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विभाजनकारी व असंवैधानिक नागरिकता संशोधन कानून को वापिस ले : मायावती
December 18, 2019 • Snigdha Verma

नई दिल्ली :  केन्द्र सरकार के नागरिकता संशोधन बिल के पास हो जाने के बाद से ही अब इसके विरोध में पूरे देशभर में लगभग हर जगह काफी हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं और ऐसा अक्सर तभी होता है जब सरकार अपने स्वार्थ में, अपने देश के संविधान को भी ताक पर रखकर किसी एक समुदाय व धर्म के लोगों की उपेक्षा करती है तथा उनके साथ भेदभाव आदि वाला वर्ताव करती है और यह सब हमें केन्द्र सरकार के नये बने नागरिकता कानून में देखने के लिए मिल रहा है क्योंकि इस नये बने कानून में मुस्लिम समाज की पूरे तौर से उपेक्षा की गई है जिससे हमारी पार्टी कतई भी सहमत नहीं हैं जिसकी खास वजह से ही अर्थात् इसे पूरे तौर से विभाजनकारी व असंवैधानिक मानकर ही फिर हमारी पार्टी ने इनके इस बिल के विरोध में अपना वोट भी दिया है।
लेकिन वर्तमान बीजेपी की केन्द्र सरकार के इस कदम से हमें ऐसा लगता है जो लोगों की यह आमराय भी है कि यह (केन्द्र सरकार) सरकार पाकिस्तान में वहाँ हिन्दुओं के साथ की गई जुल्म-ज्यादती का, जो यह बिल्कुल भी उचित नहीं था, तो उसका बदला, अब वर्तमान केन्द्र की बीजेपी सरकार यहाँ अपने आजाद भारत देश के मुसलमानों से लेना चाहती है जो कतई भी न्यायसंगत नहीं है तथा यह एक प्रकार से मानवता के विरुद्ध भी है।
जबकि यहाँ अपने आजाद भारत देश के मुसलमानों ने पाकिस्तान देश के मुसलमानों की तरह, हिन्दुओं का कोई शोषण आदि नहीं किया है और ये दोनों धर्मों के लोग यहाँ सब आपस में मिलकर रहते हैं इसके यहाँ अनेकों उदाहरण भी हैं। जिसका सबसे बड़ा सबूत खुद इनकी पार्टी में भी है, अर्थात् इनकी पार्टी में कई ऐसे वरिष्ठ मुस्लिम नेता हैं जिन्होंने यहाँ हिन्दू लड़की के साथ शादी की है। और वे यहाँ अपनी खुशहाल जिन्दगी बिता रहे हैं।
इसलिए इनको (केन्द्र सरकार) यह बदला यहाँ अपने आजाद भारत देश के मुसलमानों से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के मुसलमानों से ही लेना चाहिये और इस मामले में फिर हमारी पार्टी भी इनका पूरा-पूरा साथ देगी। लेकिन इनका इसकी आड़ में अपना कुछ और स्वार्थ सिद्ध करना यह अति-निन्दनीय, अति-शर्मनाक व अति-दुर्भाग्य-पूर्ण ही होगा अर्थात् इस नागरिकता कानून की आड़ में एक विशेष समुदाय के लोगों के साथ यह सब अन्याय करना बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
इतना ही नहीं बल्कि अब यह सरकार इस कानून का विरोध करने वाले लोगों पर व खासकर सम्बन्धित समुदाय का जो पुलिस के ज़रिये इनका बड़े पैमाने पर उत्पीड़न आदि करवा रही है तो इसने अब सबको चिन्तित करके रख दिया है और यहाँ उ.प्र. में अलीगढ़ के बाद अब खासकर दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं के ऊपर कैम्पस में घुसकर  केन्द्र सरकार की पुलिस द्वारा की गई जुल्म-ज्यादती का हर तरफ काफी ज्यादा विरोध हो रहा है जिसे अति-गम्भीरता से लेते हुये, इसका माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। हालांकि इस नये कानून को माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है और हमें यह काफी उम्मीद भी है कि इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट भारतीय संविधान की गरिमा को किसी भी कीमत पर गिरने नहीं देगी।
इसके साथ ही, यहाँ मैं यह भी बताना चाहती हूँ कि इस कानून को लेकर जो पूरे देशभर में जबरदस्त हिंसक घटनायें हो रही हैं और अब तो पूरे देश के काफी शिक्षण संस्थान भी इसके चपेट में आ गये हैं तो ऐसी स्थिति में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देंशानुसार आज हमारी पार्टी के संसदीय दल ने माननीय राष्ट्रपति जी से भी मिलने का समय मांगा हुआ है। साथ ही आज यहाँ उत्तर प्रदेश की विधानसभा में भी हमारी पार्टी महिला उत्पीड़न व खराब कानून व्यवस्था के साथ-साथ इस कानून के विरोध में भी अपनी खुलकर आवाज उठायेगी।
अन्त में अब मैं केन्द्र सरकार से यह भी मांग करती हूँ कि वे इस विभाजनकारी व असंवैधानिक नागरिकता संशोधन कानून को वापिस ले ले, तो यह देश व संविधान के हित में सही होगा, वरना फिर इसके आगे चलकर काफी दुष्परिणाम भी आ सकते हैं और हो सकता है कि अगले लोकसभा आमचुनाव में इनकी भी हालत कहीं 1977 की तरह कांग्रेस पार्टी वाली ही अत्यन्त बुरी ना हो जाये अर्थात् इनको उस दौरान कांग्रेस की रही हकूमत की तरह यहाँ उस एमरजेन्सी जैसे हालत पैदा नहीं करने चाहिये, जिसमें इस पार्टी ने अर्थात् कांग्रेस पार्टी ने पूरी तरह से अपना तानाशाही वाला रवैया अपनाते हुए हर धर्म, हर जाति व हर वर्ग के लोगों को हर प्रकार से प्रताड़ित करके उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी भेज दिया गया था। 
और अब वर्तमान में, हमें बीजेपी सरकार का भी रवैया काफी कुछ कांग्रेस पार्टी की इमरजेन्सी जैसा तानाशाही वाला ही लग रहा हैं अर्थात् अब ये भी अपने विरोधियों आदि लोगों के खिलाफ हर स्तर पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके, उन्हें जेलों में भेजने का काम कर रहे है, जो कतई भी सही व लोकतांत्रिक नहीं है। अतः हमारी पार्टी की बीजेपी को यही सलाह है कि वह भी कांग्रेस पार्टी की ही तरह सत्ता के नशे मे चूर होकर तानाशाह न बने तो ज्यादा बेहतर होगा, वरना फिर इस पार्टी को भी कांग्रेस की तरह ही फिर से सत्ता में वापिस आने के लिए धरना-प्रदर्शन आदि करने का ही सहारा लेना पड़ेगा। जैसे आजकल कांग्रेस पार्टी थोड़ा मौका पाते ही आयदिन किसी ना किसी मुद्दे पर गली, कूचे व चैराहों आदि पर धरने में बैठकर प्रदर्शन आदि करती रहती है।