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औद्योगिक सेक्टरों की झुग्गियां बनी आफत,कंनटेनमंट जोन में आजाने के कारण उद्योगों में लगे हैं ताला
May 19, 2020 • सुबोध कुमार • Financial
कंटेनमेंट जोन से बाहर हो नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र : विपिन मल्हन
 
- उद्योगों के बंद होने से सरकार को भी हर माह हो रहा 300 करोड़ के राजस्व का घाटा
 
नोएडा। शहर की सबसे बड़ी औद्योगिक संस्था नोएडा एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन (एनईए) ने जिलाधिकारी सुहास एलवाई से मांग की है कि औद्योगिक सेक्टरों और क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन से बाहर रखा जाए। एनईए ने कहा कि ऐसा न करने पर घाटे की वजह से उद्योगों पर ताला लग जाएगा। 
 
जिलाधिकारी के साथ मंगलवार को हुई बैठक में एनईए के अध्यक्ष विपिन मल्हन ने कहा कि कोरोना के संक्रमण रोकने के लिए जिला प्रशासन का प्रयास सराहनीय है। लेकिन, लॉकडाउन के कारण उद्योग बंद होने के कारण कच्चा माल और मशीनें खराब होने की कगार पर हैं। इससे एमएसएमई उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। लॉकडाउन-4 में उत्तर प्रदेश शासन की नई गाइड लाइन के अनुसार शहरी क्षेत्र में कोरोना का एक संक्रमित मिलने पर 250 मीटर और उससे ज्यादा केस मिलने पर 500 मीटर रेडियस के बाहर  इकाइयों को संचालित करने की अनुमति दी गई है। 
 
एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने कहा कि सेक्टर-5, 8, 9, 10 और सेक्टर-11 स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में झुग्गियां बनाकर प्राधिकरण की अरबों रुपये की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। उसका दुष्प्रभाव औद्यौगिक इकाइयों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि घनी आबादी होने के कारण वहां कोरोना संक्रमित निकलते रहेंगे। ऐसे में यदि औद्यौगिक क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन से अलग नहीं किया गया तो नोएडा के काफी उद्योग चल ही नहीं पाएंगे। 
 
उन्होंने डीएम से औद्यौगिक सेक्टरों और क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन से बाहर रखने, कंटेनमेंट जोन का दायरा संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों के आसपास की 5-10 झुग्गियों को सील करने और छोटे उद्योगों को चलाने के लिए सेक्टर-9 की इंडस्ट्रियल मार्केट को खोलने की मांग की है।  
 
विपिन मल्हन ने कहा कि रोजगार और सरकार को राजस्व देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाला एमएसएमई सेक्टर पहले से ही वैश्विक मंदी की मार से टूटा हुआ है। उस पर कोरोना जैैसी महामारी के कारण लॉकडाउन ने रही सही कसर भी निकाल दी है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के बंद होने से सरकार को भी प्रत्येक माह 300 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा हो रहा है। इसलिए उद्योगों को तत्काल राहत दी जाए।