्त अनाज, दालें, मेवे और सब्जियों को शामिल करना और तले हुए भोजन से  उनको बचाना भी महत्वपूर्ण है। सुबह का नाश्ता अंकुरित मूंग, चना और भीगी हुई मूंगफली के साथ करना एक पौष्टिक शुरुआत हो सकती है। वे बताती हैं कि जीवनशैली में सच...

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री पाटिल ने की स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के अंतर्गत मल कीचड़ प्रबंधन के नवीन मॉडलों पर प्रदेशों के साथ वार्ता

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जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने एसबीएम (जी) के अंतर्गत समुदाय-नेतृत्व वाली एफएसएम पहलों की सराहना की; व्यापक और टिकाऊ ग्रामीण स्वच्छता समाधानों का आह्वान किया नई दिल्ली:जल शक्ति मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत देश में लागू किए जा रहे मल कीचड़ प्रबंधन (एफएसएम) के विभिन्न मॉडलों पर चर्चा करने के लिए 6 जनवरी  को राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों के साथ एक आभासी संवाद का आयोजन किया। इस संवाद की अध्यक्षता  केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने की। जल शक्ति राज्य मंत्री  वी. सोमन्ना, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव  अशोक के.के. मीना और संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक, एसबीएम (जी), सुश्री ऐश्वर्या सिंह ने भी संवाद में भाग लिया। जिला कलेक्टर, जिला पंचायत प्रमुख, स्वयं सहायता समूह के सदस्य, पंचायत सदस्य, राज्य मिशन निदेशक और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से इस संवाद में शामिल हुए। इस संवाद का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों से सफल और विस्तार योग्य एफएसएम मॉडल साझा करना, एफएसएम के विभिन्न पहलुओं प...

नया वर्ष, नया नोएडा, विकास की ऊँची इमारतों के बीच बुनियादी ज़रूरतों की तलाश- डॉ उमेश शर्मा

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नोएडा। सेक्टर 122 के आवासीय कल्याण संगठन के अध्यक्ष व प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ उमेश शर्मा ने नोएडा के विकास केा लेकर अपना विचार व सुझाव व्यक्त करते हुए बताते हैं कि  नया वर्ष हर शहर के लिए नई उम्मीदें लेकर आता है। ंनोएडा जो देश के तेज़ी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है, ऊँची इमारतों, आईटी हब और आधुनिक आवासीय परियोजनाओं के कारण पहचान बना चुका है। लेकिन जब विकास को आम नागरिक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी के पैमाने पर परखा जाता है, तो तस्वीर उतनी चमकदार नहीं दिखती। वे बताते हैं कि किसी भी विकासशील शहर की असली पहचान उसकी बुनियादी सुविधाओं से होती है-साफ़ सड़कें, बेहतर यातायात, स्वच्छता, पानी, बिजली, सुरक्षा और जवाबदेह प्रशासन। इन्हीं मानकों पर नोएड को परखें तो कई गंभीर कमियाँ सामने आती हैं। सबसे पहली ज़रूरत है सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था। ंनोएडा की कई सड़कों पर गड्ढे, टूटे फुटपाथ और अव्यवस्थित ट्रैफिक आम समस्या बन चुके हैं। पैदल यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सड़क पार करना जोखिम भरा है। जाम अब केवल व्यस्त समय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दिन की समस्या बन गया है। दूसरा बड़ा मुद्दा है स्वच्छता और ...

क्या हिंदुस्तान सच में आगे बढ़ रहा हैं, या जाति के चक्र में ही घूम रहा हैं?

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नव वर्ष पर प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक और लेखक डॉ उमेश शर्मा के विचार  डॉ उमेश शर्मा कहते हैं कि भारत ने विज्ञान, तकनीक और अर्थव्यवस्था में बड़ी छलांग लगाई है, लेकिन एक सवाल आज भी हमारे सामने खड़ा है— क्या हमारी सोच भी उतनी ही आगे बढ़ी है? या हम आज भी जाति की दीवारों के भीतर ही जी रहे हैं? *“जब देश चाँद छू रहा हो, और समाज जाति गिन रहा हो — तो सवाल उठना ज़रूरी है।”* *जाति प्रथा: खत्म होने के बजाय गहरी क्यों होती जा रही है?* जाति प्रथा कभी श्रम-विभाजन के नाम पर शुरू हुई थी, लेकिन समय के साथ यह श्रेष्ठता और हीनता का ज़हर बन गई। आज भी बच्चा पैदा होते ही उससे पहले उसकी जाति पहचान ली जाती है, न कि उसकी संभावनाएँ। राजनीति ने इसे और गहरा किया। जाति अब सामाजिक सच्चाई नहीं, राजनीतिक हथियार बन चुकी है। *“जब पहचान राजनीति बने, तब समाज पीछे रह जाता है।”* *इसका सबसे बड़ा नुकसान किसे होता है?* *सबको*। • योग्य व्यक्ति को अवसर नहीं मिलता • अयोग्य को केवल पहचान के कारण लाभ मिल जाता है • समाज आपस में बँट जाता है • युवा भ्रम और आक्रोश से भर जाते हैं “*जाति नहीं, योग्यता पहचान बने।*” “*बँटा स...

*जहाँ मन शांत, वहाँ जीवन में प्रकाश* *सेक्टर-122, नोएडा में विश्व ध्यान दिवस सामूहिक रूप से भारतीये योग संस्थान द्वारा मनाया गया*

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नोएडा:आज सेक्टर-122, नोएडा में विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर एक शांतिपूर्ण और प्रेरक सामूहिक ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सेक्टर के 50 से अधिक निवासियों ने एक साथ बैठकर मेडिटेशन किया और आंतरिक शांति का अनुभव किया। आवासीय कल्याण संगठन के अध्यक्ष डॉ उमेश शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत संक्षिप्त मौन और साँस आधारित ध्यान से की गई। प्रतिभागियों को सरल तरीके से वर्तमान क्षण में रहने और अपनी साँस के प्रति सजग होने का अभ्यास कराया गया। पूरे वातावरण में शांति, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया गया। डॉ शर्मा ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य था— • तनाव भरी दिनचर्या में मानसिक शांति को बढ़ावा देना • लोगों को ध्यान की सरल और व्यावहारिक विधि से जोड़ना • समाज में सकारात्मकता, धैर्य और आपसी सौहार्द को मजबूत करना ध्यान के बाद उपस्थित लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ  व अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने कहा कि— • “बहुत दिनों बाद मन इतना हल्का महसूस हुआ।” • “साँस पर ध्यान करने से भीतर शांति महसूस हुई।” • “सिर्फ़ कुछ मिनटों के ध्यान से तनाव कम हो ...

मोटापे का इलाज शॉर्टकट से नहीं किया जा सकता: डॉ. जितेंद्र सिंह

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  भारत में 63% मौतें गैर-संक्रामक रोगों से जुड़ी हैं जो किसी न किसी रूप में मोटापे से संबंधित हैं नई दिल्ली;विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि वर्तमान में उपलब्ध वजन घटाने वाली या मोटापा कम करने वाली दवाओं का उपयोग बहुत ही विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। मंत्री जी, जो स्वयं एक प्रख्यात मधुमेह विशेषज्ञ और चिकित्सा के प्रोफेसर हैं, उन्‍होंने कहा कि मोटापा एक जटिल, दीर्घकालिक और बार-बार होने वाला विकार है, न कि केवल एक सौंदर्य संबंधी या जीवनशैली से जुड़ी चिंता। उन्होंने भारत की सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक के रूप में उभरी इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समग्र समाज के दृष्टिकोण का आह्वान किया। डॉ. क्यौंग कोन किम, डॉ. वोल्कान युमुक, डॉ. महेंद्र नरवारिया, डॉ. बीएम मक्कर, डॉ. बंशी साबू और अन्य सहित क्षेत्र के कुछ प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति में आयोजित दो दिवसीय "एशिया ओशिनिया कॉनफ्रेंस ऑन ऑबेसिटी...

संस्कार अध्ययन केंद्र, कोण्डली सेक्टर-151नोएडा में चित्रकला प्रतियोगिता का सफल आयोजन

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‎ ‎सेक्टर-151 स्थित संस्कार अध्ययन केंद्र कोण्डली में शनिवार  को एक भव्य चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रातः 9 बजे हुआ। ‎इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को आयु एवं कक्षा स्तर के अनुसार केटेगरी A, B एवं C में विभाजित किया गया। प्रतियोगिता में कुल 11 विद्यालयों के लगभग 150 बच्चों ने विभिन्न केटेगरी में उत्साहपूर्वक भाग लिया।  ‎कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मदन चौहान (पूर्व मंत्री उo प्रo सरकार), अनार सिंह (कोण्डली ग्राम),  प्रधान सुरेंद्र चौहान (संरक्षक राष्ट्रीय किसान यूनियन मंच, सदरपुर ग्राम), प्रधान मेहर चंद्र  (अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट सफीपुर ग्राम), सुधीर चौहान (किसान नेता, शाहपुर), फिरे सिंह चौहान (कोण्डली ग्राम),  रविंद्र सिंह, जिनका आयोजकों द्वारा स्वागत एवं सम्मान किया गया। साथ ही नोएडा लोक मंच के महासचिव महेश सक्सेना, सचिव शिक्षा समिति लीका सक्सेना कोषाद्यक्ष विभा बंसल, मुक्ता गुप्ता, आशु सक्सेना, वेद प्रकाश गुप्ता, पुष्पा सिंह, लुबना, मीना शर्मा, लक्ष्मी नेगी, रविंद्र, गौरव दुबे, अन्य संस्कार अध्ययन केंद्र की अध्...