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निजी निवेश गांवों व खेतों तक पहुंचने से बदलेगी खेती की शक्ल– श्री तोमर
August 19, 2020 • Snigdha Verma • Ministries

1 लाख करोड़ रू. के कृषि इंफ्रा फंड और 10 हजार एफपीओ से आएगा आमूलचूल परिवर्तन 

चंबल क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होगा, विविध परियोजनाओं से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा

केंद्रीय कृषि मंत्री के आतिथ्य में हुआ राजमाता सिंधिया कृषि विवि का स्थापना दिवस 

नई दिल्ली / ग्वालियर । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि एक लाख करोड़ रूपए के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, दस हजार नए एफपीओ जैसी केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं से निजी निवेश गांवों व खेतों तक पहुंचेगा, जिससे खेती की शक्ल बदल जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ऐसे ही प्रयासों के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। इसके साथ ही खेती-किसानी से जुड़े क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

श्री तोमर ने यह बात राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि वि.वि., ग्वालियर के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही। श्री तोमर ने कहा कि 19 अगस्त का दिन ग्वालियर के लिए ऐतिहासिक है, जब वर्ष 2008 में यहां एक साथ कृषि व संगीत दो विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई। उन्होंने इनकी प्रगति की सराहना की, साथ ही कहा कि म.प्र. ने कृषि क्षेत्र में काफी प्रगति की है जो किसानों का परिश्रम, वैज्ञानिकों का अनुसंधान व सरकार की किसान हितैषी नीतियों का प्रतिफल हैं। वर्ष 2003 से पहले जब केंद्रीय पूल में खाद्यान्न देने का विषय आता था तो म.प्र. जैसे राज्य की कोई गिनती नहीं होती थी, लेकिन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान व उनकी टीम सहित सभी ने लगातार प्रयास कर कृषि का रकबा, सिंचाई सुविधाएं, किसानों के लिए सुरक्षा कवच बढ़ाते हुए सब प्रकार की सुविधाएं किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया है। पिछले लगभग पंद्रह साल में बहुत अच्छे से काम होने का ही परिणाम है कि आज देश के कुल उत्पादन में म.प्र. का दलहनी फसलों में लगभग 32 प्रतिशत तथा तिलहनी फसलों के उत्पादन में करीब 22 प्रतिशत योगदान है। 

श्री तोमर ने कहा कि जैविक खेती की दृष्टि से म.प्र. अग्रणी राज्य है, जिसे और प्रमोट करने की जरूरत है। म.प्र. में काफी हिस्से में जनजातीय बंधु निवास करते हैं, जहां की जमीन आर्गेनिक है, क्योंकि वे फर्टिलाइजर का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इस रकबे को बढ़ाते हुए समुचित उपयोग करने की आवश्यकता है। चंबल क्षेत्र के ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर में बीहड़ है, जहां की जमीन को कृषि योग्य बनाने के लिए विश्व बैंक तथा म.प्र. के अधिकारियों से एक प्रोजेक्ट पर बात हुई है। अटलजी के नाम पर चंबल प्रोग्रेस वे आकार लेगा, ग्वालियर-श्योपुर गेज कन्वर्जन का काम भी चल रहा है। इन सबसे आवाजाही सुगम होगी, वहीं पूरा क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होगा और अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। 

श्री तोमर ने कहा कि कृषि की अर्थव्यवस्था व गांवों की परंपरा, यह बहुत बड़ी ताकत है। इस पर न तो मुगल आक्रमण कर पाए, न ही अंग्रेज इसे प्रभावित कर पाएं। आजादी के बाद भी भारत के गांवों की अर्थव्यवस्था बड़ी से बड़ी मंदी से टकराने की ताकत रखती है। कोविड संकट में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई, तब भी हमारे गांव व खेती अडिग रहे। लाकडाउन में प्रधानमंत्री  द्वारा आवश्यक छूट दिए जाने से खेती-किसानी का सारा कार्य बहुत अच्छे ढंग से हुआ है। म.प्र. में समर्थन मूल्य पर खरीद का मैकेनिज्म देशभर में सबसे अच्छा है। किसानों की मेहनत से बंपर पैदावार हुई। किसानों व गांवों की इस ताकत में और वृद्धि करना समय की मांग ही नहीं बल्कि देश को मजबूत करने में प्रमुख कारक है। 

श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री जी जब भी कोई भी कार्यक्रम घोषित करते है तो उसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ गांव-गरीब-किसानों को मिलना सुनिश्चित करते हैं। नए एफपीओ, मृदा परीक्षण कार्ड, जल शक्ति अभियान, एग्री इंफ्रा फंड जैसे प्रयत्नों से उन्होंने कृषि क्षेत्र की गैप भरने का काम किया है ताकि कृषि आत्मनिर्भर हो तो गांव और देश भी आत्मनिर्भर बन सकें। योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। राज्य सरकार भी आगे रहकर काम कर रही है। दो नए अध्यादेश लाकर व अत्यवाश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव कर किसानों को मंडी की व्यवस्था से आजादी देने के साथ ही अन्य सुविधाएं दी गई है।प्रधानमंत्री  लगातार प्रोजेक्ट्स की मानीटरिंग कर रहे हैं। किसानों के पास अरसे बाद ऐसे अवसर आए हैं, एग्री इंफ्रा फंड से ज्यादा प्रोजेक्ट बनें, जिससे ग्रामीण जनजीवन को फायदा मिले, इस पर सोचें।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री कमल पटेल ने भी संबोधित करते हुए कृषि के विकास के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की। राजमाता सिंधिया कृषि वि.वि. के कुलपति प्रो. एस.के. राव व अन्य ने भी विचार रखें।