राहुल गांधी: छवि और वास्तविकता के बीच – राजनीति, डर और आंतरिक संघर्ष
डॉ उमेश शर्मा भारतीय राजनीति में नेताओं की छवि केवल उनके व्यक्तित्व से नहीं बनती, बल्कि उनके व्यवहार, संचार शैली, सलाहकार नेटवर्क, सार्वजनिक धारणा और मीडिया के प्रभाव से गठित होती है।राहुल गाँधी के मामले में यह छवि कई बार विवादास्पद और नकारात्मक रूप ले चुकी है। उनके कई प्रश्न और टिप्पणियाँ अक्सर गलत समय पर उठाए जाते हैं, जिससे जनता और मीडिया में उनके संदेश को लेकर भ्रम और आलोचना उत्पन्न होती है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से उनके सार्वजनिक बयानों का समय और संदर्भ अक्सर जनता की अपेक्षाओं से मेल नहीं खाता। इसका परिणाम यह होता है कि उनके विचार “अप्रभावी” या “विचलित” प्रतीत होते हैं। उनके बॉडी लैंग्वेज कई बार डरी हुई और आक्रामक नजर आती है, जो दर्शकों पर कमजोर या असुरक्षित छवि पेश करती है। हाल ही में आयोजित AI समिट में उनके विचारों और वक्तव्य भी आलोचना और विवाद का कारण बने। विशेषज्ञ और मीडिया ने उनके सुझावों और दृष्टिकोण को अक्सर असंगत या भ्रमित करने वाला बताया, जिससे उनकी छवि और नकारात्मक रूप से ...