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बैंकों के मर्जर का बैंक कर्मचारियों पर इफ़ेक्ट दिखना शुरू
September 4, 2020 • Snigdha Verma • Financial

नई दिल्ली : स्टेट बैंक ने अपने 30000 से ज्यादा कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना यानि वी.आर.एस. की स्कीम निकाली है। इस योजना के तहत 25 साल की सर्विस और 55 साल की आयु के कर्मचारी/ अधिकारी इसके लिये आवेदन कर सकते हैं। यह योजना 1 दिसम्बर से 3 महीने के लिये लागू रहेगी। इस योजना के तहत आवेदन करने वाले कर्मचारी/ अधिकारी को बाकी सेवानिवृत पर मिलने वाले लाभ के अतिरिक्त शेष बची नोकरी का 50% और अधिकतम 18 महीने का वेतन दिया जाएगा। 

बैंक का मानना है कि इससे उनकी मानव संसाधन की लागत कम होगी। ट्रेनिंग, मोबिलिटी, कौशल विकास के लिये आयु की समानता होगी। जो लोग बैंक में आगे नहीं बढ़ पाए उनके लिए बैंक से बाहर दूसरे विकल्प चुनने में सहायता मिलेगी। बैंक प्रबंधन का यह फेसला भी एकतरफा है यानि उन्होंने बैंक में काम कर रही कर्मचारियों अधिकारियों की यूनियनों से भी इस बारे में कोई चर्चा नहीं की है। 

बैंक प्रबंधन की इस योजना को लागू करने के पीछे कितनी निम्न स्तर की सोच है, यानि आज बैंक प्रबंधन (ह्यूमन कैपिटल) मानव पूंजी की बराबरी मानव संसाधन की लागत से कर रहा है। 55 वर्ष से ज्यादा जिन कर्मचारियों अधिकारियों को इस स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना से बैंक से बाहर का रास्ता दिखाना चाहता है इन्हीं सीनियर बैंक कर्मचारियों अधिकारियों ने अपना पूरा जीवन इस बैंक को देकर आज बैंक को इस ऊंचाई तक पहुँचाया है। अगर बैंक आज यह कहता है कि इनके बाहर होने के कारण ट्रेनिंग, मोबिलिटी, कौशल विकास के लिये आयु की समानता होगी तो इसमें बैंक प्रबंधन की नीति निर्धारण में कमी रही कि समय रहते बैंक नें इनकी योग्यता को बढ़ाने के लिए सही कदम नहीं उठाये।

यदि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना से भी बैंक, कर्मचारियों अधिकारियों की संख्या में कमी नहीं कर पायेगा तो आने वाले समय में दूसरे हथकंडे अपनाकर इन कर्मचारियों अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखलाा देगा । 

इसके बाद नई भर्ती की उम्मीद भी कम होगी। यानि आने वाले दिनों में जो बेरोजगार युवा बैंकों में नौकरी की तलाश कर रहे थे उनको भी निराशा हाथ लगेगी। हमारे जैसे देश में जहां पहले से ही बेरोजगारी हो, इस तरह की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं से, रोजगार के अवसरों को खत्म किया जा रहा है यह ठीक नहीं है। स्टेट बैंक के बाद बाकी बैंक भी जिनमें दूसरे बैंकों का मर्जर हुआ है ऐसी योजना ला सकते हैं।

बैंक यूनियन की सरकार से मांग है कि सीनियर बैंक कर्मचारियों अधिकारियों जिन्होंने अपना पूरा जीवन देकर बैंकों को आज इस ऊंचाई पर पहुँचाया है उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार न किया जाए क्योंकि बहुत बैंक कर्मचारियों अधिकारियों को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी पूरा करना होता है। बैंकों को समय रहते इन सीनियर बैंक कर्मचारियों अधिकारियों की ट्रेनिंग, कौशल विकास के लिये इनकी योग्यता को बढ़ाने के लिए सही कदम उठाने चाहिए।