श्राद्ध और पितृ पक्ष मृत पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अनुष्ठान
डॉ कुसुम पथरिया श्राद्ध और पितृ पक्ष मृत पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, उन्हें याद करने और उनकी आगे की यात्रा में सहयोग करने का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।कृतज्ञता का भाव रखें।यह अपने माता-पिता और पिछली पीढ़ियों के प्रति आभार जताने का समय है, जिनकी बदौलत आज हमारा जीवन और अस्तित्व है।शारीरिक और ऊर्जावान अभिव्यक्ति: मृत्यु के बाद भी शरीर और जीवन की ऊर्जा कुछ समय तक अलग तरह से काम करती है। अनुष्ठान और क्रियाएं मृत व्यक्ति की ऊर्जा को शांति और स्थिरता देने में मदद करते हैं।पूर्वजों तथा दिवंगत रिश्तेदारों के कल्याण के लिए 'कालभैरव शांति' और 'काल भैरव कर्म' जैसे अनुष्ठान कराए जाते हैं, जो शरीर छोड़ने वाले जीव को गति और सहायता प्रदान करते हैं।यह पुण्यकाल है पितृ पक्ष को किसी भी प्रकार का अशुभ काल मानने के बजाय पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा से किए गए कर्मों के लिए एक सकारात्मक व पवित्र समय बिताना चाहिए।दशहरे के पहले जो अमावस्या की रात आती है उसे ‘महालया अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है। एक तरह से इसी दिन से दशहरा की शुरुआत हो जाती है। जब इस धरती पर स...