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*प्रयास रहे लीवर डॉक्टर न बोले "बी पास्टिव"....
February 14, 2020 • अनिल कुमार श्रीवास्तव • Health

नोएडा

"बी पास्टिव" यह ऐसा शब्द है जो सामान्यता मन प्रफुल्लित कर देता है लेकिन जब स्वास्थ्य के क्षेत्र में जब कोई चिकित्सक कहता है तो दिमाग सन्न रह जाता है। और मरीज सोचने को मजबूर हो जाता है ऐसा कैसे हो गया।बीमार से लेकर तीमारदार तक अस्पतालों के लीवर विभाग में एड़ियां घिसने को मजबूर हो जाते हैं।
शरीर का प्रमुख अंग होने के कारण यह अति महत्वपूर्ण होता है।शरीर को चलाने के लिए इसके काम इतने ज्यादा होते हैं कि भगवान को भी इसे 2 भागो में बाटना पड़ा एक छोटी आंत व दूसरा बड़ी आंत।इससे इसकी महत्ता का अंदाजा लगाना मुश्किल नही होगा।संक्षेप में इंसान का खाया हुआ खाना मांग के मुताबिक सभी आंतरिक अंगों को कुशलता से देता है इसलिए यह अतिमहत्वपूर्ण है।जब अंग शरीर के लिए महत्वपूर्ण है तो इसका रखरखाव व ध्यान भी विशेष रूप से रखना होगा।अगर यह समस्याग्रस्त हो जाय तो शरीर टूटते तो देर नही लगती साथ ही इसका मंहगा इलाज सबके बस की बात भी नही।
हैपेटाइटिस बी और सी वह खतरनाक वायरस हैं जिनके रक्त में सक्रिय होने के बाद पहले लीवर का खात्मा तय माना जाता था और आज भी यह वायरस लीवर के लिए घातक बने हुए हैं।एचसीवी ऐसा खतरनाक वायरस है जो रक्त में सकारात्मक होकर धीरे धीरे लीवर को दीमक की तरह खा जाता है इसीलिए इसको सिरोसिस भी कहा जाता है।पहले तो यह लाइलाज था लेकिन अब बाजार में कुछ ऐसी दवाएं आ गयी हैं जिससे इसके वायरस को दबाए रखा जा सकता है लेकिन इलाज काफी मंहगा है।वायरस निगेटिव बमुश्किल ही होता है।यही हाल हैपेटाइटिस बी का भी है यह वायरस सक्रिय होने के बाद लीवर धीरे धीरे खराब होने लगता है और इलाज बमुश्कित ही कर पाता है।हालांकि इसकी सुरक्षा हेतु बचपन से टीके दिए जाते हैं जिसकी नियमित खुराक डोज होती है।यह दोनों वायरस अनुवांशिक भी होते हैं और खासतौर पर सी का वायरस रक्त से फैलता है।
लीवर की समस्याओं को देखते हुए सामाजिक संस्था नवरत्न फाउंडेशन्स ने आईएलबीएस के सक्रिय सहयोग से नोएडा सेक्टर 8 स्थित नवरत्न ज्ञानपीठ में आर्थिक रूप से कमजोर लोगो की राह आसान करने के लिए निःशुल्क लीवर रक्तजांच व जागरूकता शिविर लगाने का निर्णय लिया है।

इस शिविर में लीवर को स्वस्थ्य रखने के सरल व सुलभ उपाय बताए जाएंगे।चिकित्सक बताएंगे कि इन वायरस से दूर कैसे रहा जाय व लीवर को सुरक्षित कैसे रखें।लीवर फ्रेंडली खान पान पर भी सलाह दी जाएगी।साथ ही सामान्य जांचों की अपेक्षा मंहगी हैपेटाइटिस बी व सी की जांच भी निःशुल्क की जाएगी। सामाजिक सरोकारों से जुड़ी नवरत्न फाउंडेशन्स व स्वास्थ्य सरोकारों से जुड़ी आईएलबीएस अपने दायित्व को निभाते हुए समाजहित में यह पहल कर रही है तो आइए हम अपने आसपास के आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को सूचित कर इस मानव कल्याण मुहिम में अपना योगदान दें।जो मंहगाई के कारण इसकी रक्तजांच व चिकित्सक सलाह नही ले सकते उन तक बात पहुंचा कर अपना कर्तव्य निभाएं और उनको सेहत लाभ दिलवाकर उनके घरों में खुशियो का दीप जलाएं।