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इटावा में भाई, भाभी समेत कुनबे के 6 लोगों के हत्यारे को फांसी की सजा
May 21, 2020 • सुबोध कुमार • Crime
 18 बीघे जमीन के विवाद में की गई थी परिवार की हत्या
 
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा में एक ही कुनबे के 6 लोगों की हत्या के मामले में दोषी को अदालत ने घटना के 08 साल की सुनवाई के बाद गुरुवार को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 5 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। 
 
जिला शासकीय अधिवक्ता शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र डा. विजय कुमार ने इटावा के पिलखर के बहुचर्चित हत्याकांड के मुख्य हत्यारोपी राम प्रताप उर्फ टिल्लू को फांसी की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि साल 2012 को 28 मई को हुई 6 लोगों की हत्या के मामले की लंबी पक्ष और विपक्ष की बहस के बाद यह सजा सुनाई गई है। रामप्रताप के साले दिलीप यादव के मामले को लेकर अदालत ने अभी कोई निर्णय नहीं सुनाया है। 
 
आठ साल पहले शहर किनारे पिलखर में मां-पिता के साथ चार मासूम बच्चों की हत्याकांड ने जिले ही नहीं, प्रदेश में लोगों के दिल दहला दिए थे। प्रदेश में तत्कालीन सपा सरकार के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने गांव आकर मामले की तेजी से जांच कराने तथा आरोपितों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। सुरेश के साले भरथना बंधारा निवासी होम सिंह ने सुरेश के भाई रामप्रताप उर्फ टिल्लू पुत्र रामसनेही, वरुणराज पुत्र राजवीर व एक दिलीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। भूमि विवाद में परिवार की सामूहिक हत्या का आरोप लगाया था। शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलों की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश ने 21 मार्च को निर्णय सुरक्षित कर लिया था।
 
लॉकडाउन के चलते न्यायालय 7 मई तक बंद रहने से सुनवाई रुकी रही। इसके बाद वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में कार्य शुरू हुआ तो दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात अदालत ने वरुणराज को दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों को प्रस्तुत करके कड़ी सजा की अपील की। अदालत ने मुख्य अभियुक्त रामप्रताप टिल्लू को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है और पांच लाख रुपये अर्थ दंड देने का आदेश दिया है। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि दिलीप का आरोप-पत्र बाद में दाखिल होने से मामला विचाराधीन है।
 
इकदिल थाना क्षेत्र के अन्तर्गत पिलखर गांव 50 वर्षीय सुरेश यादव, 45 वर्षीय पत्नी विमला देवी, 22 वर्षीय पुत्र अवनीश, तीन पुत्रियों में 18 वर्षीय रश्मि,15 वर्षीय श्वेता और 12 वर्षीय सुरभि की निर्ममतापूर्वक धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सुरेश के छोटे भाई रामप्रताप, उसके साले दिलीय यादव के अलावा वरुण राज को नामजद किया गया था। पुलिस ने इस मामले में सभी को जेल भेज दिया था। इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे कानपुर हाइवे पर सुरेश यादव की करोड़ों की 18 बीघा जमीन को हथियाने का इरादा छोटे भाई रामप्रताप का था। रामप्रताप ने अपने साले दिलीप के अलावा साथी वरुण राज के साथ मिलकर इस सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया था। सुरेश यादव को छोटा भाई रामप्रसाद उर्फ पिंटू वारदात के बाद से फरार तो था ही, उसका मोबाइल फोन भी बंद था। इसलिए शक उसी पर जताया जाने लगा था।
 
सोमवार की सुबह करीब सात बजे इस सामूहिक हत्याकांड का पता तब चला, जब गांव का एक बालक नीरज बकरियां चराने जा रहा था। सुरेश यादव के घर के सामने से गुजरते समय उसने खून बिखरा देख गांव वालों को बताया। इस पर जब कुछ लोग पहुंचे तो यह देखकर दंग रह गये कि परिवार के सभी छह सदस्यों की गर्दनें उनकी ही चारपाईयों पर कटी हुईं थीं। इटावा के इतिहास में अभी तक एक साथ साल 2006 में छोटा राजन गैंग के 6 सदस्यों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।