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                 अनुच्छेद 370 पर सुनवाई, सर्वोच्च न्यायालय का संसदीय क्षेत्र में असंवैधानिक दखल- हिन्दू संगठन  
October 2, 2019 • Snigdha Verma

अनुच्छेद 370 पर याचिकाओं को  पंजीकृत करने से जाहिर कि रजिस्ट्री में घास खोदुओ की भरमार - स्वामी ओम जी

 

धर्मरक्षक श्री दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनों की बैठक में चिन्ता जतायी गयी की सर्वोच्च न्यायालय की संविधानिक पीठ सर्वोच्च न्यायालय की सीमाओं का अतिक्रमण करके अनुच्छेद 370 और 35क पर लिये संसद के फैसलों पर उंगली उठा रही है और उन पर असंवैधानिक सुनवाई कर रही है। जिसके लिये संविधान के अनुच्छेद 122, 131क और 144क के तहत सर्वोच्च न्यायालय को सुनवाई करने से मना की गयी है।

बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय महामंत्री और बिगबाॅस के सुपर हीरो स्वामी ओम जी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय को भारतीय संविधान ने संविधान के तैतालीसवें संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 131क और 144क को निरस्त करके सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशों को केन्द्रीय विधियों और राज्य सरकार की विधियों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने से साफ तौर पर रोक दिया है। उसके बाद भी सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा धारा 370 और 35क पर संसद द्वारा 6 अगस्त 19 को लिये फैसले और महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा उसे दी गयी स्वीकृति पर उंगली उठाना और उसे सुनवाई के लिये पंजीकृत करने से साफ जाहिर होता है कि सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में घास खोदने वाले जाहिल बैठे हुए है जो इतने समझदार और शातिर भी है कि आतंकवादियों और देशद्राहियों की याचिकाओं को तत्काल सुनवाई के लिये पंजीकृत करने में तनिक भी देर नहीं लगाते। भले ही वें आतंकवादी और देशद्रोही प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करने की साजिश रच रहे हों।

बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने महामहिम राष्ट्रपति जी से अनुरोध किया कि वें तत्काल सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन कुमार गोगोई को संसद और उनके क्षेत्र में असंवैधानिक दखल करने के लिये तलब करे और उसे फटकार लगाये। इसी के साथ इस असंवैधानिक सुनवाई को करके संवैधानिक पीठ जिस प्रकार से जम्मू कश्मीर के आतंकवादियों और देशद्रोहियों को शह दे रही है उन्हे सर्वोच्च न्यायालय के मीडिया पार्क में घास खोदने के काम में लगा दें ताकि अपने आप को संविधान का रक्षक बता रहे सर्वोच्च न्यायालय के जज और रजिस्ट्री फिर कभी भी संविधान का उल्लंघन करने की जुर्रत न कर सके।