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प्रवासी श्रमिकों को घर भेजने के नाम पर बीजेपी व कांग्रेस द्वारा की जा रही घिनौनी राजनीति : मायावती
May 20, 2020 • Snigdha Verma • Political


नई दिल्ली : बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश  मायावती  ने आज यहाँ कहा कि एक तरफ देश में अनवरत कोरोना लाॅकडाउन-4.0 के कारण गरीबी, बेरोजगारी व भुखमरी की भीषण समस्या से बेहाल व परेशान लाखों प्रवासी मजदूरों/श्रमिक परिवारों की जैसे-तैसे घर वापसी की समस्या सरकारों की उपेक्षा व अपरिपक्वता के कारण कम होने का नाम ही नहीं ले रही है तो दूसरी तरफ खासकर बीजेपी व कांग्रेस पार्टी व उनकी सरकारों द्वारा आपसी खींचतान, टकराव व मुकदमेबाजी आदि ने मामले को और भी ज्यादा गंभीर त्रस्त बना दिया है, जो अति-निन्दनीय है।
सुश्री मायावती  ने अपने बयान में कहा कि पिछले कई दिनों से प्रवासी श्रमिकों को घर भेजने के नाम पर खासकर बीजेपी व कांग्रेस द्वारा जिस प्रकार से घिनौनी राजनीति की जा रही है यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण व शर्मनाक है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं ऐसा तो नहीं ये दोनों पार्टियाँ आपसी मिलीभगत से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करके प्रवासी मजदूरों की त्रास्दी पर से ध्यान बाँट रही हैं?
यदि ऐसा नहीें है तो बी.एस.पी. का कहना है कि कांग्रेस पार्टी को श्रमिक प्रवासियों को बसों से ही घर भेजने मंे मदद करने पर अड़ने की बजाए, इनका टिकट लेकर ट्रेनों से ही इन्हें इनके घर भेजने में इनकी मदद करनी चाहिये तो यह ज्यादा उचित व सही होगा, क्योंकि इस महासंकट के समय में पीड़ित लोगों की हर संभव मानवीय मदद करने की बजाए उनसे इनके घर जाने के लिए भी किराए के पैसे वसूला जा रहा है, जो असंवेदनशीलता व अमानवीयता की पराकाष्ठा ही कही जाएगी। सारा देश कह रहा है कि इन पीड़ितों के लिए भोजन व आर्थिक मदद की जाए लेकिन केन्द्र व राज्य सरकारें हैं कि इन्हें इनके घर जाने तक की मुफत व्यवस्था नहीं कर रही है। क्या इन्हें कल्याणकारी सरकार कहा जाएगा?
सुश्री मायावती  ने कहा कि इन्हीं सब बातों को खास ध्यान में रखकर ही बी.एस.पी. के पार्टी के लोगों से अपने-अपने सामथ्र्य के हिसाब से प्रचार व प्रसार के चक्कर में ना पड़कर बल्कि पूरे देश में इनकी हर स्तर पर सौम्य तरीके से काफी मदद की है अर्थात् बीजेपी व कांगे्रस पार्टी की तरह इनकी मदद की आड़ में कोई घिनौनी राजनीति नहीं की है।
साथ ही, बी.एस.पी. की कांग्रेस पार्टी को यह भी सलाह है कि यदि कांग्रेस को श्रमिक प्रवासियों को बसों से ही उनके घर वापसी में मदद करनी है अर्थात ट्रेनांे से नहीं करनी है तो फिर इनको अपनी ये सभी बसंे कांग्रेस-शासित राज्यों में श्रमिकों की मदद में लगा देनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।