ALL Crime Ministries Science Entertainment Social Political Health Environment Sport Financial
''हमारे संविधान में समावेशी समाज के निर्माण का आदर्श सन्निहित है'' :  राष्ट्रपति
November 27, 2019 • Snigdha Verma

'हमने सदैव जनता को गणराज्य के केंद्र में रखा है': उपराष्ट्रपति

'संविधान में भारतीयों की गरिमा और भारत की एकता को विशेष रूप से महत्व दिया गया है': प्रधानमंत्री

'देश की अधिकांश समस्याओं का समाधान मौलिक कर्तव्यों के पालन से हो सकता है': लोक सभा अध्यक्ष

 

नई दिल्ली, 26 नवम्बर, 2019: आज संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में संविधान को अंगीकृत किए जाने की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित संविधान दिवस  के अवसर पर विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमारे संविधान में समावेशी समाज के निर्माण का आदर्श सन्निहित है

 

          और इसमें संवैधानिक संशोधनों के द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की व्यवस्था की गई है । श्री कोविंद ने यह भी कहा कि हमारे देश में सभी तरह की स्थितियों के समाधान के लिए संवैधानिक उपाय उपलब्ध हैं और हमें पहले इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या हमारे कार्य संविधान की सीमाओं, गरिमा और नैतिकता के अनुरूप हैं ?

 

          इस बात का स्मरण करते हुए कि संविधान सभा ने संविधान में भिन्न-भिन्न विचारों और विचारधाराओं में संतुलन बनाने का असाधारण कार्य किया था, श्री कोविंद ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं की बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता से एक ऐसा जीवंत दस्तावेज तैयार हुआ है जिसमें न केवल हमारे आदर्शों और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित किया गया है बल्कि सभी भारतीयों के भविष्य को भी सुरक्षित किया गया  है ।  

 

          श्री कोविंद ने संसद सदस्यों को यह भी याद दिलाया कि वे भारत के संविधान में अटूट आस्था और निष्ठा की शपथ को हमेशा ध्यान में रखें और भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखें ।

 

          इस बात का उल्लेख करते हुए कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, श्री कोविंद ने कहा कि यह आवश्यक है कि हम अपना कर्तव्य करें और ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न करें जिससे अधिकारों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित हो सके । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मानवता की भावना विकसित करना भी देशवासियों का मौलिक कर्तव्य है जिसमें सभी के प्रति करूणा और सेवा की भावना स्वतः शामिल है ।

 

          उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के सभापति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि हमने सदैव जनता को गणराज्य के केंद्र में रखा है और हमारा देश न केवल सबसे बड़ा लोकतंत्र है बल्कि यह एक ऐसा देश भी है जो जीवंत और बहुलवादी संस्कृति का ज्वलंत उदाहरण है जहां संसदीय प्रणाली फलफूल रही है और संविधान के दायरे के भीतर स्वतंत्र समाज के अधिकारों का संरक्षण किया जा रहा है । हमने न केवल मौलिक अधिकारों पर ही ध्यान दिया है और उत्तरोत्तर संविधान की उद्देशिका के अनुरूप एक समावेशी और विकसित भारत के निर्माण के लिए अपनी नीतियां और कार्यक्रम तैयार कर रहे हैं बल्कि हम शासन व्यवस्था में परिवर्तन भी ला रहे हैं । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मौलिक कर्तव्यों पर अधिक बल दिए जाने की जरूरत है । उन्होंने कहा कि यदि हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन राष्ट्रीय उद्देश्यों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता की भावना के साथ करते हैं तो देश का विकास तीव्र गति से होगा और हमारे देश में लोकतंत्र और अधिक परिपक्व होगा ।

 

          इस बात का स्मरण करते हुए कि 70 वर्ष पहले इस ऐतिहासिक दिन भारत ने अपने संविधान को अंगीकार किया था, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यदि डॉ. बी.आर. अंबेडकर आज जीवित होते तो वह भारत को एक सफल लोकतंत्र के रूप में फलता-फूलता देखकर बहुत प्रसन्न होते । संविधान को सबसे पवित्र ग्रंथ का दर्जा देते हुए जिसने देश के विकास के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है, श्री मोदी ने कहा कि संविधान में भारतीयों की गरिमा और भारत की एकता को विशेष रूप से महत्व दिया गया है । यह टिप्पणी करते हुए कि संविधान से समाज के एक बड़े भाग को समानता प्राप्त करने में मदद मिली है, श्री मोदी ने कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है और एक ऐसा मजबूत आधार सिद्ध हुआ है जिससे हमारा विविधतापूर्ण देश एक भारत श्रेष्ठ भारत के रूप में विकसित हुआ है ।

 

          यह विचार व्यक्त करते हुए कि देश महात्मा गांधी की 150वीं जन्म शताब्दी मना रहा है, श्री मोदी ने कहा कि गांधीजी इस बात को भली-भांति समझते थे कि अधिकारों और कर्तव्यों के बीच एक अटूट रिश्ता और संतुलन होता है । श्री मोदी ने देशवासियों को न केवल अपने अधिकारों बल्कि अपने कर्तव्यों के बारे में भी अधिक जागरूक बनने का आग्रह किया और कहा कि उन्हें हमेशा सोचना चाहिए कि संविधान में उल्लिखित कर्तव्यों का निर्वहन करके वे देश को कैसे और सशक्त बना सकते हैं । श्री मोदी ने संसद सदस्यों को देशवासियों के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों पर ध्यान देने का आग्रह भी किया ।

 

          इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने कहा कि संविधान ने विकास पथ पर देश की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती अंतर्राष्ट्रीय   परिस्थितियों  में नई प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न स्थितियों में हमारा संविधान हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा ।  इसके लिए संविधान को एक नए दृष्टिकोण से देखने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम इसी भावना से संविधान दिवस को कर्तव्य पर्व के रूप में मनाएं और एक नई शुरुआत करें ।

 

अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन की आवश्यकता के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि एक ओर संविधान ने मौलिक अधिकारों के रूप में हमें पर्याप्त आजादी और शक्तियां दी हैं, वहीं दूसरी ओर संतुलन बनाते हुए मौलिक कर्तव्यों का निर्देश करके हमें अनुशासित भी किया है । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अनुशासन मौलिक अधिकारों द्वारा दी गई आजादी और शक्तियों के प्रयोग की एक जरूरी शर्त है । उन्होंने यह भी कहा कि देश की अधिकांश समस्याओं का समाधान मौलिक कर्तव्यों के पालन से हो सकता है । उन्होंने यह भी कहा कि कर्तव्यों से विमुख होकर सिर्फ अधिकारों की बात करने से एक प्रकार का असंतुलन पैदा होता है । इस असंतुलन के कारण देश के विकास में बाधाएं आती हैं और विकास की गति धीमी हो जाती है ।

 

          इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री, श्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय कक्ष में विशिष्ट जनों का स्वागत किया । उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकार, राज्य की नीति के निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य संविधान का आधार हैं और संविधान का उद्देश्य देश का समग्र विकास है ।

 

इस अवसर पर राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रीय युवा संसद योजना पोर्टल का शुभारंभ किया । श्री कोविंद ने 'भारतीय संसदीय लोकतंत्र में राज्य सभा की भूमिका' नामक प्रकाशन के विमोचन के साथ राज्य सभा के 250वें सत्र के उपलक्ष्य में सिक्के, डाक टिकट और फर्स्ट डे कवर भी जारी किया ।

बाद में, राष्ट्रपति ने ' भारत का संविधान@70-देश की सर्वोच्च विधि की रचना का उत्सव' विषय पर लोक सभा के वर्ष 2020 के कैलेंडर का लोकार्पण किया तथा संसदीय ज्ञानपीठ में आयोजित की जा रही संविधान निर्माण विषयक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया ।