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काहे रे नदिया तू उफनायी
August 21, 2020 • डॉ दिनेश प्रसाद मिश्र • Environment

 

 

प्रयागराज 

कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया अभी उससे संघर्ष ही कर रही थी कि प्रलयंकारी बाढ़ ने पूरे विश्व में हाहाकार मचा दिया है । देश दुनिया की लगभग समस्त प्रमुख नदियों में बाढ़ आई हुई है ,प्राकृतिक आपदाएं तूफान का रूप ग्रहण कर भयंकर बरसात के रूप में उपस्थित हो रही हैं। परिणाम स्वरूप भयंकर बारिश से धरती जलमग्न हो रही है। अचानक वर्षा की अगाध राशि आ जाने से नदियों का जलस्तर सीमा से अधिक बढ़ जाने के कारण वह तटबंधों को तोड़ता हुआ समीपस्थ भूभाग को जलमग्न कर जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रहा है, छोटी बड़ी समस्त नदियां अपने आप में जल की अगाध राशि समेटकर विकराल रूप धारण करती हुई सब कुछ अपने में मिला लेने के लिए, आत्मसात करने के लिए उफनायी हुई हैं। चारों ओर बाढ़ ही बाढ़ है। दुनिया के दो दर्जन से अधिक देश प्रलयंकारी बाढ़ से प्रभावित तथा संत्रस्त हैं। चीन, जापान, ग्रीस ,दक्षिणी कोरिया, स्पेन, भारत, पाकिस्तान, नेपाल, अमेरिका ,यूनाइटेड किंगडम और मैक्सिको आदि देशों में नदियों का कहर जारी है। जापान में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ ने यहां के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है ।अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित लाखों लोगों को अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए आदेश जारी कर दिया है। बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सेना के 10000 जवानों को राहत और बचाव कार्य के लिए तैनात किया है। जापान सरकार के मौसम विभाग के अनुसार जापान में कभी भी ऐसी भीषण बारिश और बाढ़ नहीं देखी गयी है। जापानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार क्यूशू द्वीप पर भारी बारिश से आई बाढ़ से कुमामोटो और कगोशिमा प्रांत के लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। कुमामोटो के कई गांवों में लोग सड़कों के बाढ़ में बह जाने के कारण फंसे हुए हैं। पुलिस फायर ब्रिगेड और सेना के जवान फंसे हुए लोगों को बचाने के प्रयास में दिन-रात कार्य कर रहे है। कूमा नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ता ही जा रहा है। नदी से लगने वाले इलाके का बड़ा हिस्सा बाढ़ मे डूबा हुआ है। बाढ़ के पानी और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में बाधा आ रही है। रक्षा बल, तटरक्षक और दमकल विभाग के 40000 से अधिक जवान बचाव कार्य में लगे हुए हैं, किंतु निरंतर हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति निरंतर गंभीर होती जा रही है। स्पेन में भारी बारिश से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है ।बर्सिलोना मेड्रिड और स्कॉटलैंड में लगातार बारिश तथा उससे बढ़ रहे नदियों के जलस्तर से सड़कों पर भी पानी भर गया है।स्पेन का स्प्रेगा शहर तबाह हो चुका है। चीन शताब्दी की सबसे बड़ी बाढ़ की मार झेल रहा है। चीन के दक्षिणी भाग में करोड़ों लोग भयंकर बाढ़ का सामना कर रहे हैं। लगातार मूसलाधार बारिश से पिछले 8 दशक से बाढ़ एवं वर्षा के रिकॉर्ड टूट चुके हैं सबसे बड़ा जल प्रलय आया हुआ है। यांगत्सी नदी अपने विकराल रूप में वह कर तबाही मचाए हुए है। चीन के 10 राज्यों गुइजहाऊ,चोंगकिंग,हुनान,हुबेई,जियांगशी ,अनहूई, 

झिजिंयांग , शंघाई,ंगुआंगशी और फुंजियांग प्रांत में भयंकर बाढ़ आई हुई है। चीन के राष्ट्रीय मौसम उपग्रह केंद्र के अनुसार देश की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील पोयांग में कई बांध टूट गए हैं, जिससे झील रिकॉर्ड जल स्तर तक पहुंच गई है। 33से अधिक नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है ।इस साल जून माह से ही चीन में बरसात हो रही है जो अभी भी जारी है ,अधिक बरसात की वजह से चीन की सबसे लंबी नदी यांगसी में भयंकर बाढ़ आई हुई है चीन में वर्षा एवं बाढ का रिकॉर्ड सन् 1961 से रखा जा रहा है। चीन के इतिहास में विद्यमान रिकॉर्ड के अनुसार अब तक ऐसी बाढ़ कभी भी नहीं आई। चीन में अब तक 140 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग लापता हैं ,इनके अलावा इस भीषण आपदा में अब तक करीब 3.8 करोड़ लोग बुरी तरह से प्रभावित हैं ।इस बाढ़ से 28 हजार से अधिक इमारतें नष्ट हो चुकी हैं तथा लगभग 11.7 अरब डालर का नुकसान हुआ है। पाकिस्तान में भी भयंकर बाढ़ आई हुई है, जिसमें से कम से कम 58 लोगों की जान चली गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बारिश के कारण आई बाढ़ से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। एनडीएमए ने बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ से पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा होने का उल्लेख किया है। सेना कई क्षेत्रों में लोगों को बचाने और उन्हें भोजन तथा चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने का काम कर रही है। अमेरिका के कई प्रांत बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। मेड्रिड और यूके के स्कॉटलैंड सहित अनेक राज्य बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। इस वर्ष आई बाढ़ ने छोटे -बड़े ,शक्तिशाली या कमजोर राष्ट्रों में कोई भेद न कर समस्त विश्व को अपने आगोश में ले लिया है। बाढ़ का पानी नदियों के तटवर्ती इलाकों को तोड़कर तटबंधों की सीमा लांघते हुए शहरों में जा घुसा है। शहरों के दो दो मंजिल मकान पानी में डूब गए हैं। सड़कों में दस दस फुट तक पानी भर गया है और सड़कें समुद्र का रूप धारण कर चुकी हैं ।पानी में जहां पहले नावें चलती थी ,अब नाव के स्थान पर बहती हुई कारें एवं अन्य गाड़ियां दिखाई पड़ रही है। सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है अमेरिका से लेकर नेपाल तक हर छोटा से बड़ा देश त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहा है , किंतु बचाने वाला कोई नहीं है ,बस ईश्वर से यही प्रार्थना की जा रही है कि ईश्वर बारिश और तूफान से बचाए जिससे जल्दी ही बाढ़ का पानी शहरों की सीमाएं छोड़कर नदियों तक सीमित हो जाय और किसी प्रकार से जनजीवन सुव्यवस्थित हो।

 

‌समस्त विश्व की ही भांति भारत भी बाढ़ एवं बारिश के प्रकोप से अछूता नहीं है, वह भी बाढ़ की विभीषिका को झेल रहा है ।भारत के बिहार आसाम मेघालय केरल महाराष्ट्र ,उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड , पश्चिमी बंगाल उड़ीसा, केरलआदि राज्य बाढ़ की चपेट में है ।समस्त नदियों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई हैं तथा वहअपने तटवर्ती क्षेत्रों को पूरी तरह जलमग्न कर क्षेत्र में आतंक फैलाए हुए हैं। बिहार तथा आसान की स्थिति सबसे भयंकर बनी हुई है। यहां बाढ़ में लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। अब तक आसाम में ही 100 से अधिक लोग काल के गाल में समा गए हैं। बिहार में भी अनेक लोगों के वाढ़ में डूब कर अपनी जान गंवा देने के समाचार मिल रहे हैं। बिहार के दरभंगा जिले में बाढ़ से प्रभावित होकर लगभग 900000 लोगों को अपना घर बार छोड़ना पड़ा है ।उत्तरी बिहार के 11 जिलों के निचले इलाके पूरी तरह जलग्रस्त हैं। बिहार में बाढ़ से अब तक 16 जिलों में 7400000 से अधिक आबादी प्रभावित हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सीतामढ़ी शिवहर सुपौल किशनगंज दरभंगा मुजफ्फरपुर गोपालगंज और पूर्वी चंपारण में बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। इनके अतिरिक्त पश्चिम चंपारण खगड़िया सारण समस्तीपुर सिवान मधुबनी मधुपुरा एवं एवं सहरसा जिलों में भी बाढ़ नेअपना आतंक फैलाया हुआ है। इन जिलों के 128 प्रखंडों की 1232 पंचायतों में 7400000 से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। भारत में बिहार के दरभंगा शहर की स्थिति ही बदल कर रख दी है ,दरभंगा नगर निगम क्षेत्र में कई क्षेत्रों में नाव चलती हुई देखी जा सकती है। शहर में नाव शहरवासियों का सहारा बनी हुई है। शहर में कार एवं बाइकों की जगह नाव चल रही है। नगर निगम के करीब 1 दर्जन से अधिक वार्डो में बाढ़ का पानी फैला हुआ है ।बाढ़ के पानी से दरभंगा शहर के वार्डो मेंमें सड़क पर कमर भर से ज्यादा पानी भरा है। घर द्वार गली मोहल्ले सब बाढ़ के पानी में डूबे हैं ।लोगों का आवागमन नाव के माध्यम से ही हो रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुसार हाल के वर्षों में बाढ़ प्रबंधन के काम में नेपाल सरकार द्वारा पूरा सहयोग नहीं किया जा रहा है , जिससे बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है ।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह बयान अपने प्रबंधन एवं आपदा निवारण तंत्र की कमजोरी एवं असफलता को नकार कर पूर्व की भांति बिहार में आई हुई बाढ़ को नेपाल की देन माना जा रहा है और यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि , बिहार में आई बाढ़ नेपाल की नदियों से आए हुए पानी का परिणाम है, किंतु यह कोई नई बात नहीं है, सदियों से प्रतिवर्ष वर्षा ऋतु में बिहार को अपार बाढ़ का सामना करना पड़ता है और लगातार उसे नेपाल की नदियों से छोड़े गए पानी का ही परिणाम बताया जा रहा है। उससे निपटने के लिए न तो कभी कोई प्रयास किया गया और न ही कोई बचाव का रास्ता खोजा गया। परिणाम वही के ढाक के तीन पात, जिससे बिहार को हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका को झेलना पड़ता है और जन धन की अपार क्षति को भी उठाना पड़ता है। जब तक बाढ़ रहती है और वर्षा होती रहती है उसकी चर्चा चलती रहती है, बाढ़ समाप्त होते ही उसकी ओर से ध्यान हट जाता है। स्थाई निदान का न तो कभी कोई प्रयास किया जाता है और ना ही उस दिशा में कोई कदम बढ़ाया जाता है, वरन बाढ़ समाप्त होते ही उसे भूल कर अगले वर्ष आने वाली बाढ़ की प्रतीक्षा की जाती है और यह प्रक्रिया निरंतर वर्ष प्रतिवर्ष जारी है, बिहार बाढ़ को झेलने के लिए मजबूर है।

‌ असम की स्थिति अत्यंत भयावह है वहां लगभग 7000000 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं तथा सो से अधिक लोगों की बाढ़ से मृत्यु हो चुकी है ।लोगों के घर नष्ट हो गए हैं । चारों ओर पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। ब्रह्मपुत्र सहित अधिकांश नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं । बराक नदी का जलस्तर भी निरंतर बढ़ रहा है तथा अपने तटवर्ती क्षेत्रों को नेस्तनाबूद कर रहा है।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बाढ़ की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ से 24 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं तथा राज्य की लगभग पूरी फसल नष्ट हो चुकी है ।बाढ़ का तांडव निरंतर जारी है सरकारी स्तर पर बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है।

‌असम के 24 जिलों में चारों तरफ पानी ही पानी है कुदरती त्रासदी के शिकार लोगों और शासन व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती निरंतर हो रही बारिश और नदियों का बढ़ता हुआ जलस्तर बना हुआ जिसे देखते हुए बाढ़ झेल रहे क्षेत्रों में त्रासदी केऔर भयंकर होने की आशंका बनी हुई है।

उत्तर भारत में जम्मू कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश झारखंड राजस्थान हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल उड़ीसा गुजरात केरल एवं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सभी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है ।सर्वत्र त्राहिमामृ त्राहिमामृ मचा हुआ है। दिल्ली की सड़कों में पांच पांच फीट से अधिक पानी भर गया। मिंटो फुल अंडरपास में भरे पानी तथा सड़कों पर आई बाढ़ से आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। पानी की अधिकता से वसों तक के चक्के जाम हो गए।एक टेंपो चालक की पानी में डूब कर मिंटोपुल के पास दर्दनाक मृत्यु ही हो गई, देश में राजधानी दिल्ली की यह स्थिति है तो पूरे देश की कल्पना की जा सकती है। उत्तर प्रदेश में 16 जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है जहां का जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है ।उत्तराखंड में देहरादून, उत्तर प्रदेश में कानपुर गुजरात में राजकोट तथा महाराष्ट्र में मुंबई आदि शहर पानी से लबालब भर गए ।शहरी जीवन अस्तव्यस्त हो गया। सड़कों में फर्राटे भरने वाली बाइक एवं कारें नाव की तरह सड़कों पर तैरने के लिए विवश हुई और आदमी दो मंजिलें मकानों की छतों पर जाकर आश्रय लेने के लिए मजबूर हुआ, यह तो बानगी मात्र है, पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। बाढ़ ने शहरी तथा ग्रामीण समग्र जीवन को अस्तव्यस्त कर दिया है।

यह पहली बार नहीं हुआऔर नहीं अंतिम बार है। यह स्थिति पहले भी बनती रही है और आगे भी होती रहेगी बाढ़ पहले भी आई है और आगे भी आती रहेगी। वस्तुतःबाढ़ एवं बारिश की यह स्थिति हर साल उत्पन्न होती है तथा देश एवं जनमानस को उसका निरंतर सामना करना पड़ता है बरसात के दिनों में भयंकर बारिश से पूरा देश तबाही झेलने को मजबूर होता है ।देश के विभिन्न इलाकों में जनजीवन अस्त व्यस्त होने जान माल के भारी नुकसान की सूचनाएं प्राप्त होती है। असम बिहार उत्तर प्रदेश राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र केरल चारों ओर बाढ़ से हाहाकार के समाचार प्राप्त होते हैं। बाढ़ एवं बारिश से नदियों के तटवर्ती इलाके ही नहीं शहरों जिलों के मुख्यालय भी अस्तव्यस्त हो जाते हैं ।मुंबई दिल्ली जैसे शहर बाढ़ के दिनों में समुद्र का रूप धारण कर लेते हैं मुंबई का निचला इलाका पूरी तरह जलमग्न हो जाता है।

देश की राजधानी दिल्ली बारिश के प्रकोप से त्राहि-त्राहि करने लगती हैऔर दिल्ली मुंबई पटना दिल्ली जैसे शहरों में लगभग हर साल बाढ़ से भारी तबाही मचती है करोड़ों रुपए का नुकसान होता है। हर साल इसके कारणों की समीक्षा भी की जाती है किंतु वर्षा का मौसम समाप्त होने तथा बाढ़ उतर जाने के बाद फिर सब लोग सब कुछ भूल जाते हैं , पुन:अगले साल बाढ़ की विभीषिका झेलने के लिए। उसके समाधान के लिए न तो कोई सार्थक प्रयास होता है , और न ही किये गये प्रयास का कोई सार्थक परिणाम ही धरातल पर प्राप्त होता है। आज आवश्यकता है एक सुव्यवस्थित कार्य योजना की, जो प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ के कारणों का अध्ययन कर उनके निवारण हेतु सार्थक प्रयास करें जिससे इस समस्या का निदान प्राप्त हो सके किंतु व्यवहार में कभी भी ऐसा नहीं होता ।कुछ समय के लिए भले हाय तोबा मचा लिया जाए किंतु बाढ़ के समाप्त होते ही मान लिया जाता है कि समस्या का समाधान हो गया और सब कुछ शांत हो जाता है। बाढ़ शांत तो उसके निदान हेतु किए जाने वाले प्रयास भी शांत । फलस्वरूप पुनः बाढ़ का आगमन और उसके भयंकर परिणाम पुनः सामने। यह क्रम निरंतर चल रहा है और चलता ही रहेगा क्योंकि बाढ़ से निजात पाने हेतु न तो इच्छा शक्ति है और न ही उसके कारणों को खोज कर उन्हें समाप्त करने की दिशा में कोई प्रयास। यदि प्रयास कर नदियों के प्रवाह तंत्र को व्यवस्थित कर दिया जाए उससे अतिक्रमण को समाप्त कर तथा नदियों के पेट में जमा गाद को समय-समय पर निकालकर जल प्रवाह की गति को अविरल बना दिया जाए तो तो बारिश से होने वाली जल वृद्धि नदी की अप्रतिहत एवं अविरल गति होने से इकट्ठा जल तीव्र गति से चलकर अपने गंतव्य तक पहुंचने में सफल होगा और नदियों के उफनाने की गति में भी विराम लगेगा।