संदेश

प्रेस प्रिव्यू में राजस्थान की झांकी बनी आकर्षण का केन्द्र

चित्र
“मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषय पर बीकानेर की उस्ता कला का भव्य प्रदर्शन नई दिल्ली।गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत की जाने वाली “राजस्थान: मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषयक राजस्थान की झांकी गुरुवार सायं दिल्ली कैंट स्थित आर.आर. कैम्प रंगशाला में आयोजित प्रेस प्रिव्यू के दौरान सभी के आकर्षण का केंद्र बनी। बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला को केन्द्र में रखकर तैयार की गई इस झांकी ने अपनी विशिष्ट शिल्पकला, सांस्कृतिक वैभव और जीवंत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। झांकी के अग्र भाग में राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य रावणहट्टा का वादन करते कलाकार की 180 डिग्री घूमती प्रतिमा प्रदर्शित की गई है। इसके दोनों ओर उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी और दीपक आकर्षक फ्रेमों में लगाए गए हैं। झांकी का यह भाग लगभग 13 फीट ऊँचा है। ट्रेलर भाग में उस्ता कला से अलंकृत घूमती हुई पारंपरिक कुप्पी तथा हस्तशिल्प पर कार्य करते कारीगरों के दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं, जो इस कला की जीवंत परंपरा को दर्शाते हैं। पृष्ठभाग में विशाल ऊँट और ऊँट सवार की प्रतिमा राजस्थान की मरुस्थलीय संस्कृति एवं लोक ...

लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बना जहां ताजा कचरे का डंपिंग स्थल शून्य

चित्र
  स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ ने नगरपालिका ठोस कचरे के 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण का लक्ष्य हासिल कर लिया है नव स्थापित शिवारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है लखनऊ में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता बढ़कर 96.53 प्रतिशत हो गई है और स्रोत पर ही कचरे को अलग करने का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक है शिवारी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के शुभारंभ के साथ   लखनऊ ने शहरी स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है   और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत नगरपालिका ठोस कचरे के  100  प्रतिशत  वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्राप्त किया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों के साथ तेजी से विकसित हो रहा एक शहरी केंद्र है। इस तीव्र विकास के कारण अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता में जटिल चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सतत शहरी विकास पर केंद्रित बहुआयामी रणनीति के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान कर रहा है, जिससे...

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का आलोचनात्मक विश्लेषण: नेतृत्व, ईमानदारी और दृष्टिकोण की चुनौतियाँ

चित्र
डॉ उमेश शर्मा  भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), जिसे कभी भारत की “इस्पाती रीढ़” कहा जाता था, पिछले कुछ दशकों में अपनी प्रभावशीलता, ईमानदारी और जन-धारणा में लगातार गिरावट का सामना कर रही है। नीतियों के कार्यान्वयन और जनकल्याण के प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाली यह सेवा आज प्रशासनिक दक्षता, राष्ट्रीय दृष्टिकोण और सेवा-भाव की कमी के कारण आलोचना का विषय बन चुकी है। इसके विपरीत, यह सेवा अब भ्रष्टाचार, दिखावे और अहंकार में उलझी हुई प्रतीत होती है। 1. *प्रशासनिक कौशल की कमी* बहुत से IAS अधिकारी एक कठिन परीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से सेवा में प्रवेश करते हैं, जो शैक्षणिक बुद्धिमत्ता को तो परखती है, परंतु व्यवहारिक प्रशासनिक क्षमता या प्रबंधन कौशल का परीक्षण नहीं करती। यद्यपि कुछ अधिकारी समय के साथ प्रशासनिक विशेषज्ञता विकसित कर लेते हैं, फिर भी एक बड़ा वर्ग नेतृत्व और संगठन कौशल की मूलभूत समझ से वंचित रहता है। निर्णय-निर्धारण की प्रक्रिया अक्सर धीमी, जोखिम-टालने वाली और अत्यधिक नौकरशाही होती है, जिससे नवाचार और प्रभावी सेवा-प्रदान बाधित होता है। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशास...

*सीईओ नोएडा डॉ लोकेश एम को हटाने का औचित्य?*

चित्र
 नोएडा में युवा इंजीनियर के डूबने का मामला:  _-राजेश बैरागी-_  यदि युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के लिए सरकार की यह कार्रवाई उचित है तो मेरे चार प्रश्न सरकार की खिदमत में पेश हैं -क्या इस गैर इरादतन हत्या के लिए नोएडा प्राधिकरण सीधे तौर पर जिम्मेदार है? क्या नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ लोकेश एम इस घटना के लिए सीधे तौर पर अकेले जिम्मेदार थे? तीसरा प्रश्न यह है कि कल रविवार की देर शाम सेवा से बर्खास्त किए गए नोएडा प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल के संविदा अवर अभियंता नवीन की बलि लेने का क्या औचित्य था? चौथा और अहम् प्रश्न यह है कि एक संविदा जेई और मुख्य कार्यपालक अधिकारी के बीच के किरदार कहां हैं जिन्हें अभी तक इस घटना की कार्रवाई से ओझल रखा जा रहा है? नोएडा प्राधिकरण के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी मुख्य कार्यपालक अधिकारी को किसी ऐसी घटना के लिए पद से हटाया गया है।हालांकि मैं इस मामले में नोएडा प्राधिकरण पर बाद में कार्रवाई किए जाने के पक्ष में था। मैं कमिश्नरेट पुलिस, दमकल विभाग और राज्य आपदा मोचन बल की गैर पेशेवर भूमिका से बेहद निराश हूं।ये तीनों युव...

कड़ाके की ठंड से बचने के लिए ग़रीब बच्चों के लिए नवरत्न फाउंडेशन्स संस्था का शीत-कवच अभियान जारी

चित्र
*उत्तर भारत की ठिठुरती ठंड में स र्दी से थरथराते स्कूली बच्चों के लिए नोएडा की नवरत्न फाउंडेशन्स संस्था  #शीत-कवच की गर्माहट लिए, जाड़े की सर्द धूप सी नौनिहालों के चेहरों की मुस्कान बनती जा रही है...* नोएडा  विगत  २३ वर्षों से सामाजिक संस्था नवरत्न फाउंडेशन्स *शीत-कवच अभियान* चलाती आ रही है, जिसके अंतर्गत जनवरी माह 2026 के इस पहले सप्ताह तक  तकरीबन 800 बच्चों को गर्म स्वेटर्स वितरित कर चुकी है। *जिनमें नोएडा सेक्टर-51 की नारी प्रगति सोशल फाऊंडेशंस में 125 स्वेटर , नोएडा सेक्टर-10 के दिव्यतरंग एजुकेयर फाउंडेशन के संग लगभग 110 स्वेटर्स, सेक्टर-45 में 200 स्वेटर्स व  मथुरा स्थित नौझील में 300 स्वेटर्स तथा पावहर दिल्ली के अंतर्गत 125 स्वेटर्स का स्कूली बच्चों के लिए वितरण किया गया* । जिससे उनकी स्कूली शिक्षा निर्बाध रूप से इस ठंड में भी चलती रहे और हमारे भारत के यह भावी भविष्य निधि अपने सपनों की पंख को उड़ान दे सकें। इस खास वितरण अवसर पर नवरत्न फाउंडेशन्स संस्था से महासचिव मुरलीधरन ए.वी, nari प्रगति से मीनाक्षी त्यागी महिला उन्नति संस्था से रेनू बाला शर्मा , दिव्यतर...

बच्चों को मोबाइल की लत से कैसे बचाएँ :डॉ कुसुम पथरिया

चित्र
नोएडा  सामाजिक न्याय एवं महिला अधिकारिता बोर्ड के महिला विंग की अध्यक्ष और समाज सेविका डॉ कुसुम पथरिया के अनुसार मोबाइल सुविधा है, लत नहीं, और माता-पिता को बच्चों के लिए समय सीमा तय करनी चाहिए, उन्हें अन्य रचनात्मक गतिविधियों (किताबें, खेल, प्रकृति) में लगाना चाहिए, और खुद एक उदाहरण बनना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ बच्चों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार की है; फोन को "जरूरत" तक सीमित कर दें और इसे बच्चों के मानसिक, शारीरिक विकास के लिए खतरा समझें।  वे सलाह देती हैं कि बच्चों को मोबाइल से दूर  रखें: मोबाइल को एक टूल समझें, लाइफलाइन नहीं: मोबाइल फ़ोन आपके काम को आसान बनाने के लिए है। इसे खुद पर हावी न होने दें। अगर आप इसे स्विच ऑफ भी कर दें, तो दुनिया चलती रहेगी। माता-पिता खुद उदाहरण बनें: बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते देखते हैं। अगर आप खुद हर समय फोन पर रहेंगे, तो बच्चे भी वही करेंगे। इसलिए, पहले खुद मोबाइल का उपयोग कम करें। स्क्रीन टाइम सीमित करें (Time Table बनाएं): बच्चों के लिए मोबाइल और स्क्रीन देखने का समय निश्चित करें। इससे ज़्यादा उन्हें फोन न दें।...

10 मिनट की डिलीवरी पर रोक: वर्षों से उठाई गई कैट की चेतावनियों पर सरकार की निर्णायक कार्रवाई

 नई दिल्ली । कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा दी जा रही 10 मिनट की डिलीवरी सेवा पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का जोरदार स्वागत किया है। कैट ने इसे प्रधान मंत्री के मार्गदर्शन में लिया गया एक समयबद्ध, मानवीय और दूरदर्शी निर्णय बताया है, जो डिलीवरी कर्मियों की जान और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। कैट ने स्पष्ट किया कि यह विषय हालिया नहीं है, बल्कि कैट ने लंबे समय से क्विक कॉमर्स के खतरनाक और अनियंत्रित मॉडल को लेकर सरकार और देश को आगाह करता रहा है। इस क्रम में सबसे पहले,  मानसून सत्र 2024  के दौरान कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने संसद में इस गंभीर मुद्दे को मजबूती से उठाया था। उन्होंने क्विक कॉमर्स के अनियंत्रित विस्तार पर चिंता जताते हुए डार्क स्टोर्स पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करते हुए एक प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत किया था। इस अवसर पर उन्होंने कहा था:“मैंने डार्क स्टोर्स पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करते हुए प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत किया, ताकि क्विक कॉमर्स के उस अनियंत्रित मॉडल पर रोक लगाई जा ...