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ग़रीबी व बेरोजगारी दूर करना हो सरकार की पहली प्राथमिकता: मायावती
September 5, 2019 • Snigdha Verma


नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश  मायावती जी ने आज यहाँ आयोजित यू.पी. स्टेट यूनिट की अति-महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के ज़मीनी स्तर पर चल रहे कार्यकलापों व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की प्रगति आदि की गहन समीक्षा की तथा विधानसभा उपचुनाव सहित पार्टी की आगे की तैयारियों के सम्बन्ध में भी जरुरी दिशा-निर्देश दिये।
यू.पी. बी.एस.पी. स्टेट यूनिट कार्यालय 12 माल एवेन्यू में आयोजित इस खास बैठक में राज्य स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ मण्डल, ज़िला, विधानसभा-स्तर तक के पार्टी के हजारों ज़िम्मेवार पदाधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें पिछले जून माह की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के सम्बन्ध में भी प्रगति रिपोर्ट ली गई तथा ज़मीनी स्तर पर काम में और ज़्यादा तेज़ी व सुधार लाने को निर्देशित किया गया।
इस बैठक में अपने सम्बोधन में यू.पी. के विधानसभा उपचुनावों का उल्लेख करते हुए सुश्री मायावती जी ने कहा कि इस बार ख़ास रणनीति के तहत इन उपचुनावों को लड़ने के लिए पार्टी के पुराने व वरिष्ठ चेहरों को ही ज़्यादातर चुनाव मैदान में उतारा गया है, जिनको जिताने के लिए हर प्रकार का सहयोग व समर्थन करने की अपील उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों से की।
देश व ख़ासकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल व उदासीन सरकारी कार्यकलापों का संज्ञान लेते हुए उन्होंने कहा कि क़ानून को हाथ में लेकर अराजकता, हिंसा व तनाव फैलाने के साथ-साथ भींड़ हिंसा में हत्या आदि की बढ़ती हुई घटनाओं को रोक पाने में सरकारी नाकामी ने देश व दुनिया का ध्यान खींचा है और ऐसे में बी.एस.पी. के कार्यकर्ताओं/समर्थकों को बहुत सजग व सावधान रहने की ज़रूरत है। वे लोग कोई भी ऐसा काम नहीं करें जिससे सरकार को जातिवादी द्वेष व राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का कोई मौका मिले।
ख़ासकर माॅब लिंचिंग, जातिवादी जुल्म-ज्यादती, महिला उत्पीड़न व असुरक्षा की बढ़ती घटनाओं ने प्रदेश, देश व समाज को काफी चिन्तित व परेशान कर रखा है, लेकिन इसके शिकार सर्वसमाज के लोगों को मदद स्थानीय स्तर पर कानूनी दायरे में ही करने का भरपूर प्रयास करते रहना चाहिए तो बेहतर है। इस सम्बन्ध में विशेषकर धारा 144 की सरकारी पाबन्दियों का उल्लंघन बिल्कुल नहीं करना है। ऐसा करके सरकारी मंसूबों/षडयंत्रों को विफल किया जा सकता है। 
उन्होंने कहा कि यू.पी. में ख़ासकर अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यवस्था की हालात काफी ज़्यादा ख़राब हैं तथा बढ़ती ग़रीबी व बेरोज़गारी आदि की समस्या और ज्यादा विकट होकर अनेक प्रकार के अपराधों को बढ़ाने का कारण बन रही है और ऐसे में अपनी विफलताओं पर से लोगों का ध्यान बांटने के लिए सरकार हर प्रकार का हथकण्डा इस्तेमाल कर सकती है। 
वैसे सरकारी गलत नीतियों व कार्यकलापों से आमजनता में जो त्राहि-त्राहि मची हुई है उसका आक्रोश संभव है यहाँ की जनता आगामी उपचुनावों में निकालने का प्रयास करे। साथ ही, माबॅ लिंचिंग के सम्बन्ध में विशेष सख़्त क़ानून बनाने की अपनी पार्टी की केन्द्र व यूपी सरकार से माँग उन्होंने फिर से दोहराई। 
जहाँ तक देश की अर्थव्यवस्था के दुर्दशा की बात है वह आजकल कुछ ज़्यादा चर्चाओं में है क्योंकि यह चरमराकर काफी बुरे दौर से गुजर रही है, जिस कारण बेरोज़गारी हर स्तर पर लगातार बढ़ती जा रही है, जो सरकार के लिए वास्तव में बड़ी चिन्ता की बात होनी चाहिए। कहीं यह सब नोटबंदी व जीएसटी को आपाधापी में लागू करने का कुप्रभाव तो नहीं है? वैसे भी देश में फैली व्यापक ग़रीबी व बेरोजगारी की समस्या को दूर करना केन्द्र व राज्य सरकारों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान समय में यही सबसे बड़ा देशहित व सही राष्ट्र भक्ति भी हैं।
वैसे इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार ने अभी हाल ही में जो भी कदम उठाये हैं वे देर से उठाए गए आधे-अधूरे ही लगते हैं। जनता की जेब खाली पड़ी हुई है। उसके पास काम नहीं है और ना ही खर्च करने के लिए पाकेट में पैसे हैं, जो देश के करोड़ों लोगों की असली समस्या है व यही देश की अर्थव्यवस्था को चैपट कर रही है। सरकार समय रहते अपनी नीतियों की सही समीक्षा करे तो बेहतर होगा। लगभग 130 करोड़ जनसंख्या वाले भारत देश की अधिकतर जनता गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी आदि की चक्की में क्या अनन्तकाल तक पिसती ही रहेगी? सरकार इस पर फौरन प्रभावी ध्यान देकर करोड़ों युवाओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करे तो बेहतर है।
इसके अलावा, दलित, आदिवासी व पिछड़े वर्ग के लोग आरक्षण के सही ढंग से लागू नहीं होने के कारण काफी उद्वेलित हैं जबकि सरकारी क्षेत्र में लाखों आरक्षित पद खाली पड़े हुए हैं। इतना ही नहीं बल्कि इन उपेक्षित वर्गों के आरक्षण के संवैधानिक व्यवस्था की समीक्षा की तलवार भी हर वक्त लटकाए रखा है जो अति-दुर्भाग्यपूर्ण है। इस सम्बंध में बी.एस.पी. की जोरदार माँग है कि आरक्षण की समतामूलक मानवतावादी व्यवस्था को संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि घोर जातिवादी तत्वों को इसकी आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का मौका न मिले।
एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. वर्गों के लाखों छात्रों को वजीफा समय पर नहीं उपलब्ध होने के सम्बन्ध में राज्यभर से मिलने वाली अनवरत् शिकायतों के सम्बंध में भी सरकार को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जातिवादी द्वेष से इन उपेक्षित वर्गों के छात्र/छात्राओं का शैक्षणिक जीवन प्रभावित हो रहा है, जिस पर सरकार को तुरन्त ध्यान देने की जरूरत है।
सुश्री मायावती जी ने कहा कि देश व ख़ासकर यूपी में जो बिगड़े हालात हैं उससे ऐसा लगता है कि सत्ताधारी बीजेपी व इनकी सरकार भी वही सब ग़लतियाँ कर रही है जो पहले कांग्रेस पार्टी की सरकारों में हुआ करता था और जिससे त्रस्त होकर जनता ने उन्हें फिर नकारा है व उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी। कुल मिलाकर आज बीजेपी की केन्द्र व राज्यों में जो सरकार है वह कांग्रेस पार्टी की अनगिनत ग़लतियों व विफलताओं का ही नतीजा है लेकिन अब क्या बीजेपी भी कांग्रेस की तरह ही अपनी गलत नीतियों व कार्यकलापों से अपने पाॅव पर खुद ही कुल्हाड़ी तो नहीं मार रही है, जनता की इसपर पैनी नज़र जरूर है।