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राज्यसभा चुनाव में प्रथम वरीयता को लेकर भाजपा प्रत्याशियों में घमासान
June 10, 2020 • विशेष प्रतिनिधि • Political

जयपुर। राजस्थान में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए 19 जून को मतदान होना है चुनाव की प्रक्रिया मार्च माह में ही पूरी हो गई थी तथा 26 मार्च को वोट डलने थे लेकिन कोरोनावायरस संक्रमण के फैलने के कारण चुनाव आयोग ने 24 मार्च को मतदान स्थगित कर दिया था अब मतदान के लिए नई तिथि 19 जून निर्धारित की गई है। राज्यसभा की 3 सीटों के लिए कुल 4 प्रत्याशी मैदान में हैं इनमें कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी हैं जबकि भाजपा ने राजेंद्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत को उतारा है।
चुनाव में जीत के लिए किसी भी प्रत्याशी को प्रथम वरीयता के 51 मतों की आवश्यकता है कांग्रेस के स्वयं के 107 विधायक हैं जबकि उसे जनता दल यू के एक विधायक सहित 13 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है, आदिवासियों की नवगठित पार्टी टीडीपी के दो विधायक है जो कांग्रेस के खाते में दिख रहे हैं दो विधायक मार्क्सवादी पार्टी के हैं जो कम से कम भाजपा के साथ नहीं जाएंगे यह तय है। भाजपा के खाते में उसके 72 विधायकों के अलावा हनुमान बेनीवाल की पार्टी रालोपा के तीन विधायक और दिख रहे हैं इस तरह भाजपा को दोनों सीट जीतने के लिए कम से कम 27 विधायकों की आवश्यकता है।
माना जा रहा है कि भाजपा का पहला प्रत्याशी आसानी से जीत जाएगा क्योंकि उसका जीत का आंकड़ा  भाजपा अपने बूते पर हासिल कर  लेगी, लेकिन दूसरे प्रत्याशी के लिए वोट जुटाना भारी पड़ता जा रहा है क्योंकि भाजपा ने इस भरोसे अपना प्रत्याशी उतारा कि उसे कांग्रेसी फूट का फायदा मिलेगा परंतु ऐसा होता नहीं दिख रहा है ऐसे में भाजपा के भीतर दोनों प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में प्रथम वरीयता के लिए संघर्ष छिड़ गया है।
भाजपा के प्रत्याशी राजेंद्र गहलोत को वसुंधरा खेमे का समर्थन हासिल है, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तमाम अटकलों के बाद भी भाजपा के अंदर ऐसी नेता है जिनका पूरे प्रदेश भर में भारी नेटवर्क है कार्यकर्ताओं तक पकड़ है और विधायकों का समर्थन हासिल है, दूसरी और औकार सिंह लखावत को भाजपा ने ऐन वक्त पर उतारा था इसमें प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह की विशेष रुचि रही, पार्टी सूत्रों के अनुसार आलाकमान की रजामंदी पर ही यह फैसला लिया गया था उस वक्त आलाकमान की भाजपा में आने के लिए कई कांग्रेसी नेताओं से बातचीत चल रही थी लेकिन वह बातचीत राज्यसभा चुनाव टलने की घोषणा के साथ ही समाप्त हो गई अब इस तरह की ना तो बातचीत हो रही है और ना मौजूदा स्थिति में संभावना बनती दिख रही है क्योंकि ऐसे नेताओं की नजर में भाजपा का ग्राफ कोरोनावायरस संक्रमण के प्रबंधन में नीचे की ओर सरका है तथा जनता में भाजपा को लेकर नाराजगी है।
भाजपा में राज्यसभा को लेकर यद्यपि पहली वरीयता राजेंद्र गहलोत को ही मिलनी है लेकिन लखावत और उनके समर्थक अब कह रहे हैं कि भाजपा खाते के वोटों को दो हिस्सों में बांट दिया जाए इसके बाद जो बाहर के वोट मैनेज करेगा वह जीत जाएगा लेकिन राजेंद्र गहलोत और उनके साथ जुड़े नेता मान रहे हैं कि जब गहलोत की उम्मीदवारी तय हुई थी जब चौथे प्रत्याशी की बात ही नहीं थी जिन नेताओं ने हवाई किले बनाते हुए आलाकमान को गुमराह किया और चौथा प्रत्याशी उतरवाया  वे अपने स्तर पर ही वोट जुटाए।
जानकारों का कहना है कि भाजपा के अंतर्द्वंद के चलते ही चौथा प्रत्याशी मैदान में आया था क्यों की गई नेता चाहते थे कि राजेंद्र गहलोत नहीं जीते इसलिए ऐसा माहौल बनाया गया कि भाजपा का चौथा प्रत्याशी जीत सकता है अब  उन ही नेताओं का प्रयास है कि भाजपा अपने वोट दो हिस्सों मैं विभक्त कर प्रत्येक प्रत्याशी को 37 /38  तय कर दे जो बाहर का कोई वोट ले आएगा वह जीत जाएगा, इन नेताओं का कहना है कि कुछ  निर्दलीय विधायक आ गए वह भी भाजपा की ही जीत है। वहीं दूसरी और राजेंद्र गहलोत के समर्थक कह रहे हैं कि किसको प्रथम वरीयता में रखना है यह विधायकों से वोटिंग के द्वारा भी तय कराया जा सकता है क्योंकि उन्हें भरोसा है कि ज्यादा विधायक राजेंद्र गहलोत को जिताने के पक्ष में हैं बहरहाल भाजपा के लिए फैसला करना टेढ़ी खीर बन गया है।