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गांधी की मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने की प्रतिबद्धता तथा राष्ट्र-निर्माण में इसके योगदान पर चर्चा
January 8, 2020 • Snigdha Verma

विश्व पुस्तक मेला

“यदि पुस्तक की एक पंक्ति या एक शब्द पाठक के जीवन को बदल सकता है, तो गांधी का जीवन किसी भी काल की महान पुस्तक से कम नहीं है क्योंकि उनके शब्दों और ज्ञान ने  लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया“,यह बात मानव संसाधन विकास, संचार और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के राज्यमंत्री माननीय श्री संजय धोत्रे ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2020 के थीम मंडप में आयोजित पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में कही। भारत की भाषायी विविधता के महान लेखकों व उनकी कृतियों के बीच स्वयं को पाकर उन्होंने असीम आनंद व्यक्त किया। इससे पूर्व एनबीटी के अध्यक्ष प्रो. गोविंद प्रसाद शर्मा ने मेले के हितधारकोें की ओर से माननीय मंत्री जी का स्वागत किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित पी.डी. टंडन की पुस्तक  एवं रोलेंड ई. बुल्जले लिखित व सुरेश राव द्वारा अनूदित ‘गांधी: अहिंसा का सेनानी‘ पुस्तक के साथ तमिल, उड़िया, पंजाबी और मराठी पुस्तकों का लोकार्पण किया। अपने वक्तव्य में माननीय मंत्री जी ने कहा कि गांधी जी सदी के व्यक्तित्व हैं। पुस्तक मेला पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पठन-पाठन की कम होती संस्कृति के मध्य इस मेले की प्रासंगिकता व जरूरत और अधिक बढ़ जाती है।  न्यास के निदेशक ले0 कर्नल युवराज मलिक  ने आगामी पुस्तक मेला इससे बेहतर करने की बात कही। 
थीम मंडप में राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संयुक्त तत्वावधान में पुस्तक लोकार्पण एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम भाग में गांधी की मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने की प्रतिबद्धता तथा राष्ट्र-निर्माण में इसके योगदान पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर  प्रो. अख्तर-उल-वासे, प्रो. रिजवान कैसर, श्री कुर्बान अली तथा परिषद के निदेशक अकील अहमद व कुलपति शाहिद अख्तर मौजूद थे।  
थीम मंडप में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा गांधी दर्शन पर ‘बहुरूप गांधी‘ विषय पर पैनल परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में श्री सुरेश शर्मा, डॉ. राजीव श्रीवास्तव, सुश्री शशीप्रभा तिवारी, श्री राजीव राज तथा डॉ. माला मिश्र उपस्थित थे। अपने व्याख्यान में माला जी ने इस बात को विशिष्ट रूप से रेखांकित किया कि भाषा एवं जीवन के स्तर पर गांधी अपनी समन्वयवादिता, सहजता, सरलता एवं सादगी के कारण न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व भर में स्वीकार्य व प्रेरणा स्रोत हैं। शशीप्रभा तिवारी ने गांधीजी के संघर्ष में कस्तूरबा गांधी की महती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने दिनकर, सुमित्रानंदन पंत, हरिवंश राय बच्चन, नागार्जुन, भवानी प्रसाद मिश्र, सुभद्रा कुमारी चैहान आदि की कविताओं को उद्धृत करते हुए उनमें समाहित गांधी की वैचारिकी का विश्लेषण किया। डॉ. राजीव राज ने कहा कि गांधी संभवतः सार्वकालिक महान पत्रकार हैं, जिन्होंने निडर होकर अपने समय की व्यवस्था की कुरीतियों को उजागर किया। गांधी ने पत्रकारिता को एक मिशन के रूप में देखा जो आज के पत्रकारों में नदारद है। डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने गांधी और सिनेमा पर बात करते हुए बातया 
कि सिनेमा में गांधी की प्रत्यक्ष उपस्थिति तो नहीं है किंतु उनके विचारों की गहरी पैठ अवश्य है। न्यास से संबद्ध भाग्येन्द्र पटेल ने कार्यक्रम का  संचालन किया।
बाल मंडप में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अनुभाग राष्ट्रीय बाल साहित्य केंद्र द्वारा आयोजित ‘डिजिटल कहानीवाचन और पूर्वोत्तर की कहानियाँ‘ कार्यक्रम से हुआ। इसका संचालन भाषाविद् सुश्री उषा छावड़ा और कहानीकार रूमी मलिक द्वारा किया गया।विभिन्न स्कूलों से आए बच्चों को पूर्वोत्तर की कहानियों से परिचय कराया गया। उषा ने बताया कि डिजिटल कहानीवाचन में एक तस्वीर बहुत मायने रखती है और बहुत कुछ कह सकती है। डिजिटल छवियों के माध्यम से बहुत से दृष्टिकोण बनाए जा सकते हैं। बच्चों को पूर्वोत्तर की एक प्रसिद्ध लड़की शेखोम मीराबाई चानू के जीवन पर आधारित सच्ची कहानी भी सुनाई गई। रूमी मलिक की उत्तर-पूर्व की कहानियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बांधे रखा।
बाल मंडप में ‘लाॅ 24ग7‘ संस्था द्वारा ‘बच्चों के अधिकार‘ विषय पर  एक कार्यशाला आयोजित की गई। बच्चों ने संविधान से संबंधित दिलचस्प और ज्ञानवर्धक बातें ध्यान से सुनीं। बच्चों को सलाह दी गई कि वे किसी समस्या में होने पर पुलिस पर हमेशा भरोसा करें। संस्था की निदेशिका और बच्चों के अधिकार कार्यकर्ता कार्तिकेय शुक्ला भी इस अवसर पर उपस्थित थे। निखिल पांडेय ने इस आयोजन का समन्वय किया, जबकि भावना आनंद ने एक पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी।
बाल मंडप में हैप्पी होराइजंस ट्रस्ट द्वारा बच्चों के लिए रचनात्मक लेखन पर एक कार्यशाला  आयोजित की गई । बापू को या बापू पर पत्र लिखने के लिए कहा गया। बच्चों ने लिखा कि महात्मा गांधी ने कैसे स्वच्छ भारत अभियान के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जबकि कुछ ने आज के समय में उनके मूल्यों की प्रासंगिकता पर लिखा। कुछ ने उनके चित्र, पोस्टर  बनाकर उनके प्रति अपने प्यार को व्यक्त किया। एक प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें उन्हें किसी अपने प्रिय को एक पत्र लिखना था, जो उनके मित्र, माता, पिता या कोई प्रियजन हो सकता है। यह कार्यक्रम नव भारत जन सेवा संस्थान द्वारा आयोजित किया गयाजिसका समन्वय संस्थान के सचिव श्री राजकुमार दुबे ने किया।
लेखक मंच पर हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लोकप्रिय साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर सुरेंद्र मोहन पाठक के नए उपन्यास ‘काला नाग‘ का लोकार्पण किया गया। इस उपन्यास का केंद्र पुलिस भ्रष्टाचार है जिसकी कथा व्यक्ति के सामान्य जीवनानुभवों से बुनी गई है।  अपने आपको कृशन चन्दर का शिष्य मानते हुए सुरेंद्र मोहन पाठक ने यह बताया कि उनके पठन-पाठन की कोई विशिष्ट परिधि नहीं है। उर्दू साहित्यकारों को बेजोड़ बताते हुए उन्होंने फैज की कुछ पंक्तियों को गुनगुनाया और उनकी वर्तमान प्रासंगिकता पर बात की। अपने उपन्यास की चर्चा करते हुए उन्होंने प्रकाशकों की भूमिका और लोकप्रिय साहित्य के प्रति गंभीर साहित्य की हिकारत भरी दृष्टि का भी जिक्र किया। गौरतलब है कि सुरेंद्र मोहन पाठक वर्तमान लोकप्रिय साहित्य के विराट व्यक्तित्व हैं जिन्होंने 300 से अधिक उपन्यासों की रचना की है।लेखक मंच पर वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा आयोग की प्रकाशन संबंधी जानकारी हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन के अंतर्गत पाठकों को शब्दावली, परिभाषा कोश, विभागीय शब्दावली आदि के निर्माण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पाठकों को दी गई।‘सीएसटीटी  पब्लिकेशन‘  एप के बारे में बताया गया जिसके अंतर्गत तकनीकी शब्दों का आसानी से अनुवाद प्राप्त किया जा सकता है। धर्मेंद्र कुमार, शिवकुमार चैधरी और दीपक कुमार ने भाषा विज्ञान और कम्प्यूटर विज्ञान को जोड़कर शब्दावली निर्माण की प्रक्रिया को भी समझाया। इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष प्रो. अवनीश कुमार, विशिष्ट अतिथि उमाकांत खुआलकर, मुख्य अतिथि प्रो. योगेंद्र नाथ शर्मा, मुख्य वक्ता के रूप में पी. एन. शुक्ला और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक आदि विद्वान उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अशोक सेवलटकर ने किया।

लेखक मंच पर भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘नई भाषा‘ पर बात के अंतर्गत कपिल इसापुरी के उपन्यास ‘फरिश्ता‘ का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया ने किया। अपने उपन्यास का परिचय देते हुए लेखक ने किताब क्रांति की जरूरत को रेखांकित किया। गोष्ठी में साहित्यिक चोरी, कॉपीराइट संबंधी चिंताएं एवं इस संदर्भ में सरकार व न्यायपालिका की जिम्मेदारी पर भी सार्थक बातचीत हुई। कार्यक्रम का सफल संचालन जामिया के प्रोफेसर रहमान मुसव्विर ने किया।
आॅथर्स काॅर्नर के रिफ्लेक्शंस हाॅल संख्या-8 में एनबीटी तथा  भारतीय शिक्षा मंडल के संयुक्त तत्वावधान में ‘एसेंशियल विवेकानंद‘ पुस्तक पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं और विचार अमर हैं। इस अवसर पर अन्य वक्ताओं में पुस्तक के लेखक श्री मुकुल कानिटकर और श्री अनूप ए.जे., सच्चिदानंद जोशी और संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष श्री शेखर सेन व एनबीटी अध्यक्ष, प्रो.गोविंद प्रसाद शर्माभी उपस्थित थे। 
आॅथर्स काॅर्नर में ‘हमारे देश के अनकहे इतिहास और हमारे पूर्वजों ने आक्रमणकारियों के खिलाफ कैसे बचाव किया‘ पुस्तक पर एक परिचर्चा आयोजित की गई। श्री अंकुर पाठक, श्री संक्रांत सानू और सुश्री मनोशी सिन्हा रावल इस अवसर पर वक्ता थे। । कार्यक्रम का आयोजन गरुड़ प्रकाशन ने किया।