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मायावती का जन्मदिन देशभर में ’’जनकल्याणकारी दिवस’’ के रूप में मनाया
January 15, 2020 • Snigdha Verma

 केन्द्र सरकार सीएए पर पुर्नविचार करे। इसे वापस ले और फिर आम सहमति से कोई नया कानून बनाये। यह पुनः बी.एस.पी. की माँग है।
यू.पी. में कानून का राज नहीं है बल्कि अपराधियों का ही हर तरफ जंगलराज है। 
नई दिल्ली : बसपा के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि  हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरे देशभर में   बी.एस.पी. के लोग मेरे जन्मदिन को विभिन्न स्तर पर व बड़े पैमाने पर खासकर हमारे महान सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों में भी विशेषकर महात्मा ज्योतिबा फूले, छत्रपति शाहूजी महाराज, नारायणा गुरु, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी आदि की सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय की सोच व उनकी मानवतावादी मूवमेन्ट को ध्यान में रखकर ही इसे जनकल्याणकारी दिवस (च्मवचसमश्े ूमसवितम क्ंल) के रूप में मनाते हैं, जिनके बताये हुये रास्तों पर चलकर ही मैंने उनकी सोच व मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने के लिये अपनी पूरी जिन्दगी भी समर्पित की हुई है और इसी धारणा के तहत् ही मेरे जन्मदिन को मनाने के मौके पर हर वर्ष बी.एस.पी. के लोग अपने-अपने क्षेत्रों में तथा अपने आर्थिक सामथ्र्य को देखते हुये विशेषकर गरीब, कमजोर, लाचार, असहाय, बीमार व अन्य अति-ज़रूरतमन्द लोगों की विभिन्न रुपों में मदद भी करते हैं जिनके हित व कल्याण के लिये हमेशा ही हमारी पार्टी अति-गम्भीर, तत्पर, संवेदनशील, ईमानदार व संघर्षरत रहती है। 
इसके साथ ही, इसी ख़ास अवसर पर मेरे द्वारा लिखित पुस्तक मेरे संघर्षमय जीवन एवं   बी.एस.पी. मूवमेन्ट का सफरनामा (। ज्तंअमसवहनम व िडल ैजतनहहसम त्पककमद स्पमि ंदक ठैच् डवअमउमदज . ए ट्रेवेलोग आॅफ माई स्ट्रगल-रिडेन लाइफ एण्ड बी.एस.पी. मूवमेन्ट) का हिन्दी व अंग्रेज़ी संस्करण भी, जो मुख्यतः एक वर्ष के भीतर पार्टी व मूवमेन्ट के कार्यकलापों व संघर्षों आदि का साफ-सुथरा लेखा-जोखा होता है, उसे भी जारी किया जाता है, जिसे आखिर में आज भी यहाँ आप लोगों के समक्ष जारी किया जायेगा, लेकिन इसके पहले मैं पूरे देशभर में अपनी पार्टी के लोगों का व शुभचिन्तकों का भी जो आज मेरा जन्मदिन जिस भी रूप में व जिस भी स्तर पर मना रहे हैं उन सभी का पूरे तहेदिल से आभार प्रकट करती हूँ तथा आज इस मौके पर भी, मैं उन्हें पुनः नववर्ष सन् 2020 की अपनी हार्दिक शुभकामनायें देती हूँ और साथ ही उनके उज्जवल भविष्य की भी कामना करती हूँ। 
इसके साथ-साथ मायावती ने बताया कि यहाँ यह भी कहना जरूरी समझती हूँ कि आज देश की लगभग 130 करोड़ जनता के समक्ष जो दिन-प्रतिदिन की दुःख तकलीफें तथा गम्भीर, राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक संकट एवं तनाव व चुनौतियां आदि हैं और जिसके कारण देश में हर जगह समाज में जो भयंकर गरीबी व बेरोजगारी व्याप्त है साथ ही मांग के अभाव में उद्योग-धन्धों के बुरी तरह से प्रभावित होने के कारण देश की अर्थव्यवस्था भी काफी मन्दी की बीमार अवस्था हालत में पहुँच गयी है जिससे अब आमजनता का जीवन काफी कष्टदायक एवं पीड़ादायी हो गया है तो यह सब मौजूदा केन्द्र सरकार की ज्यादातर गलत-नीतियों, संकीर्ण सोच व कार्यकलापों का ही परिणाम है। 
लेकिन यह भी एक कटु सच है कि देश की जनता ने ऐसे ही ख़राब हालात इससे पहले कांग्रेस पार्टी की सरकारों में भी देखे व झेले हैं और जिससे मुक्ति पाने के लिए फिर इन्होंने कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया है, जो कि पूरी तरह से यह हकीकत है। किन्तु देश की जनता के लिए यह भी बड़े दुर्भाग्य की बात है कि वर्तमान में केन्द्र की बीजेपी सरकार भी अब कांग्रेस पार्टी की पूर्ववर्ती सरकारों के रास्तों पर ही लगातार चलकर इनको काफी त्रस्त/दुःखी किये हुये है वैसे भी पूरा देश यह देख रहा है कि कांग्रेस पार्टी की तरह ही, अब बीजेपी की मौजूदा केन्द्र सरकार भी अपने राजनीतिक व व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सत्ता का काफी घोर दुरुपयोग कर रही है जिससे अपने देश की संवैधानिक व्यवस्था व देश का लोकतंत्र भी भारी तनाव से ग्रस्त होता प्रतीत लग रहा है। 
इतना ही नहीं बल्कि अब बीजेपी की केन्द्र सरकार ने भी कांग्रेस पार्टी की तरह ही यहाँ जनहित, जनकल्याण व व्यापक देशहित के मुद्दों को ज़्यादातर मामलों में ताक पर ही रख दिया है, जिसका ही परिणाम है कि आज भी पहले की तरह ही, देश में हर तरफ गरीबी, अशिक्षा, बेरोजबारी, हिंसा, तनाव, नफरत व अराजकता का ही माहौल वातावरण व्याप्त है। 
इसके साथ ही, हर धर्म, हर जाति व हर वर्ग से ताल्लुक रखने वाले लोग, चाहे वे देश के किसी भी हिस्से में रह रहे हों आज वे किसी ना किसी रूप में चिन्तित, परेशान व इधर-उधर भागते हुये ही नज़र आते हैं। केन्द्र की इस प्रकार की गलत नीतियों व गलत कार्यशैली के प्रभाव के कारण ही अब पूरे देश में शान्ति व कानून-व्यवस्था तथा विकास का अभाव है। ऐसे में देश कैसे आगे बढ़ सकता है? यही कारण है कि आज हमारा देश ग़लत व निगेटिव/नकारात्मक कारणों से ही सुर्ख़ियों में ज़्यादा बना हुआ, जो राष्ट्रीय चिन्ता की बात है। 
हालाँकि बीजेपी सरकार की इन्हीं सब कमियों व विफलताओं को भुनाकर ही अब कांग्रेस पार्टी एण्ड कम्पनी के लोग तरह-तरह से अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे है। लेकिन इससे पहले देश का कांग्रेसी शासनकाल जैसी ही बदहाली व दुर्दशा में था तो बी.एस.पी. ठीक उसी प्रकार से आज भी चिन्तित है जैसे पहले रहती थी। इसकी ख़ास वजह यह है कि जब केन्द्र की सरकार संविधान व लोकतन्त्र की सही मानवतावादी मान-मर्यादा से नहीं चलती है तो तब उसकी सबसे ज्यादा दुःख-तकलीफ व प्रताड़ना व परेशानी देश के ख़ासकर यहाँ दलितों, आदिवासियों, अति पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को ही झेलनी पड़ती है क्योंकि इन्हीं वर्गों के लोग ज़्यादातर ग़रीब, मज़दूर, श्रमिक, खेतिहर व किसान आदि होते हैं और यही लोग असली भारत हैं तथा देश का संविधान इन्हीं लोगों को खासकर समर्पित भी है। 
इसके साथ ही यह बात भी सर्वविदित ही है कि इन्हीं वर्गों के हित व कल्याण के नाम पर ही केन्द्र व प्रदेशों में सरकारें तो बनती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद फिर इन वर्गों के करोड़ों लोगों के हित व कल्याण को पूरी तरह से भुला दिया जाता है और इसी प्रकार के अनुभवों के कारण ही हमारी पार्टी ख़ासकर कांग्रेस पार्टी व बीजेपी को भी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे मानकर चलती है तथा इनसे अपनी पूरी दूरी बनाकर, इन्हें केवल मुद्दों के गुण व दोष के आधार पर ही इनकी केन्द्र की सरकारों को समर्थन देती है और यही एक मुख्य कारण है कि बी.एस.पी. अब तक केन्द्र की किसी भी पार्टी की सरकार में, उनके बार-बार आग्रह करने के बावजूद भी शामिल नहीं हुई है। 
 
इसके अलावा यह बात भी सर्वविदित है कि पूर्व में केन्द्र में रही कांग्रेस पार्टी के शासनकाल में भी पूरा देश गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिक हिंसा, दंगा व तनाव आदि से पीड़ित रहा है जिसमें काफी जान-माल की हानि होती थी जिसके अनेकों उदाहरण हमारे सामने हैं, लेकिन वर्तमान बीजेपी की केन्द्र सरकार में भी गरीबी, बेरोजगारी के साथ-साथ हर प्रकार की अव्यवस्था, अराजकता, हिंसा व तनाव आदि की गंभीर समस्या अब कांग्रेस पार्टी के शासनकाल से भी दो कदम आगे चली गयी है और जिसमें देश की अधिकांशः जनता बुरी तरह से पिस रही है। 
इस प्रकार से कुल मिलाकर वैसे तो कांग्रेस पार्टी को, देश व समाज की बदहाली एवं भ्रष्टाचार आदि के मामले में बीजेपी की ज़्यादा आलोचना करने का नैतिक अधिकार नहीं बनता है और शायद यही एक प्रमुख कारण है कि कांग्रेस पार्टी जब इन सब मामलों में बीजेपी सरकार की आलोचना करती है तो उसका व्यापक प्रभाव आमजनता के दिल-दिमाग़ पर जल्दी से नहीं पड़ता है तथा जिस कारण ही बीजेपी सन् 2019 में फिर से केन्द्र की सत्ता में पहले से ओर भी ज़्यादा मज़बूत होकर वापस आ गई है। लेकिन इसका मतलब बीजेपी की सरकार को यह कतई नहीं समझना चाहिये कि केवल कांग्रेस पार्टी की सरकार से अपनी सरकार की तुलना करके वह जनता की पैनी जाँच-परख से बच जायेगी अर्थात् बिल्कुल भी नहीं बचेगी। क्योंकि देश की जनता ने कांग्रेस पार्टी को उसके ग़लत किये की भरपूर सज़ा दे दी है और उसके कारण ही फिर बीजेपी सत्ता में आ गयी है। लेकिन इस बात में भी काफी सच्चाई है कि बीजेपी की केन्द्र सरकार यदि इसी प्रकार कांग्रेस पार्टी की सरकार के ही पैटर्न पर लगातार चलती रही तो तब यह पार्टी भी यहाँ राज्यों से एक-एक करके विदा होने के बाद फिर आगे इनकी भी स्थिति कांग्रेस पार्टी से भी कहीं ज्यादा बदतर हो जायेगी। 
इसके साथ ही, कांग्रेस पार्टी जो अपने जनविरोधी कारनामे अन्दर-अन्दर छिपकर करती रहती है तो बीजेपी की वर्तमान केन्द्र की सरकार भी वही गलत खेल अब देश की जनता के साथ खुलकर खेल रही है और इससे देश की गरीब जनता लगातार मजबूर व लाचार बनी हुई है। इसलिए हमारी पार्टी का यही कहना है कि बीजेपी अगर कांग्रेस पार्टी के ही पदचिन्हों पर चलते रहने के बजाय देश में शान्ति व कानून-व्यवस्था की स्थापना करने के साथ-साथ यहाँ के करोड़ों लोगों की ग़रीबी व बेरोजगारी को दूर करने आदि में अपनी पार्टी एवं सरकार की पूरी शक्ति व संसाधन लगाती है तो यह देश व आम-जनहित में ज्यादा बेहतर होगा। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनके बारे में अब तक का अनुभव तो यही बताता है कि देशहित व आम-जनहित के मामलों में बीजेपी की केन्द्र व खासकर यहाँ इनकी यूपी सरकार भी अभी तक पूरे तौर से विफल ही साबित हुई है। 
इतना ही नहीं बल्कि अब तो इनके हर काम व हर निर्णय से यहाँ विवाद व अशान्ति ज्यादा फैलती है, ऐसा क्यों? यह काफी गम्भीरता से सोचने की बात है। ऐसे में बी.एस.पी. का यही कहना है कि इनको देश की लगभग 130 करोड़ ग़रीब व मज़लूम जनता के दुःख-दर्द व ख़ासकर उनकी ग़रीबी एवं बेरोज़गारी आदि की तड़प (परेशानियों) को सही तरह से समझ कर उसका सही समाधान करने के लिए, नोटबन्दी, जी.एस.टी., असम राज्य में दोबारा से एन.आर.सी., फिर नया नागरिकता संशोधन कानून व एन.पी.आर. तथा समस्त देश में एन.आर.सी. आदि के जंजाल से लोगों का दिन-प्रतिदिन का जीवन त्रस्त, तनावपूर्ण, व बेहाल आदि बनानेे की अपनी ज़िद को छोड़कर, खासकर इनको विकास के अपने वायदों पर ही पूरी तरह से केन्द्रित करना चाहिये, तो तभी फिर यह जनहित व देशहित की ज़िम्मेदारी निभाने वाला इनका सही कदम होगा, जिसका सभी को काफी इन्तजार भी है इतना ही नहीं बल्कि देश में ज्यादातर छोटे उद्योग-धंधों के बन्द होने के कारण अब बड़े शहरों से लोगों के वापस अपने घर पलायन होने की वजय से ख़ासकर यहाँ गाँव-देहातों में गरीबी व बेरोजगारी की प्रताड़ना काफी जटिल हुई है, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित सर्वसमाज में से खासकर यहाँ गरीब, दलित, शोषित व अन्य उपेक्षित वर्गों के लोग ही हो रहे है।

उन्होंने कहा कि  केन्द्र व राज्य सरकारों के भी ज्यादातर बड़े-बड़े सरकारी कार्य इनके चहेते बड़े-बड़े उद्योगपतियों को ही दिये जा रहे हैं जिनकी नौकरियों में खासकर एस.सी, एस.टी. व   ओ.बी.सी. वर्गों के लिए आरक्षण की कोई भी व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण अब इन वर्गों का सरकारी नौकरियांे में आरक्षण नाम-मात्र के लिये ही बचा रह गया है इसको लेकर भी हमारी पार्टी काफी ज्यादा चिन्तित है। 
इनके साथ-साथ पूरे देश में किसानों की भी हालत अब बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है ऐसी स्थिति में हमारी पार्टी का आज अपने लोगों को विशेष निर्देश यह भी है कि इस बार बी.एस.पी. के लोगों को मेरे जन्मदिन के मौके पर पहले से ज़्यादा व बड़े पैमाने पर सर्वसमाज में से खासकर अति-ग़रीबों, असहाय व कमजोर वर्गों तथा वर्तमान में अनेकों मुसीबतों से घिरे नौजवानांे एवं छात्र-छात्राओं व अन्य अति-ज़रूरतमन्द लोगों की भी ज्यादा से ज्यादा मदद जरुर करनी चाहिये। 
इन्हीं खास बातों के साथ ही अब मैं यह भी कहना जरुरी समझती हूँ कि पिछले कुछ समय से कुछ पार्टियों में एक दूसरे पर झूठ बोलने का आरोप लगाने की भी काफी घिनौनी राजनीति चल रही है जिसमें बीजेपी व कांग्रेस पार्टी के लोग सबसे आगे हैं। जबकि यह बात जग-जाहिर है कि हमारी पार्टी कांग्रेस, बीजेपी व अन्य पार्टियों की तरह कभी भी झूठ के आधार पर कोई घिनौनी राजनीति नहीं करती है। और यह बात आज मैं इसलिए कह रही हूँ क्योंकि पिछले महीने कांग्रेस ने अपनी पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर खासकर नागरिकता कानून व एन.आर.सी. को लेकर जो यह कहा था कि कांग्रेस के सिवाय यहाँ उ.प्र. में सभी विपक्षी पार्टियां इस मामले में कुछ भी आवाज नहीं उठा रही हैं, 
जबकि इस पार्टी का यह आरोप एकदम गलत व सफेद झूठ है क्योंकि यहाँ के मीडिया बन्धुओं के साथ-साथ पूरे देश के लोगांे को भी यह बात काफी अच्छी तरह से मालूम है कि जब नागरिकता संशोधन विधेयक को केन्द्र सरकार ने इसे कैबिनेट में पास किया था तो तब सबसे पहले मैंने खुद मीडिया में जाकर इसका जबरदस्त विरोध किया था और फिर इसको लेकर लिखित प्रेसनोट भी जारी किया था। हालांकि उस समय कांग्रेस सहित अन्य सभी विपक्षी पार्टियां अधिकांश इस मामले में खामोश थी। और उनकी यह खामोशी तब टूटी थी, जब यह बिल संसद में पेश (रखा) किया गया था और इतना ही नहीं बल्किी हमारी पार्टी ने इस मामले में संसद के दोनों सदन के अन्दर इसके विरोध में काफी आवाज भी उठाई व इसके विरुद्ध अपना वोट भी दिया है। इसी ही प्रकार इसके पूर्व में भी देश में बीजेपी की नोटबन्दी व जी.एस.टी. को लागू करने के मामले में भी सबसे पहले बी.एस.पी. ने ही इसका खुलकर विरोध किया था जबकि बाकी पार्टियों ने काफी बाद में इसका विरोध किया था। 
इसके साथ ही चुनाव में ई.वी.एम. के जरिये की गई धांधली को भी लेकर सबसे पहले     बी.एस.पी. ने ही आवाज उठाई थी और फिर इस मामले को लेकर सबसे पहले बी.एस.पी. ही माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी गई थी। इसलिए अब बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी को भी अपनी झूठ की राजनीति को बन्द करना चाहिये। तो यह इनके लिए बेहतर होगा। 
मायावती ने कहा कि यह बात भी सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश व जनहित के किसी भी मुद्दे को लेकर कांग्रेस, बीजेपी व अन्य पार्टियों की तरह बिना अनुमति के अपना कोई भी धरना-प्रदर्शन आदि नहीं करती है और धरना-प्रदर्शन में ना ही कोई हिंसा आदि करने को भी बढ़ावा देती है अर्थात् ज्यादातर अपना विरोध प्रदर्शन शान्ति-मय ढंग से ही प्रकट करती है तथा ना ही इसकी आड़ में दूसरी पार्टियों की तरह कोई घिनौनी राजनीति करती है। वैसे भी बी.एस.पी. एक अनुशासित व कैडर-बैस पार्टी है और पार्टी में इसके विरूद्ध जाने पर फिर सख्त कार्यवाही भी करती है जिसके अनेकों उदाहरण आप लोगों के सामने है अर्थात् इस मामले में उनकी कमियों को छिपाने के लिए कांग्रेस, बीजेपी व अन्य पार्टियों की तरह कोई भी लीपा-पोती आदि नहीं करती है। इन्हीं जरुरी बातों के साथ ही अब मैं पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी आज के ही खास दिन के मौके पर अपनी पुस्तक के हिन्दी व अंग्रेजी संस्करण का विमोचन भी करती हूँ, जो यह पुस्तक खासकर वर्तमान में नई पीढ़ी व आगे आने वाली पीढ़ी के लिये भी काफी प्रेरणादायक साबित/सिद्ध होगी, ताकि बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी व मानवता-वादी मूवमेन्ट आगे ही बढ़ती रहे अर्थात् यह मूवमेन्ट फिर आगे कभी भी ना रुके यहाँ किताब का विमोचन करना है। अन्त में अब मैं आप लोगांे से मेरे जन्मदिन का केक आदि लेने के लिए आग्रह करते हुये, अपनी बात यहीं समाप्त करती हूँ। धन्यवाद।
करीब 30 मिनट तक अपने सम्बोधन व ब्लू बुक के विमोचन के बाद सुश्री मायावती जी ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुये सपा के बारे में कुछ भी न बोलने सम्बन्धी सवाल के जवाब में कहा कि उनका जन्मदिन पूरे देशभर में जनकल्याणकारी दिवस के रुप में मनाया जाता है और इसीलिए उन्होंने ज्यादातर केन्द्र से सम्बन्धित देश के खास व ज्वलन्त मुद्दों पर ही अपनी बात देश की जनता के समक्ष रखी है। अगर उन्हें इस अवसर पर यू.पी. सरकार व यहाँ की राजनीति के बारे में बात कहनी होती तो यकीनन इतना समय और भी लग जाता, क्योंकि यू.पी. सरकार जनहित व जनकल्याण के विरूद्ध एक ऐसी सरकार है जिसके संकीर्ण व गलत कार्यकलापों के कारण यहाँ की समस्त 22 करोड़ जनता काफी दुःखी व त्रस्त है।
यू.पी. के दो शहरों में कमिश्नर पुलिस प्रणाली लागू करने सम्बन्धी एक सवाल के जवाब में सुश्री मायावती जी ने फिर कहा कि जब तक बीजेपी सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम नहीं करेगी तबतक इस प्रकार के सरकारी कदम उठाने का कोई भी सही लाभ जनता को नहीं मिलने वाला है। अर्थात् यू.पी. में कानून का राज नहीं है बल्कि अपराधियों का ही हर तरफ जंगलराज है। क्या यू.पी. सरकार हमारी सरकार की तरह अपनी पार्टी के सांसदों व विधायकों आदि के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करके दिखा सकती है ताकि सरकार का इकबाल बुलन्द रहे व आमजनता सुख-शान्ति से अपना जीवन व्यतीत कर सके? केवल व्यवस्था बनाने से नहीं बल्कि अपराध नियन्त्रण व बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है, जो खासकर यू.पी. की सरकार में थोड़ी भी अबतक दिखायी नहीं पड़ती है। बी.एस.पी. पुलिस कमीश्नर व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकार को सबसे पहले अपनी संकीर्ण सोच, जातिवादी द्वेष व साम्प्रदायिकता के जहर को त्यागना होगा तभी इसका सही लाभ आमजनता को मिल पायेगा। 
साथ ही सी.ए.ए., एन.आर.सी. व एन.आर.पी. सम्बन्धी एक अन्य सवाल का जवाब देते हुये सुश्री मायावती जी ने कहा कि देश की समस्त लगभग 130 करोड़ आमजनता के जीवन को सीधे तौर पर नोटबन्दी आदि की इमरजेन्सी की तरह ही प्रभावित करने वाले इन मामलों में केन्द्र सरकार को आमसहमति बनाकर ही काम करना चाहिये था। लेकिन केन्द्र सरकार ने इसके विपरीत काम करते हुये ना तो आल-पार्टी की कोई बैठक बुलाई और ना ही इन विषयों को बेहतर विचार-विमर्श के लिए संसदीय समिति को मामला भेजा, जबकि बी.एस.पी. बार-बार इस प्रकार का आग्रह केन्द्र सरकार से करती रही कि नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद में पारित करने से पहले इसे स्टैडिंग समिति को भेजा जाये, ताकि पूर्णतः सही व संवैधानिक तौर पर यह विधेयक तैयार होकर यह कानून जनता के सामने आ सके। केन्द्र सरकार द्वारा केवल अपनी जिद व अड़ियल रवैये पर कायम रहने के कारण ही यह सी.ए.ए. पहली नजर में विभाजनकारी व असंवैधानिक लगता है और जिस कारण ही सरकार व बीजेपी के लाख प्रयासों के बावजूद लोगांे में अनेकों प्रकार की भ्रन्तियां हैं और इसका देशभर में हर जगह अप्रत्याशित व अभूतपूर्व तौर पर जर्बदस्त विरोध हो रहा है, जिससे यह भी साबित होता है कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के प्रति लोगों को कितना प्रेम व सम्मान है। केन्द्र सीएए मामले में किसी को भी विश्वास (गुडफेथ) में नहीं लिया है, जो बड़े दुःख की बात है और इसीलिए देश में हर जगह हाहाकार मचा हुआ है। ऐसा नहीं है कि पड़ोसी देशों खासकर पाकिस्तान में रहने वाले सभी मुसलमान वहाँ की सरकार द्वारा शोषित व पीड़ित नहीं है। जुल्म-ज्यादती किसी के साथ भी कहीं भी हो सकती है। इसीलिए केन्द्र सरकार सीएए पर पुर्नविचार करे। इसे वापस ले और फिर आम सहमति से कोई नया कानून बनाये। यह पुनः  बी.एस.पी. की माँग है।