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कोविड-19 के मद्देनजर भारतीय प्रवासियों ने वित्त मंत्री से एनआरआई का दर्जा दिए जाने के नए नियम को वापस लेने की अपील की
April 15, 2020 • Snigdha Verma • Ministries


नई दिल्ली : कोविड-19 महामारी के कारण विष्व स्तर पर लगाए गए यात्रा एवं निवास संबंधी बंदिषों पर चिंता के मद्देनजर भारतीय प्रवासियों ने भारत सरकार से उस प्रावधान को हटाने का अनुरोध किया है जिसके कारण साल में 120 दिन तक भारत में रहने वाले भारतीय नागरिक अनिवासी स्थिति (नाॅन रेसिडेंट स्टेटस) का दावा नहीं कर सकते हैं। 
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने 2020 के आम बजट में इस बात का प्रावधान किया था कि जो भारतीय साल में 120 दिन तक भारत में रहते हैं वे अनिवासी (नाॅन रेसिडेंट) होने का दावा नहीं कर सकते जबकि पहले यह अवधि 180 दिन थी। 
भारतीय प्रवासियों के प्रमुख वैष्विक संगठन - द ग्लोबल आॅर्गेनाइजेषन आॅफ पीपल आॅफ इंडियन ओरिजन (जीओपीआईओ) ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण यात्रा एवं निवास पर लगाई गई विष्वव्यापी पाबंदी के कारण अनेक अनिवासी भारतीयों के लिए उक्त प्रावधान काफी मुष्किल पैदा करेगा। 
न्यूयॉर्क मुख्यालय वाले संगठन जीओपीआईओ के अध्यक्ष श्री सनी कुलथाकल ने कहा कि नए नियम से उन अनिवासी भारतीयों तथा भारतीय मूल के लोगों को परेषानी हुई है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कई अनिवासी भारतीय क्वारेंटीन तथा यात्रा संबंधी बंदिषों के कारण भारत में अधिक समय तक रहने को मजबूर हैं और इस कारण उनकी एनआरआई स्थिति के खत्म होने का खतरा है। 
उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देष सीमाओं के बंद होने, एयरलाइनों के बंद होने और परिवहन के अन्य साधनों के बंद होने के कारण संकट का सामना कर रहा है। ये विनाषकारी घटनाक्रम हमारे नियंत्रण से परे हैं। 
उन्होंने वित्त मंत्री से अनिवासी भारतीयों की दुर्दशा पर विचार करने और संशोधित निवास अवधि एनआरआई स्थिति संबंधित नियम को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया ।
उन्होंने सरकार को देश के विकास में अनिवासी भारतीयों की भूमिका की याद दिलाते हुए विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला दिया कि भारत अपने प्रवासी भारतीयों द्वारा दुनिया में सबसे अधिक धन प्राप्त करने वाला देश है। इस रिपोर्ट के अनुसार अनिवासी भारतीयों ने 2018 में 79 बिलियन अमरीकी डालर स्वदेष भेजा जो पिछले वर्श की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। 
श्री कुलथाकल ने अनिवासी भारतीय समुदाय एवं भारतीय मूल के लोगों के बीच प्रधानमंत्री की मेक-इन-इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों को बढ़ावा देने के लिए जीओपीआईओ के प्रयासों तथा दुनिया भर में संगठन द्वारा सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक मुद्दों के लिए किए जाने वाले कामों की तरफ वित्त मंत्री का ध्यान आकृश्ट किया। 
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन नए नियम के कारण वे निराष हैं।’’ उन्होंने वित्त मंत्री से इस निर्णायक समय में उनकी मदद के लिए आगे आने का अनुरोध किया।’’
1989 में स्थापित, जीओपीआईओ भारतीय डायस्पोरा का सबसे बड़ा नेटवर्क है। आरंभ में इसका फोकस भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ होने वाले अमानवीय अधिकारों का उल्लंघन पर था लेकिन पिछले तीन दषकों से यह दुनिया भर में पीआईओ और एनआरआई के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक मुद्दों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है।