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देश में सभी ई कॉमर्स कंपनियां भयंकर घाटे में -ऐसा ई कॉमर्स क्या देश के लिए जरूरी -कैट
January 24, 2020 • Snigdha Verma

 

*कैट ने  पियूष गोयल से इन सभी कंपनियों की जांच करने की उठाई मांग*

नोएडा
सुशील कुमार जैन संयोजक (दिल्ली एन सी आर )कैट ने कहा कि  कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा ई कॉमर्स कंपनियों की देश के ई कॉमर्स व्यापार में की जा रही धांधलेबाजी के खिलाफ चलाये जा रहे राष्ट्रीय आंदोलन के जरिये देश के छोटे व्यापारियों की चिंताओं को देश के सामने सफलतापूर्वक रखने और केंद्र सरकार द्वारा उसका संज्ञान लेने के बीच कैट ने ने आज केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पियूष गोयल को एक पत्र भेजकर आग्रह किया है की रिटेल में अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट सहित अन्य कंपनियों एवं खाद्य, ट्रांसपोर्ट, ट्रेवल एवं अन्य क्षेत्रों में ई कॉमर्स के माध्यम से काम कर रही सभी कंपनियों में हुए विदेशी निवेश की जांच की जाए की जो निवेश इन कंपनियों में हुआ है उसके द्वारा कहीं लागत से भी कम मूल्य अथवा भारी डिस्काउंट देकर इन क्षेत्रो ने भारत के पारम्परिक व्यापार पर कब्ज़ा जमाने की कोई कोशिश तो नहीं हो रही है ! जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बार बार घरेलू व्यापार एवं लघु उद्योग को मजबूत करने की बात कह रहे हैं ऐसे में देश के ई कॉमर्स व्यापार से भी विसंगतियों और लगातार हो रहे विषाक्त वातावरण को दूर करने की बेहद जरूररत है क्योंकि ई कॉमर्स तेजी से विकसित होता भविष्य का बाजार है !

कैट ने श्री पियूष गोयल से यह भी आग्रह किया है की ई कॉमर्स पालिसी को तुरंत लागू किया जाए तथा ई कॉमर्स के लिए या तो एक रेगुलेटरी अथॉरिटी अथवा ई कॉमर्स लोकपाल का गठन तुरंत किया जाए जिससे ई कॉमर्स बाजार देश में स्वस्थ तरीके से विकसित हो सके ! आगामी 27 जनवरी को कैट ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भारत को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लिए विकसित करने में व्यापारियों की भूमिका पर एक व्यापारी महासम्मेलन आगामी 27 जनवरी को दिल्ली में आयोजित किया है जिसमें केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पियूष गोयल व्यापारियों के साथ सीधा संवाद करेंगे ! दिल्ली सहित लगभग 12 राज्यों के व्यापारी नेता इस सम्मेलन में भाग लेंगे !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने श्री पियूष गोयल को भेजे पत्र में कहा है की देश के ई कॉमर्स व्यापार पर समग्र रूप से विचार करने की आवश्यकता है ! जो भी कंपनियां ई कॉमर्स के माध्यम से व्यापार कर रही हैं अथवा सेवाएं दे रहीं है सब भारी नुक्सान में चल रही है ! यह ई कॉमर्स का स्वस्थ व्यापारिक मॉडल नहीं है ! दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा की वित्तीय वर्ष 2019 के आंकड़ों के मुताबिक  जहाँ अमेज़न का वार्षिक रेवेन्यू 7593 करोड़ रुपये हैं वहीँ वार्षिक घाटा 5685 करोड़ रूपए है और इसी प्रकार फ्लिपकार्ट का वार्षिक रेवेन्यू 4234 करोड़ हैं वहीँ घाटा 1625 करोड़, पेटीएम 968 करोड़ और नुक्सान 1171   करोड़ रुपये, ओएयो 6457 करोड़ और नुक्सान 2385 करोड़, बिग बास्केट 2381 करोड़ और नुक्सान 348 करोड़ ,ग्रोफर्स 84 करोड़ जबकि नुक्सान 448 करोड़ ,जोमाटो 1462 करोड़ और नुक्सान 2087 करोड़ , स्विग्गी 1128 करोड़ और नुक्सान 2363 करोड़, ओला कैब 2543 करोड़ नुक्सान 2593 करोड़, डेल्हीवरी 1695 करोड़ और नुक्सान 1772 करोड़, लेंसकार्ट 474 करोड़ और नुक्सान 28 करोड़, पिपरफ्राई 193 करोड़ तथा नुक्सान 183 करोड़ , रिवीगो 1028 करोड़ तथा घाटा 600 करोड़, मेक माई ट्रिप 3450 करोड़ तथा घाटा 1190 करोड़, फोनपे 184 करोड़ और घाटा 1907 करोड़ , मैडलाइफ रेवेन्यू 363 करोड़ तथा घाटा 403 करोड़ है ! इनके अतिरिक्त अन्य सभी क्षेत्रों में काम कर रही ई कॉमर्स कंपनियों का वार्षिक घाटा उनके वार्षिक रेवेन्यू से कहीं ज्यादा है ! अचरज की बात है की बड़े घाटे के बाद भी यह कंपनियां लगातार व्यापार भी कर रही हैं !

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की यह व्यापार का कौन सा मॉडल है जिसमें नुक्सान के चलते भी व्यापार चल रहा है ! बेहद अजीब बात है की ई कॉमर्स में व्यापार करने वाली सभी कंपनियां घाटे में चल रही हैं और यदि ई कॉमर्स घाटे का व्यापार है तो सरकार को गंभीरता से भारत में ई कॉमर्स व्यापार को बंद करने के बारे में सोचना चाहिए अथवा ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे ई कॉमर्स व्यापार की विकृतियां दूर की जाएँ ! इन सभी ई कॉमर्स कंपनियों द्वारा प्रतिवर्ष घाटे का व्यापार करना इस बात को सिद्ध करता है की इनके बिज़नेस मॉडल में कुछ ऐसा छिपा हुआ है जो इन कंपनियों को घाटे का व्यापार करने के बावजूद भी व्यापार चलाने में मदद प्रदान करता है और दृष्टि से कहीं न कहीं इनके नुक्सान की भरपाई हो रही है , इसलिए इन सभी कंपनियों की जांच बेहद जरूरी है !   

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने स्पष्ट तौर पर कहा की देश के व्यापारी ई कॉमर्स के खिलाफ नहीं है बल्कि कैट द्वारा चलाये जा रहे डिजिटलीकरण अभियान के अंतर्गत अपने आपको ई कॉमर्स से स्वयं जोड़ रहे हैं ! उन्होंने कहा की किन्तु ये भी एक सच्चाई है की विभिन्न ई कॉमर्स कंपनियों ने अपनी फायदे की खातिर नियम एवं कानूनों को ताक पर रख कर बिदेशी निवेश के बल पर सस्ता माल बेचना या सस्ती सेवाएं देने का एक बड़ा षड्यंत्र रचते हुए देश के ई कॉमर्स व्यापार को बेहद विकृत कर दिया है लेकिन अब समय आ गया है जब सरकार को ई कॉमर्स व्यापार के सारे मॉडल पर एक नए सिरे से विचार करना चाहिए और ई कॉमर्स देश में किस तरह से स्वस्थ व्यापार के रूप में विकसित हो सके, ऐसे कदम तुरंत उठाने चाहिए !