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मायावती ने की पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के प्रयास से सम्बन्धित गतिविधियों की गहन समीक्षा
November 6, 2019 • Snigdha Verma


नई दिल्ली : बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सुश्री मायावती जी ने बी.एस.पी. उत्तर प्रदेश के सभी स्तर के छोटे-बड़े पदाधिकारियों, सांसदों व पार्टी विधायकों आदि की एक अहम बैठक में आज पार्टी संगठन के कार्यकलापों व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के प्रयास आदि से सम्बन्धित जारी गतिविधियों आदि की गहन समीक्षा करने के बाद आगे की चुनौतियों का डट कर सामना करने की तैयारी के क्रम में जरूरी व आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा पार्टी संगठन का इसके लिए आवश्यक पुनर्गठन भी किया।
लगभग दो घण्टे तक 12 माल एवेन्यू स्थित प्रदेश पार्टी कार्यालय में चली इस बैठक में सुश्री मायावती जी ने हाल में यूपी में सम्पन्न विधानसभा उपचुनाव की भी गहरी समीक्षा की और कहा कि यू.पी. विधानसभा आमचुनाव से पहले बी.एस.पी. का मनोबल गिराने के खास मकसद के तहत् ही सत्ताधारी बीजेपी व समाजवादी पार्टी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत ही भीतरी तौर पर आपस में मिलकर बी.एस.पी. को एक भी सीट नहीं जीतने दी। वास्तव में पिछले लोकसभा आमचुनाव में दलित व मुस्लिम गठजोड़ से यहाँ सपा, बीजेपी व अन्य सभी विरोधी पार्टियाँ भी काफी ज्यादा घबरा गयी थी जिसे तोड़ने के लिए ही इन्होंने अभी हाल ही में यहाँ विधानसभा के हुये उपचुनाव में यह सब कुछ जानबूझकर षड़यन्त्र के तहत् ही किया है अर्थात् इन्होंने यानि की सपा व बीजेपी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत् ही अन्दर-अन्दर एक होकर बी.एस.पी. के विरुद्ध ये उपचुनाव लड़े हंै, चुनावी विशलेषण यह साफ तोर पर साबित करता है।
साथ ही, खासकर सपा ने पिछले लोकसभा आमचुनाव में इस बात का भी काफी प्रचार किया कि मुसलमानों को ज्यादा टिकट देने से बीजेपी को लाभ मिलेगा, इस पर भी बी.एस.पी. जरूर तर्जुबा कर सकती है, लेकिन बी.एस.पी. अपने उसूल व सिद्धान्त के आधार पर सर्वसमाज के हित को लेकर चलने पर पूरी तरह से अड़ी रही और इसके अच्छे परिणाम यह हुए कि बी.एस.पी. के सभी 10 सांसद सर्वसमाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें ब्राह्मण, मुस्लिम, यादव व एस.सी. आदि सभी वर्ग के लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बी.एस.पी. का आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का मूवमेन्ट परमपूज्य बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की तरह ज़िद के साथ मिशनरी काम करने वाला है और यही कारण है कि अब बी.एस.पी ने ना केवल श्री मुनकाद अली को बी.एस.पी. यू.पी. स्टेट यूनिट के अध्यक्ष पद पर बने रखने का फैसला किया है बल्कि अमरोहा से सांसद श्री दानिश अली को दोबारा बी.एस.पी. लोकसभा संसदीय दल का नेता बना दिया गया है जबकि निवर्तमान लोकसभा संसदीय दल के नेता जौनपुर से बी.एस.पी सांसद श्री श्याम सिंह यादव को प्रदेश में नई प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है। श्री श्याम सिंह यादव के साथ-साथ बी.एस.पी. के राज्यसभा में संसदीय दल के नेता श्री सतीश चन्द्र मिश्र आदि को भी पार्टी संगठन के नये महत्वपूर्ण काम में लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि बी.एस.पी. एक राजनैतिक पार्टी के साथ-साथ विशेषकर दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों एवं अन्य उपेक्षित वर्गों के स्वाभिमान की भी एक मूवमेन्ट है, जिससे पार्टी कभी किसी भी कीमत पर अलग नहीं हो सकती है। चुनावी परिणाम आदि हमें अपने मिशनरी मकसद से कतई डिगा नहीं सकते हैं। 
उन्होंने कहा कि बी.एस.पी. विरोधी पार्टियाँ खासकर कांग्रेस व बीजेपी धर्म का राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करती हैं, लेकिन बी.एस.पी. इस मामले में भी संविधान की सच्ची व सही मंशा के हिसाब से काम करके कभी भी धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करती है।
सुश्री मायावती जी ने कहा कि खासकर जम्मू-कश्मीर के मामले में धारा 370 को लेकर हमारी पार्टी ने बीजेपी के कहने पर नहीं बल्कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की सोच के आधार पर चलकर ही फिर देश व खासकर जम्मू-कश्मीर के हित में ही इस पर अपना सही फैसला लिया है जिसे लेकर भी अब ये लोग यहाँ खासकर मुसलमानों को गुमराह करने में लगे है अर्थात् कभी धारा 370 तो कभी तीन तलाक आदि को लेकर ये लोग धर्म की आड़ में राजनीति करने में लगे हैं जिनसे इन्हें जरूर सावधान रखना है जबकि बी.एस.पी. के मामले में यह बात सर्वविदित है कि हमने अपने राजनैतिक लाभ के लिए कभी भी धर्म का गलत इस्तेमाल नहीं किया है जिसके अनेकों उदाहरण आप लोगांे के सामने है। 
और इस मामले में पूरा देश यह जानता है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार में ही वोट की राजनीति की खातिर दिनंाक 22-23 दिसम्बर सन् 1949 की रात को अयोध्या में बाबरी मस्जिद की गुम्बद के नीचे मूर्ति रखी गयी थी और फिर इसी कांग्रेस पार्टी की सरकार ने सन् 1986 में बाबरी मस्जिद का दशकों से बंद पड़े गेट का ताला खुलवाकर वहाँ हिन्दुओं को अन्दर पूजा-पाठ करने की इजाजत दी थी। और यह सब इसलिए किया गया था ताकि शाहबानों तलाक के मामले में सन् 1985 में माननीय सुप्रीम कोर्ट का खासकर गुजारे-भत्ते को लेकर, जो फैसला आया था तो उसे फिर केन्द्र की कांग्रेसी सरकार ने मुसलमानों को खुश करने के लिए, यह कहकर मानने से इन्कार कर दिया था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का नहीं बल्कि शरीयत का अपना कानून ही लागू होगा। लेकिन फिर इससे नाराज हुये हिन्दू समाज के लोगों को खुश करने के लिए इसी कांग्रेस पार्टी की सरकार ने दिनांक 9 नवम्बर सन् 1989 को विश्व हिन्दू परिषद को वहाँ पर मन्दिर के लिए शिलान्यास समारोह करने की इजाजत दे दी थी। 
इतना ही नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी की केन्द्र सरकार ने ही राजनीतिक षडयन्त्र के तहत् फिर बीजेपी व आर.एस.एस. को दिनांक 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद व राम-मन्दिर विवादित स्थल को तोड़ने की भी छूट दे दी थी। हालांकि इसके पूर्व में श्री मुलायम सिंह यादव की भी सरकार में, जो यह कहा गया था कि अयोध्या में परिन्दा भी पर नहीं मारेगा, लेकिन इनके इस दिये गये उत्तेजक बयानबाजी के कारण फिर पूरे उत्तर प्रदेश में दंगे-फसाद हुये, जिससे उस समय खासकर यहाँ मुसलमानों को बड़े-पैमाने पर जानी-माली नुकसान पहुँचा था और फिर इसके बाद इन सबका बीजेपी ने राजनीतिक तौर पर काफी भरपूर फायदा उठाया है। 
ऐसे हालातों में अब मैं इन सभी विरोधी पार्टियों को यह बात जरूर कहना चाहती हूँ कि प्रदेश में यहाँ खासकर मुसलमानों को धारा 370 व अन्य और मामलों में भी इन्हें कितना ही गुमराह क्यों ना कर लिया जाये तो भी उससे घबराकर व डरके अब मैं ना तो यहाँ श्री मुनकाद अली को स्टेट के अध्यक्ष पद से हटाने वाली हूँ और ना ही अब मैं यहाँ आगे भी बी.एस.पी. में मुस्लिम समाज को अहमियत देने में भी कोई कसर छोड़ने वाली हूँ और इसी क्रम में आज मैं फिर से श्री दानिश अली को ही संसद में अपनी पार्टी का नेता भी बना रही हूँ।
उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में सम्पन्न हरियाणा विधानसभा आमचुनाव में भी बी.एस.पी. का बेस वोट पुरी ताकत से अपनी जगह कायम रहा तथा बदली राजनीतिक परिस्थिति के कारण हमें उम्मीद से कम अच्छे परिणाम वहाँ मिले।
इस अति-महत्वपूर्ण बैठक के बाद सुश्री मायावती जी ने बी.एस.पी. सांसदों की अपने निवास पर अलग से बैठक की और इसी माह संसद के शुरू होने वाले सत्र के सम्बन्ध में आपसी चर्चा की व आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सुश्री मायावती जी द्वारा झारखण्ड विधानसभा आमचुनाव के सम्बन्ध में भी पार्टी के वरिष्ठ व जिम्मेदार लोगों से अलग से बैठक करके आज आगे की तैयारियों को अन्तिम रूप दिया गया।