ALL Crime Ministries Science Entertainment Social Political Health Environment Sport Financial
मायावती एक बार फिर से सर्वसम्मति से बी.एस.पी की राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित
August 28, 2019 • Snigdha Verma

नई दिल्ली : बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की केन्द्रीय यूनिट के तत्वावधान में आज यहाँ आयोजित बी.एस.पी. केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति व आल-इण्डिया स्टेट पार्टी यूनिट के वरिष्ठ पदाकिारियों के साथ-साथ देशभर से चयनित पार्टी के प्रतिनिधियों की विशेष बैठक में बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश बहन कुमारी मायावती जी को सर्वसम्मति से फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 
बी.एस.पी. यू.पी. स्टेट यूनिट कार्यालय 12 माल एवेन्यू में आयोजित इस अति- महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य एजेण्डा पार्टी के संविधान के मुताबिक बी.एस.पी. का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव होना आदि था, जिसके लिए इससे सम्बन्धित सभी जरूरी प्रक्रियाओं को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद (राज्यसभा) श्री सतीश चन्द्र मिश्रा जी  ने पूरा किया और सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद सुश्री मायावती जी को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने की घोषणा की गई, जिसका भरपूर स्वागत इस बैठक में मौजदू सभी लोगों ने ज़ोरदार तालियों की गड़गड़ाहट के साथ किया और बहन मायावती जी ज़िन्दाबाद, बी.एस.पी. ज़िन्दाबाद, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी अमर रहें आदि के नारे लगाये तथा बहनजी के अच्छी सेहत के साथ दीर्घायू होने की कामना की गई ताकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अधूरे कारवाँ को मंज़िल तक पहुँचाकर उनके सपनों का समतामूलक देश व समाज बनाया जा सके, जिसके लिए सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करना बहुत जरूरी है, जैसाकि स्वंय बाबा साहेब का यह कहना था।
तदुपरान्त बहन कु. मायावती जी ने सर्वसम्मति से एक बार फिर बी.एस.पी. का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर सभी लोगों का तहेदिल से आभार प्रकट किया और देशभर मंे पार्टी के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं व अनुयाइयों को भरोसा दिलाया कि देश में खासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों में समय-समय पर जन्में अपने महान संतो, गुरुओं व महापुरुषों में से विशेषकर महात्मा ज्योतिबा फूले, छत्रपति शाहूजी महाराज, श्री नारायणा गुरु, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी के मानवतावादी मिशन को     बी.एस.पी. की मूवमेन्ट के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए वे हर प्रकार की कुर्बानी देने को तैयार रहती हैं तथा पार्टी व मूवमेन्ट के हित में न तो वे कभी रुकने वाली हैं और न ही झुकने वाली हैं, टूटना तो बहुत दूर की बात है। वैसे भी बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का मूवमेन्ट आज मज़बूत होकर इतना तेजी से आगे बढ़ रहा है कि इसको अब विरोधियों के कोई भी साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से भटकाया या तोड़ा नहीं जा सकता है। और ख़ासकर 'बहुजन समाज' व अपरकास्ट समाज के गरीबों के बल पर ही बी.एस.पी. हमेशा ''सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय'' के सिद्धान्त व लक्ष्य की प्राप्ति पर लगातार अग्रसर रहेगी। 
इसके साथ ही सीमावर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य से धारा 370 का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने का उल्लेख करते हुए इस अवसर पर सुश्री मायावती जी ने कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर हमेशा ही देश की समानता, एकता व अखण्डता आदि के पक्षधर रहे हैं और इसी आधार पर वे जम्मू-कश्मीर राज्य में अलग से धारा 370 का प्रावधान करने के कतई भी पक्ष में नहीं थे। इसी खास वजह से ही बी.एस.पी. ने संसद में इस धारा को हटाये जाने का समर्थन किया है। लेकिन देश में संविधान लागू होने के लगभग 70 वर्षों के उपरान्त इस धारा 370 की समाप्ति के बाद, वहाँ पर हालात सामान्य होने में अब थोड़ा समय अवश्य ही लगेगा। इसलिए इसका थोड़ा इन्तजार किया जाये, तो यह बेहतर ही होगा, जिसको माननीय कोर्ट ने भी माना है। ऐसे में अभी हाल ही में बिना अनुमति के कांग्रेस व अन्य पार्टियों के नेताओं का कश्मीर जाना क्या केन्द्र व वहाँ के गवर्नर को राजनीति करने का मौका देने जैसा कदम नहीं है? अगर इनके जाने पर कश्मीर में थोड़े भी हालात बिगड़ जाते, तो फिर क्या केन्द्र की सरकार इसका दोष इन पार्टियों पर नहीं थोप देती, इस पर भी विचार कर लिया जाता, तो यह उचित ही होता। हालांकि वास्तव में वैसे इस समस्या की मूल जड़ कांग्रेस व पण्डित नेहरू ही हैं।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर से अलग करके लद्दाख क्षेत्र को अलग केन्द्र शासित प्रदेश बनाए जाने का भी हमारी पार्टी स्वागत करती है। इससे लेह-लद्दाख क्षेत्र के बौद्ध समुदाय की वर्षों पुरानी माँग पूरी हुई है और वे इससे बहुत प्रसन्न हैं। अब उनकी अपनी माँग के मुताबिक केन्द्र सरकार को उनकी विशिष्ट पहचान, उनकी संस्कृति व उनके क्षेत्र के आपेक्षित विकास आदि पर खास ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इतना ही नहीं बल्कि धारा 370 की समाप्ति आदि का काम अगर कांग्रेस पार्टी ने अपने लम्बे शासनकाल में पहले ही कर लिया होता तो आज जम्मू-कश्मीर में हालात बेहतर होते तथा बीजेपी को भी इसकी आड़ में राजनीति करने का मौका नहीं मिलता।
वैसे भी कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही उदासीन व ग़ै़र-सकारात्मक रवैया केवल जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के सम्बंध में रहने के साथ-साथ देश के सर्वसमाज में से खासकर गरीबों, दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ों एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों में से ख़ासकर मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध आदि के प्रति भी रहा है, जिस कारण इनके सामाजिक व आथर््िाक हालात आज़ादी के इतने दशकों के बाद अभी भी काफी ज्यादा ख़राब बने हुए हैं।
 
सुश्री मायावती जी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी व इनकी सरकारों में खासकर 'बहुजन समाज' की इतनी ज्यादा उपेक्षा हुई है कि जिसको भुला पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असम्भव है। बाबा साहेब डा. अम्बेडकर को आपेक्षित सम्मान देने के क्रम में इन्होंने उन्हें ना तो पहले संसद में चुनकर जाने दिया और ना ही उनके मरणोपरान्त उनको ''भारतरत्न'' की उपाधि से सम्मानित किया। इसी प्रकार पूरे देश में एस.सी. व एस.टी. वर्ग को भी ईमानदारी के साथ आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया तथा संविधान की धारा 340 के हिसाब से अन्य पिछड़े वर्गों (ओ.बी.सी.) को सरकारी नौकरियों व शिक्षा आदि के क्षेत्र में आरक्षण की सुविधा आजादी के लगभग 43 वर्षों तक नहीं दी गयी और ना ही बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी की मृत्यु पर एक दिन का भी 'राष्ट्रीय शोक' घोषित किया गया। साथ ही, ख़ासकर मुस्लिम समाज आदि के प्रति भी कांग्रेस पार्टी की उपेक्षा, जुल्म-ज्यादती, भीषण दंगे व तिरस्कार आदि को भी कभी कैसे भुलाया जा सकता है, जिसका खुलासा जस्टिस (अवकाशप्राप्त) राजिन्दर सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में भी साफ तौर पर किया गया है।
लेकिन चाहे दलित समाज हो या आदिवासी समाज व ओ.बी.सी. वर्ग हो या मुस्लिम समाज या फिर अपरकास्ट समाज के करोड़ों गरीब एवं उपेक्षित लोग हो, इन सबकी सुधि  बी.एस.पी. ने ही यू.पी. में बनी अपनी चार बार की सरकारों में ही ली है और इनके हित व कल्याण के लिए ''सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय'' की नीति पर मजबूती के साथ सरकार चलाई है, जो आज भी एक बेहतरीन  मिसाल है।
सुश्री मायावती जी ने कहा कि यू.पी. में बी.एस.पी. सरकार के बेहतरीन काम ऐसे उदाहरण हैं जिनके बल पर देश के अन्य राज्योें में होने वाले चुनावों में बी.एस.पी. लोगों से अपना समर्थन माँग सकती है। इस सम्बंध में ख़ासकर हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखण्ड व दिल्ली विधानसभा के लिए शीघ्र ही होने वाले आमचुनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन राज्यों में पार्टी को पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ना है। बी.एस.पी. को खासकर सत्ताधारी बीजेपी व कांग्रेस दोनों के खिलाफ इन चुनावों में लड़ना है और पहले बैलेन्स आफ पावर बनकर आगे बढ़ना है। और वैसे भी सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथों में लिए बिना हमारे लोगों का हित व कल्याण संभव ही नहीं है, अब यह बातें शायद बताने की जरूरत नहीं रही है। इसके साथ-साथ उत्तर प्रदेश में कुछ सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में भी  बी.एस.पी को अपना अच्छा रिजल्ट लाना है। इसके लिये भी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कुछ जरुरी दिशा-निर्देंश भी दिये। अन्त में उन्होंने पार्टी के सभी राज्यों के लोगों को यह भी आह्वान किया कि वे अपने-अपने राज्य में पार्टी व मूवमेन्ट के हित में पूरे जी-जान से लगे रहें क्योंकि देश में करेाड़ों कमजोर तबकों, धार्मिक अल्पसंख्यकों एवं सर्वसमाज में से खासकर गरीबों, मजदूरों, छोटे किसानों, व्यापारियों व अन्य मेहनतकश लोगों की आशायें केवल      बी.एस.पी. से ही सम्बद्ध हैं।