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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), झारखंड के अतिथिगृह का आनलाइन उद्घाटन
July 6, 2020 • Snigdha Verma • Ministries

प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन का नामकरण डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम पर हुआ

कोविड-19 संकट के दौरान कृषि क्षेत्र प्रमुख ताकत के रूप में उभरा- केंद्रीय मंत्री तोमर

किसानों की दोगुनी आय के लक्ष्य प्राप्ति में सहायक होंगे बजट में घोषित 16 सूत्रीय कार्यबिंदु

किसानों की मेहनत एवं वैज्ञानिकों के योगदान का संगम और भी प्रासंगिक- श्री तोमर

झारखंड सहित पूर्वोत्तर राज्यों में अपार संभावनाएं, सामर्थ्यों का समुचित उपयोग करने पर जोर

नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के, झारखंड में गोरिया कर्मा, बरही, हजारीबाग स्थित नवनिर्मित अतिथिगृह का आनलाइन उद्घाटन सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। साथ ही, श्री तोमर ने इस संस्थान के नए प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन का नामकरण डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि झारखंड की धरा पर बड़े शुभ दिन यह कार्यक्रम हो रहा है। आज डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी की जयंती है, जिन्होंने देश की एकता-अखंडता के लिए जीवन समर्पित कर दिया, एक देश-एक विधान को लेकर अलख जगाई व कश्मीर में बलिदान दिया।डॉ. मुखर्जी के नाम पर करना खुशी की बात है।

कार्यक्रम में श्री तोमर ने कहा कि सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा  में सरकार द्वारा कार्यक्रमों व योजनाओं के रूप में महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की प्राप्ति में, बजट में घोषित सरकार के 16 सूत्रीय कार्यबिंदु एवं नए कानूनी प्रावधान व बदलाव काफी सहायक होंगे। कृषि बाजारों को उदार बनाने, खेती को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, कृषि आधारित गतिविधियों की हैंडहोल्डिंग प्रदान करने, टिकाऊ फसल पद्धति व ज्यादा से ज्यादा नई तकनीक अपनाने की जरूरत हैं। 

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2020-21 के बजट में कृषि गतिविधियों, सिंचाई व ग्रामीण विकास के लिए 2.83 लाख करोड़ रू. आवंटित किए, जो अब तक का सर्वाधिक बजट है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्रीजी ने कई उपाय घोषित किए, जिनमें कृषि क्षेत्र के लिए एक लाख करोड़ रू. का इंफ्रास्ट्रक्चर फंड शामिल हैं। मत्स्य पालन, पशुपालन, हर्बल खेती, मधुमक्खी पालन आदि के लिए भी करोड़ों रू. के पैकेज दिए हैं, जिनके माध्यम से खेती-किसानी से जुड़े सभी वर्गों की तरक्की सुनिश्चित होगी। इन सब उपायों से कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के विकास के साथ-साथ देश का भी समग्र विकास संभव होगा।

श्री तोमर ने कहा कि बढ़ती आबादी के लिहाज से खाद्यान्न आपूर्ति के लिए भविष्य में दूसरी हरित क्रांति की जरूरत होगी। झारखंड सहित पूर्वोत्तर राज्यों में यह क्रांति लाने की अपार संभावनाएं हैं व यहां के सामर्थ्यों का समुचित उपयोग करने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संकट के दौर में कृषि क्षेत्र प्रमुख ताकत के रूप में उभरा है। लाकडाउन घोषित हुआ, तब फसल कटाई के लिए खड़ी थी, ऐसे में प्रधानमंत्री जी ने आवश्यक छूट दी और किसानों ने कड़ी मेहनत की। किसानों ने ग्रीष्मकालीन फसलें भी ज्यादा बुआई की और अब खरीफ सीजन में जुटे हुए है। बेहतर मानसून के अनुमान से फसलें भी अच्छी आने की आशा है।

कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि हमें वैल्यू एडिशन, स्टार्टअप्स, लघु उद्योग आदि की प्रगति पर विशेष ध्यान देना होगा। कृषि क्षेत्र में किसानों की मेहनत व वैज्ञानिकों के योगदान का संगम और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। हमें आत्मनिर्भर भारत की संरचना के लिए हरसंभव प्रयास करने की आवश्यकता है।

श्री तोमर ने कहा कि नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा संस्थान के नाम से प्रसिद्ध है, जो देश का गौरवशाली संस्थान है और खाद्यान्न की आत्मनिर्भरता में इसकी अग्रणी भूमिका रही है, बल्कि अब तो हमारा देश खाद्यान्न के मामले में सरप्लस है। पूसा संस्थान की उपस्थिति के कारण पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में खेती-किसानी का निरंतर विकास हुआ है। इसी के मद्देनजर, प्रधानमंत्री जी की संकल्पना के अनुरूप, पूसा के अलावा और दो कृषि अनुसंधान संस्थान झारखंड व असम में खोले गए हैं। 28 जून 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने झारखंड संस्थान का शिलान्यास किया था। अब उनका सपना साकार हो गया है। नए प्रशासनिक व शैक्षणिक भवन में 4 अध्ययन कक्ष व 4 प्रयोगशालाओं की सुविधा हैं। अतिथिगृह बनाया गया है। महिलाओं व पुरूषों के लिए अलग-अलग छात्रावास बनेंगे, साथ ही कर्मचारियों के आवास का निर्माण भी हो रहा है। शैक्षणिक सत्र अब संस्था में ही होगा।

श्री तोमर ने विश्वास जताया कि यह संस्थान नवीन तकनीकों के सृजन एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा का प्रतिमान बनेगा और इस संस्थान के कार्यों के माध्यम से झारखंड के साथ ही आसपास के राज्यों में खुशहाली एवं विकास के नए आयाम स्थापित हो सकेंगे। झारखंड में अत्याधुनिक सुविधायुक्त संस्थान की स्थापना से पूर्वोत्तर क्षेत्र की आवश्यकताओं का प्रबंधन हो सकेगा एवं कृषि, पशु विज्ञान, मत्स्य, बागवानी व वानिकी सहित अन्य क्षेत्रों में विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला व श्री कैलाश चौधरी, ICAR के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र व सचिव श्री संजय सिंह, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. टी आर. शर्मा, IARI के निदेशक डॉ. ए.के. सिंह, अन्य अधिकारी-कर्मचारी, वैज्ञानिक एवं किसानबंधु वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।