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"महामारी व लॉकडाउन के मनो-सामाजिक प्रभाव तथा इनका सामना कैसे किया जाए"
May 16, 2020 • Snigdha Verma • Social

कोरोना अध्ययन पुस्तकमाला के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा प्रकाशित "महामारी व लॉकडाउन के मनो-सामाजिक प्रभाव तथा इनका सामना कैसे किया जाए" विषय पर केन्द्रित सात पुस्तकों का मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा ई-विमोचन

नयी दिल्ली

"इस समय दुनिया के सामने आई इन विकट परिस्थितियों का सामना करने के लिए, नेशनल बुत रास्त द्वारा इस विलक्षण एवं अद्वितीय पुस्तकों के सेट को प्रकाशित किया गया है, मुझे उम्मीद है कि ये पुस्तकें व्यापक स्तर पर आम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य हेतु मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगी।" माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यह विचार राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) की कोरोना अध्ययन पुस्तकमाला के अंतर्गत सात  पुस्तकों के सेट के मुद्रित संस्करण के साथ-साथ ई-संस्करण को इन्टरनेट के माध्यम से लोकार्पण करते हुए व्यक्त किए। इसके पश्चात, एनबीटी अध्ययन समूह के शोधकर्ताओं / लेखकों के साथ ई-विमर्श  सत्र भी हुआ । श्री  निशंक ने इस विशिष्ट प्रयास के लिए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत को बधाई देते हुए कहा, "मैं उन शोधकर्ताओं को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जो लोगों के सुगम पठन हेतु इस महत्वपूर्ण सामग्री को पुस्तक के रूप में लाए हैं और मैं मानता हूं कि 'मानसिक स्वास्थ्य के उपाय' एक महत्वपूर्ण विषय क्षेत्र है जिसकी हम सभी को इस कठिन समय में आगे बढ़ने तथा महामारी के खिलाफ योद्धाओं के रूप में लड़ने के लिए आवश्यकता है।” उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियाँ "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत" भी उद्धृत की, जिसका अर्थ है कि हमारा मन एवं मानसिक स्वास्थ्य ही हमारे कार्यों को तय करते हैं । 


इस अवसर पर एनबीटी के अध्यक्ष, प्रो. गोविंद प्रसाद शर्मा ने कहा, "मैंने अपनी उम्र में दुनिया में कई महामारियों और बीमारियों को देखा है, लेकिन आज हम जिस महामारी का सामना कर रहे हैं, वह चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यह उन लोगों के मनोवैज्ञानिक रूप से भी प्रभावित कर रही है जो कोरोना-पीड़ित नहीं है। इसलिए ये पुस्तकें  बेहद आवश्यक हैं, और ये पुस्तकें केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पाठकों की जरूरतों को पूरा करेंगी।  प्रो. शर्मा ने माननीय मंत्री को उनके मार्गदर्शन तथा संपूर्ण भारत में बच्चों को इस महामारी से प्रभावित न होने के लिए किए गए प्रयासों तथा सभी के लिए ई-शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु उनके प्रयासों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। 

इस परियोजना की परिकल्पना और क्रियान्वयन में अग्रिम भूमिका निभाने वाले एनबीटी के निदेशक,  युवराज मलिक,  ने माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री तथा अध्यक्ष, एनबीटी को उनके निरंतर मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया तथा चार सप्ताह के रिकॉर्ड समय में सात पुस्तकों के विषय चयन, लेखन, चित्रांकन  और मुद्रण कार्य को पूरा करने के लिए एनबीटी टीम के साथ-साथ शोधकर्ताओं और चित्रकारों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तर-कोरोना पाठकगण की पठन आवश्यताओं को पूरा करने के लिए एनबीटी द्वारा समय के साथ और अधिक नई पठन सामग्री भी लाई जाएगी। 

अध्ययन समूह के सदस्यों ने अपने-अपने घरों से पुस्तकों पर काम करने, प्रौद्योगिकी की सहायता से समन्वय स्थापित करने जैसे अपने अनुभवों को माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री के साथ साझा किया। आज के समय में इन पुस्तकों की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इस कार्य के अनूठे अनुभवों के साथ ही उनके लिए भी यह एक चिकित्सीय अनुभव रहा। इस अवसर पर प्रख्यात मनोचिकित्सक व अध्ययन समूह के सदस्य डॉ. जीतेंद्र नागपाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए मनोवैज्ञानिक अनुसंधान एवं परामर्श के क्षेत्र में इन पुस्तकों के आने वाले समय में अभूतपूर्व महत्त्व को रेखांकित किया। अन्य समूह सदस्यों में शामिल हैं, सुश्री मीना अरोड़ा, लेफ्टिनेंट कर्नल तरुण उप्पल, डॉ.हर्षिता, सुश्री रेखा चौहान, सुश्री सोनू सिद्धू तथा सुश्री अपराजिता दीक्षित। 

इस पुस्तकमाला के एनबीटी संपादक  कुमार विक्रम ने सामान्य पाठकों हेतु समय पर पुस्तकें तैयार करने हेतु लेखकों, चित्रकारों का धन्यवाद किया तथा संपादकीय, कला, उत्पादन, आईटी, जनसंपर्क, विक्रय विभागों के 30 से अधिक सदस्यों की एक टीम के साथ लॉकडाउन के बावजूद  इस परियोजना पर काम करने के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने यह कहा कि 'पुस्तक प्रकाशन एवं पुस्तक प्रोन्नयन’ के लिए एक राष्ट्रीय निकाय, एनबीटी की भूमिका इस समय में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि पुस्तकों के रूप में सुव्यवस्थित जानकारी पाठकों पर दीर्घकालिक प्रभाव डालती है तथा न्यास के इन प्रयासों के माध्यम से यह जानकारी पाठकों को प्रदान की जा रही है।

उत्तर-कोरोना पाठकगण की पठन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सभी आयु-वर्ग के पाठकों के लिए प्रासंगिक पठन-सामग्री उपलब्ध कराने तथा इनके दस्तावेजीकरण हेतु राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने इस पुस्तकमाला को विशेष रूप से प्रारंभ किया है। ''महामारी के मनो-सामाजिक प्रभाव तथा इनका सामना किस प्रकार किया जाए" विषय पर केंद्रित पुस्तकों की पहली उप-श्रृंखला के अंतर्गत प्रकाशित की गई ये पुस्तकें एनबीटी द्वारा गठित सात मनोवैज्ञानिकों तथा परामर्शदाताओं के एक अध्ययन समूह द्वारा तैयार की गई हैं। 

इन पुस्तकों को अध्ययन के पश्चात तैयार किया गया है जिसमें समाज के सात अलग-अलग क्षेत्रों में मनो-सामाजिक प्रभाव के विभिन्न पहलुओं को उनके व्यक्तिगत साक्षात्कारों, केस-अध्ययनों तथा सामुदायिक धारणा के माध्यम से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की वेबसाइट तथा अन्य सोशल मीडिया हैंडल पर ऑनलाइन प्रश्नावली की प्रतिक्रियाओं के आधार पर जाना गया। 

दिनांक 27 मार्च से 1 मई 2020 के बीच संचालित एवं विश्लेषित किए गए अध्ययन में, 'संक्रमण के डर को वित्तीय व घरेलू मुद्दों से पहले चिंता का सबसे बड़ा विषय पाया गया।' अध्ययन समूह ने शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक अनुकूलन के साथ-साथ एक लचीले एवं अनुकूलित पोस्ट-कोरोना समाज को तैयार करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति के रूप में ''नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के मानसिक स्वास्थ्य घटक" को मजबूत करने की सिफारिश की है। निपुण एवं कुशल चित्रकारों द्वारा बनाए गए कुछ सुंदर सन्दर्भों के साथ, ये पुस्तकें महामारी और लॉकडाउन से उपजे मानसिक तनाव और चिंता से निपटने के लिए बहुमूल्य एवं व्यावहारिक सुझाव भी प्रदान करती हैं। 

इन पुस्तकों में शामिल हैं : वल्नेरेबल इन ऑटम: अंडरस्टैंडिंग द एल्डर्ली (शोधकर्ता: जीतेंद्र नागपाल तथा अपराजिता दीक्षित; चित्रकार: एलॉय घोषाल), द फ्यूचर ऑफ सोशल डिस्टेंसिंग: न्यू कार्डिनल्स फॉर चिल्ड्रन, एडोलोसेंट्स एंड यूथ (शोधकर्ता: अपराजिता दीक्षित तथा रेखा चौहान, चित्रकार: पार्थ सेनगुप्ता);  द ऑर्डील ऑफ बींग कोरोना वारियर्स: एन अप्रोच टू मेडिकल एंड असेंशिअल सर्विस प्रोवाइडर्स (शोधकर्ता: मीना अरोड़ा तथा सोनी सिद्धू; चित्रकार: सौम्या शुक्ला), न्यू फ्रंटियर्स एट होम: एन अप्रोच टू वुमन, मदर्स एंड पेरेंट्स (शोधकर्ता: तरुण उप्पल तथा सोनी सिद्धू; चित्रकार: आर्य प्रहराज), कौट इन कोरोना कॉनफ्लिक्ट: एन अप्रोच टू द वर्किंग पॉपुलेशन (शोधकर्ता: जीतेंद्र नागपाल तथा तरुण उप्पल; चित्रकार: फजरुद्दीन), मेकिंग सेंस ऑफ़ इट ऑल: अंडरस्टैंडिंग द कन्सर्न्स ऑफ़ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज़ (शोधकर्ता: रेखा चौहान तथा हर्षिता; चित्रकार: विक्की आर्य);  तथा  ऐलीअनैशन एंड रिज़िल्यन्स: अंडरस्टैंडिंग कोरोना अफेक्टेड फैमिलीज़ (शोधकर्ता: हर्षिता तथा मीना अरोड़ा; चित्रकार: नीतू शर्मा)। पुस्तकों के साथ ही, इन पर प्रकाश डालते सात सहायक वीडियो का भी विमोचन किया गया।