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केवल ध्यान के माध्यम से हल किया जा सकता है समस्याओं को
January 11, 2020 • Snigdha Verma

 नई दिल्ली विष्व पुस्तक मेला 

 

डॉ.एम. विलियम भास्करन ने कहा कि महात्मा गांधी न केवल एक नेता थे बल्कि एक विचारक और सुधारक भी थे। गांधी द्वारा उपयोग किए जाने वाले विभिन्न तरीकों के बारे में बात करते हुए डॉ. टी. रविचंदन ने कहा कि गांधी ने अपने पद-यात्राओं और उपवास के माध्यम से लोगों को एकजुट किया और उनके बीच सद्भाव बनाने की कोशिश की।  इस अवसर पर अन्य वक्ताओं में डॉ. एम. विलियम भास्करन और डॉ. एम. वल्लियामल शामिल थे। वक्ताओं ने महात्मा गांधी के शांति और सद्भाव बनाने के प्रयासों पर अपने विचार साझा किए। प्रो. राधाकृष्णन ने गांधीजी के मानवता के अस्तित्व के लिए सभी धर्मों का सम्मान करने के दर्शन के बारे में बात की। परिचर्चा का संचालन प्रो. एन. राधाकृष्णन ने किया।
सेमिनार हाॅलः-

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा सेमिनार हॉल में  ‘गांधी का स्वच्छता पर संदेश‘ पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने स्वच्छता के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करने में महात्मा गांधी की भूमिका के बारे में विस्तार से बात की। इस अवसर पर श्री विश्वनाथ पांडे ने कहा कि महात्मा गांधी अपने अहिंसक विरोध और अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन के लिए जाने जाते हैं लेकिन देश में स्वच्छता के लिए शायद ही उन्हें कभी याद किया जाता हो। स्वच्छता के बारे में गांधी के विचारों के बारे में डॉ. नीरज भारद्वाज ने कहा कि महात्मा गांधी ने न केवल परिवेश की स्वच्छता की वकालत की बल्कि आत्मा की शुद्धता के बारे में भी बात की। इस अवसर पर अन्य विमर्शकारों में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के अध्यक्ष डॉ.रामशरण गौड,़ वरिष्ठ पुस्तकालय सूचना अधिकारी डॉ. बबीता गौड़ व श्री सीता राम गुप्ता शामिल थे।
‘सावन किरपाल रूहानी मिशन द्वारा ‘बी हैप्पी एंड एम्पावर्ड थ्रू मेडिटेशन‘ पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का संचालन शीना और नितिन डेमला ने किया। इस संवादात्मक सत्र में वक्ताओं का विचार था कि हमारे जीवन में आने वाली समस्याओं को केवल ध्यान के माध्यम से हल किया जा सकता है।
बाल मंडपः-
बाल मंडप में ‘जागो टीन्स‘ संस्था  द्वारा एक गतिविधि आधारित सत्र का आयोजन किया गया था। सत्र के दौरान प्रोजेक्टर पर एक लड़की, एक पेड़ और  बादलों की गरज की छवि जैसी कई छवियां प्रदर्शित की गईं और फिर बच्चों को इन चित्रों पर कहानियां लिखने के लिए कहा गया। कार्यक्रम में गैर सरकारी संगठन, बटरफ्लाई और सूरजभान डीएवी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भाग लिया।एक अन्य सत्र में, जयशंकर मेमोरियल सेंटर के बच्चों ने महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित तीन नाटकों का प्रदर्शन किया। बाद मेंनेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्वारा एक कहानी सत्र का आयोजन किया गया जहाँ सुप्रसिद्ध कथाकारों सुषमा यदुवंशी, आशा शर्मा और शिव मोहन यादव ने बच्चों को कहानियां सुनाईं।
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‘चिल्ड्रन्स लिटरेचर गोज डिजिटल‘ पर एक पैनल चर्चा ‘वल्र्डरीडर‘ द्वारा आयोजित की गई।  सत्र की शुरुआत विनीता पांडे द्वारा कहानी कहने के साथ हुई। वक्ताओं ने इस बारे में चर्चा की कि कैसे पुस्तकों को डिजिटल रूप से विकसित किया जा रहा है और विभिन्न एप्स पर ई-बुक्स उपलब्ध हैं। डिजिटल रूप से उपलब्ध होने वाली पुस्तकों के साथ अब उन्हें कहीं भी और कभी भी बच्चे तक पहुँचना बहुत आसान है। इस अवसर पर वक्ताओं में श्री हिमांशु गिरि, भानु पोटका, गणेश सुब्रमणियन, निखिल सराफ  और विनीता पांडे आदि थे।
आॅथर्स काॅर्नरः-
एस.ए.ए.आर.एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ‘पेडगोजी आॅफ सिंथेटिक फोनिक्स‘ पुस्तक पर एक चर्चा का आयोजन किया गया। पुस्तक के लेखक  अभिषेक गोयल ने अंग्रेजी भाषा पर दर्शकों के साथ बातचीत की। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी भाषा में लिखने और उच्चारण के कुछ नियम हैं। उनके अनुसार भारत में बच्चे व उनके शिक्षक अधिकांशतया गलत उच्चारण करते हैं।  बाद में उन्होंने उन तरीकों के बारे में बात की जिनके माध्यम से आसानी से भाषा सीखी जा सकती है।
 ‘नए लेखकों के लिए भारत में प्रकाशन का भविष्य‘ पर एक परिचर्चा ‘बेस्टबुकबुडीज‘़ द्वाराआयोजित की गई। आगंतुकों के साथ बातचीत करते हुए सुधीर गंडोत्रा ने कहा कि स्थापित लेखकों को उन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है जो नए और युवा लेखकों को करना पड़ता है। वक्ताओं ने युवा लेखकों को मंच प्रदान करने, उनके साथ संवाद करने, अपनी पुस्तकों को प्रकाशित करने और पाठकों के साथ जुड़ने में मदद करने की आवश्यकता के बारे में भी चर्चा की। सुश्री अंजना रंजन और राहुल शिवाय ने भी इस अवसर पर अपनी बात रखी।
यलो कॉइन कम्युनिकेशंस‘ द्वारा ‘एनएच-24‘ नामक पुस्तक पर एक पठन स़त्र आयोजित किया गया। पुस्तक के लेखक नितिन यादव ने कहा कि उनकी पुस्तक वास्तविक जीवन की कहानियों पर आधारित है और हमारे समाज से संबंधित संवेदनशील मुद्दों पर प्रकाश डालती है जैसे कि बच्चे से छेड़छाड़, महिलाओं पर हिंसा आदि। नितिन यादव ने अपनी पुस्तक के कुछ अंश दर्शकों के लिए पढ़े।
लेखक मंचः-
लेखक मंच पर ‘विश्व हिंदी दिवस‘ के अवसर पर ‘नागरी लिपि परिषद’ एवं ‘हिंदी की गूंज’ संस्था की साझी प्रस्तुति ‘हिंदी कवि सम्मेलन’ का आयोजन हुआ। सम्मेलन में देशप्रेम, स्त्री सुरक्षा की महत्ता, स्वतंत्रता सेनानियों, गाँव बनाम शहर की संस्कृति, देश की समन्वयात्मक  संस्कृति आदि विषयों पर गीतों की प्रस्तुति दी गयी। सम्मेलन में ‘हिंदी की गूंज’ के संस्थापक ओंकार सिंह, खेमेन्द्र सिंह, रमेश गंगेले, डॉ. विनोद चैहान, डॉ. नरेश, डॉ. संदीप, कवि प्रतीक तथा कवि हेमंत उपस्थित थे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ‘नागरी लिपि परिषद’ के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने तथा संचालन ‘हिंदी की गूंज’ समूह के संयोजक नरेंद्र सिंह नीहार ने किया।
प्रभात प्रकाशन द्वारा दीनदयाल उपाध्याय संबंधी पुस्तकें ‘दीनदयाल उपाध्याय की प्रेरक कहानियाँ‘ तथा इसके अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण किया गया। रक्षा सचिव पदक से सम्मानित श्रीमती वीणा शर्मा ने स्वागत गीत के साथ इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इन किताबों की लेखिका सुश्री रेनू सैनी, पांचजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर, श्री प्रभात कुमार, ईएसआई के पूर्व आयुक्त श्री हरवीर सिंह आदि उपस्थित थे। यह पुस्तक दीनदयाल उपाध्याय के जीवनानुभवों को सरल व सहज कहानी के रूप में प्रस्तुत 

करती है। प्रभात प्रकाशन से संबद्ध पीयूष कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा राखी जैन ने इस कार्यक्रम का संचालन किया। 
डायमंड बुक्स द्वारा पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया जिसमें दो पुस्तकों ‘उर्दू के नौ महारथी‘ (लेखक: रिंकल शर्मा) तथा ‘निशां चुनते-चुनते‘ (लेखक: विवेक मिश्र) का लोकार्पण किया गया। उर्दू के नौ महारथियों में पद्मभूषण जावेद अख्तर, गुलजार, मुनव्वर राना, वसीम बरेलवी, अमरनाथ वर्मा, डॉ. खुर्शीद आलम, मंजर भोपाली, अंजुम रहबर तथा परवेज आलम शामिल हैं। मुख्य अतिथि के रूप में श्री विवेक मिश्र तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री अशोक वानखेड़े, श्री अमरनाथ वर्मा व श्री खुर्शीद आलम शामिल थे। डायमंड बुक्स से संबद्ध श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया और श्री अमित शर्मा ने इस समारोह का संचालन किया।
 ‘ब्लूम्सबरी‘ से प्रकाशित ‘अमित शाह और भाजपा की यात्रा‘ पुस्तक पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। आयोजन में हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित इस पुस्तक पर बात करते हुए अमित शाह की राजनीतिक यात्रा एवं भारतीय जनता पार्टी की सफलता पर बातचीत हुई। इसके लेखक अनिर्बान गांगुली ने शिवानन्द द्विवेदी एवं वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा के साथ पुस्तक के विभिन्न आयामों को पाठकों के समक्ष रखा। शिवानन्द द्विवेदी ने कहा कि अमित शाह की भाजपा से संबद्धता उपलब्धियों के दिनों से ही नहीं, अपितु पार्टी के संघर्ष के दिनों से है। ‘कालखंडों की गवाही और उनकी स्वीकार्यता‘ अमित शाह एवं भाजपा की सफलता का मूल मंत्र है। अनिर्बान गांगुली ने इस किताब पर बात करते हुए अमित शाह को दल, कार्यकर्ताओं और नेताओं  के बीच का अनुशासनकर्ता तथा पार्टी के भीतर एवं बाहर संवाद स्थापित करने वाला कहा।
 सामयिक प्रकाशन द्वारा ‘सामयिक संवाद‘ का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित रचनाकार चित्रा मुद्गल ने अपनी रचना-यात्रा के विविध पक्षों को छुआ। उन्होंने प्रेमचंद को अपने लेखनकर्म का प्रेरणास्रोत तथा गोर्की की रचना ‘माँ‘ को अपनी ताकत बताया। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में आलोचक जितेंद्र श्रीवास्तव एवं महेश दर्पण उपस्थित थे। पाठकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें जात-बिरादरी, विचारधारा आदि से ऊपर उठकर जो ठीक है उसके पक्ष में खड़ा होना चाहिए। इस कार्यक्रम का संचालन सामयिक प्रकाशन के निदेशक महेश भारद्वाज ने किया।