क्या शाकाहारियों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं?
- डॉ. शैलेश शुक्ला लोकतांत्रिक समाज में प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। यह स्वतंत्रता व्यक्तिगत गरिमा और जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किंतु किसी भी अधिकार की सीमा वहीं तक होती है , जहाँ से दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का हनन प्रारंभ होता है। यदि किसी व्यक्ति की भोजन संबंधी स्वतंत्रता के कारण दूसरे व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई हो , उसे उल्टी , घबराहट , एलर्जी या गंभीर असुविधा का सामना करना पड़े , तो यह केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं रह जाता , बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य , नागरिक सुविधा और प्रशासनिक उत्तरदायित्व का विषय बन जाता है। हाल ही में अभिनेता पंकज त्रिपाठी द्वारा साझा की गई एक फेसबुक पोस्ट ने इसी संवेदनशील प्रश्न को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया। उन्होंने विमान यात्रा के दौरान अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि आसपास बैठे यात्रियों द्वारा खोले गए मांसा...