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किसानों से जुड़े संवेदनशील उत्पाद व जीएम फसलों के उत्पादों की अनुमति पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार- भारतीय किसान संघ

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  नई दिल्ली । देश में किसानों के सबसे बड़े संगठन भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पर अपना वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका के बीच जो व्यापार समझौता हुआ है, उस पर सरकार की ओर से देश के वाणिज्य मंत्री ने पत्रकार वार्ता में बताया कि गेहूं, चावल जैसा अनाज, दूध एवं डेयरी उत्पाद, फल सब्जी और मसालें ये सभी व्यापार समझौते से बाहर रखे गये है। इसके लिए भारत सरकार को बहुत बहुत धन्यवाद । श्री मिश्र ने आगे कहा कि इसमें एक जो शब्द प्रयोग में आ रहा है, जिसमें कहा गया है कि किसानों से जुड़े संवेदनशील उत्पाद। इस बारे में सरकार को और भी स्पष्टता के साथ पक्ष रखना चाहिए। विशेषकर अमेरिका के जो जी.एम. उत्पाद है, जिन्हें वहां आमतौर पर जानवरों के खाद्य के लिए प्रयोग किया जाता है, ऐसे उत्पाद किसी भी स्थिति में, किसी भी नाम और शर्त पर देश में नहीं आना चाहिए यह भारतीय किसान संघ की स्पष्ट मांग है। श्री मिश्र ने बताया कि अभी भी हमारे देश में खाद्यान फसलों में जी.एम. को अनुमति नहीं मिली है, शोध हो रहा है, जांच पड़ताल चल रही है। मनुष्य और जीवजगत ...

तेज गुस्सा आए तो क्या करें ?

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डॉ कुसुम पथरिया  जल्दी गुस्सा आना आपके भीतर की अशांति को दर्शाता है, जिसे रोजाना 15-20 मिनट ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास (Pranayam), और अपनी भावनाओं के प्रति जागरूक रहकर नियंत्रित किया जा सकता है। बाहरी हालातों को दोष देने के बजाय, अपने मन की स्थिति खुद तय करें और शांत रहने का चुनाव करें।  जब गुस्सा आए, तो गहरी सांस लें या सांसों को गिनना शुरू करें।आंतरिक स्थिति खुद चुनें: यदि आपको गुस्सा पसंद नहीं है, तो आप इसे न करने का विकल्प चुन सकते हैं। यह न सोचें कि बाहरी परिस्थितियों के कारण आपको गुस्सा आया, बल्कि यह याद रखें कि आप अपने भीतर क्या हो रहा है, यह खुद नियंत्रित कर सकते हैं। भावनाओं से दूरी बनाएं: जब भी गुस्सा या तेज भावनाएं आएं, तो मौन हो जाएं और आंखें बंद करके थोड़ी देर एक जगह बैठ जाएं। दूसरों को अपनी भावनाओं का शिकार न बनाएं। आत्म-जिम्मेदारी (Responsibility): अगर कोई दूसरा व्यक्ति तय कर रहा है कि आपको कब गुस्सा आना चाहिए, तो आप गुलाम हैं। अपनी प्रतिक्रियाओं की जिम्मेदारी खुद लें।शरीर-मन का संतुलन: यदि गुस्सा बहुत ज्यादा आता है, तो यह आपकी मानसिक स्थिरता की कमी है। हर ...

*न्यू ग्रीन लॉन स्कूल बना चैंपियन, जीती 14वें नोएडा बसंत महोत्सव की ट्रॉफी*

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नोएडा  सोसायटी फॉर स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एडवांसमेंट (एसएससीए ) की ओर से आयोजित 14वें नोएडा बसंत महोत्सव की विजेता ट्रॉफी न्यू ग्रीन लॉन पब्लिक स्कूल, भंगेल ने जीत ली. स्कूल ने ओम नमो शिवाय पर शानदार तमिल नृत्य किया, जिसने दर्शकों की भरपूर तालियां बटोरी. विजेता स्कूल को विजेता ट्रॉफी के अलावा बच्चों को गोल्ड मेडल, स्पेशल सर्टिफिकेट और स्वर्गीय शिव कुमार त्यागी व उर्मिला त्यागी की स्मृति में चांदी का सिक्का भेंट किया गया. एनजीओ कैटेगरी में सक्षम स्कूल, निठारी को पहले स्थान की ट्रॉफी से पुरस्कृत किया गया. एनईए ऑडिटोरियम, सेक्टर 6 में हुए 14 वें अंतर विद्यालय लोक नृत्य प्रतियोगिता में दिल्ली-एनसीआर के 20 स्कूलों/एनजीओ के बच्चों ने भाग लिया. इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में बच्चों ने पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े लोक नृत्य प्रस्तुत किए. जबकि प्रतियोगिता में जज की भूमिका सुश्री कल्पना भूषण, अंकिता बिष्ट और प्रज्ञा भारद्वाज ने निभाई. प्रतियोगिता में दो कैटेगरी, स्कूल और एनजीओ की रखी गई थी. स्कूल कैटेगरी में चैंपियन ट...

*नोएडा में दिखेगी लघु भारत की झांकी, शुक्रवार को होगा एसएससीए 14वें नोएडा बसंत महोत्सव का आयोजन*

नोएडा  अगर आप सूरजकुंड मेला देखने के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो टेंशन की कोई बात नहीं है. आप इस शुक्रवार (6 फरवरी) को नोएडा में ही लघु भारत की संस्कृति जीवंत तरीके से देख सकते हैं. सोसायटी फॉर स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एडवांसमेंट (SSCA) की ओर से शुक्रवार को 14वें नोएडा बसंत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें नोएडा-ग्रेटर समेत दिल्ली-एनसीआर के 20 स्कूलों/NGO के बच्चे विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगे. इस प्रतियोगिता में टॉप-5 पोजीशन पर रहने वाली संस्थाओं को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाएगा. जबकि *चैंपियन बनने वाले स्कूल को ट्रॉफी-मेडल के साथ-साथ शिव कुमार त्यागी-उर्मिला त्यागी मेमोरियल सिल्वर कॉइन अवार्ड (चांदी का सिक्का) से पुरस्कृत किया जाएगा. सोसायटी के प्रेजिडेंट सुभाष अग्रवाल ने बताया कि यह अंतर-विद्यालय लोक नृत्य प्रतियोगिता शुक्रवार 6 फरवरी को NEA ऑडिटोरियम में होगी. प्रतियोगिता सुबह 9.30 बजे से लेकर 12.30 बजे तक चलेगी. इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में इस बार दर्शकों को पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश से ...

जाति से ग्रस्त भारत नहीं, जाति-मुक्त भारत ही विकसित भारत है

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                            डॉ उमेश शर्मा  भारत में जाति प्रथा आज एक वीभत्स और विकृत रूप धारण कर चुकी है। यह अब केवल सामाजिक व्यवहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि संस्थानों, विद्यालयों, गाँवों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में गहराई से समा चुकी है। शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो जो इसके प्रभाव से अछूता हो। जिस समाज ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” की कल्पना की थी, वही समाज आज जाति के संकुचित दायरों में सिमटता जा रहा है। जाति का सर्वव्यापी प्रभाव आज स्थिति यह है कि विद्यालयों और संस्थानों में योग्यता से पहले जाति देखी जाती है। गाँवों में व्यक्ति का सामाजिक सम्मान उसके आचरण या योगदान से नहीं, बल्कि उसकी जाति से तय होता है। पंचायत चुनाव हों, आरडब्लूए (RWA) के चुनाव हों या लोकसभा के चुनाव—अधिकांश स्थानों पर मत मुद्दों और नीतियों के आधार पर नहीं, बल्कि जातिगत समीकरणों के आधार पर पड़ता है। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र की आत्मा को भीतर से कमजोर करती है और नागरिक चेतना को संकीर्ण बनाती है। जाति आधारित राजनीति के नुकसान जाति आधारित राजनीति ने देश...

प्रेस प्रिव्यू में राजस्थान की झांकी बनी आकर्षण का केन्द्र

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“मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषय पर बीकानेर की उस्ता कला का भव्य प्रदर्शन नई दिल्ली।गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत की जाने वाली “राजस्थान: मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषयक राजस्थान की झांकी गुरुवार सायं दिल्ली कैंट स्थित आर.आर. कैम्प रंगशाला में आयोजित प्रेस प्रिव्यू के दौरान सभी के आकर्षण का केंद्र बनी। बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला को केन्द्र में रखकर तैयार की गई इस झांकी ने अपनी विशिष्ट शिल्पकला, सांस्कृतिक वैभव और जीवंत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। झांकी के अग्र भाग में राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य रावणहट्टा का वादन करते कलाकार की 180 डिग्री घूमती प्रतिमा प्रदर्शित की गई है। इसके दोनों ओर उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी और दीपक आकर्षक फ्रेमों में लगाए गए हैं। झांकी का यह भाग लगभग 13 फीट ऊँचा है। ट्रेलर भाग में उस्ता कला से अलंकृत घूमती हुई पारंपरिक कुप्पी तथा हस्तशिल्प पर कार्य करते कारीगरों के दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं, जो इस कला की जीवंत परंपरा को दर्शाते हैं। पृष्ठभाग में विशाल ऊँट और ऊँट सवार की प्रतिमा राजस्थान की मरुस्थलीय संस्कृति एवं लोक ...

लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बना जहां ताजा कचरे का डंपिंग स्थल शून्य

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  स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ ने नगरपालिका ठोस कचरे के 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण का लक्ष्य हासिल कर लिया है नव स्थापित शिवारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है लखनऊ में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता बढ़कर 96.53 प्रतिशत हो गई है और स्रोत पर ही कचरे को अलग करने का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक है शिवारी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के शुभारंभ के साथ   लखनऊ ने शहरी स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है   और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत नगरपालिका ठोस कचरे के  100  प्रतिशत  वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्राप्त किया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों के साथ तेजी से विकसित हो रहा एक शहरी केंद्र है। इस तीव्र विकास के कारण अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता में जटिल चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सतत शहरी विकास पर केंद्रित बहुआयामी रणनीति के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान कर रहा है, जिससे...