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राष्ट्रीय परिपेक्ष में वर्तमान मकर संक्रांति
January 10, 2020 • नरेंद्र सहगल

 

 

 

·         तमसो मा ज्योतिर्गमय

धारा 370 का अंधकार समाप्त

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·         असतो मा सद्गमय

श्री राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त

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·         मृत्योर्मामृतम् गमय

नागरिकता संशोधन अधिनियम मौत का साया समाप्त

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                       पर्व/त्यौहार भारत की सांस्कृतिक पहचान हैंI अखंड भारत के विस्तृत भू-भाग में प्रायः वर्षभर संपन्न होने वाले इन उत्सवों का संबंध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं होता देश के कोने-कोने में मनाए जाने वाले यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण, राष्ट्र की विजय, सुरक्षा और सामाजिक एकता के परिचायक हैंI अनेक रीति-रिवाजों से परिपूर्ण इन त्योहारों के समय समूचे विश्व को भारत की विविधता में एकता के साक्षात दर्शन हो पाते हैंI

 

 

            मकर संक्रांति महोत्सव अर्थात मकर संक्रांति भगवान भास्कर (सूर्य) के तेज, प्रकाश और ऊर्जा से प्रेरणा लेने का अवसर माना गया हैI इस दिन सूर्य देव का धनुराशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश होता हैंI दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैंI शीत लहरे  समाप्त होने लगती हैं इस समय को भारत में बहुत ही पवित्र माना जाता हैI अखंड ब्रह्मचारी भीष्म पितामह ने इसी अवसर पर अपना शरीर छोड़ा थाI

 

 

           मकर संक्रांति के इस पवित्र अवसर पर भारतीय विशेषतया हिंदू समाज से संबंधित पंथो एवं जातियों के लोग पवित्र नदियों व सरोवरों में स्नान करते हैं समाज के अभावग्रस्त लोगों में धन, अनाज एवं वस्त्रादि का दान करते हैंI रात्रि में गली-मोहल्ले के लोग एकत्रित होकर सामूहिक यज्ञ करते हैंI आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार करता है कि हवन/यज्ञ से बादल बनते हैं और वर्षा होती हैI अतः यह त्यौहार पारिवारिक, सामाजिक तथा राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का आधार भी हैंI

 

     भारतीय संस्कृति में इस राष्ट्रीय पर्व की व्यवस्था इस प्रकार की गई हैI

 

 

 

“तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर I

असतो मा सद्गमय” अर्थात असत्य से सत्य की ओर I “मृत्योर्मामृतम् गमय” अर्थात, मृत्यु से अमृत (जीवन) की ओर I राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक ब्रह्मलीन माधवराव सदाशिव गोलवलकर (श्री गुरु जी) के शब्दों में- “यह राष्ट्रीय पर्व हमारे राष्ट्रीय जीवन में परस्पर स्नेह को पुष्ट करने वाला हैI समाज के सारे भेदभाव बुलाकर एकात्मता का साक्षात्कार कराने का उदार सत्कार देने वाला यह दिन हैI”

 

             राष्ट्र के वर्तमान परिपेक्ष में देखें तो इस बार कि यह मकर संक्रांति का पर्व अनेक परिवर्तन लेकर आया हैंI अनेक असहाय समस्याएं सुलझ गई हैंI अलगाववादी धारा 370 का हटना, श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना और नागरिक संशोधन अधिनियम का बन जाना इत्यादि ऐसे महत्वपूर्ण कार्य हैं जिनसे यह मकर संक्रांति पर्व परिवर्तन का महान अवसर बन गया है वह राष्ट्रीय संस्कृति की ऐतिहासिक विजय हैI

 

तमसो मा ज्योतिर्गमय

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भारत के अभिन्न भाग कश्मीर में अनुच्छेद 370 का घोर राष्ट्र विरोधी अंधकार छाया हुआ थाI गत 73 वर्षों से छाए हुए इस अलगाववादी अंधेरे में पाकिस्तान पर भी आतंकी केसर की कियारियों में जिहादी आग लगा रहे थेI इस अनुच्छेद के काले तम में साधारण नागरिकों के मौलिक अधिकारों को समाप्त कर दिया थाI कुछ मुट्ठी भर मजहबी नेता ही मौज मस्ती कर रहे थेI

 

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने राजनीति की दिशा बदल कर अनुच्छेद 370 के अंधकार को एक ही झटके में समाप्त करके लोकतंत्र और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के प्रकाश को बिखेर दियाI अब जम्मू कश्मीर ज्योतिर्गमय हो गया हैI सारे देश में एक निशान, एक विधान और एक प्रधान का उद्घोष करने वाले अमर शहीद डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बलिदान का संदेश है यह मकर संक्रांति I

 

असतो मा सद्गमय

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           एक मकर संक्रांति पर्व सन 1992 में भी आया थाI जब संगठित हिंदू शक्ति के प्रतीक कारसेवकों ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर परकीय आक्रान्त द्वारा खड़े किए गए ‘बाबरी ढांचे’ को हटाकर असत्य पर सत्य की जीत दर्ज की थीI एक मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष भी आया है जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करके असत्य से सत्य की ओर जाने का सर्वसम्मत फैसला सुना दिया हैI

 

               अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर छाए अधर्मी, विदेशी और दहशतगर्दी अंधेरे को मिटाने वाले के लिए हिंदू समाज गत 494 वर्षों से निरंतर अपने बलिदान दे रहा थाI इस कालखंड में हुए संघर्ष में लगभग पांच लाख हिन्दुओं ने अपने प्राण न्योछावर किए हैंI अब सत्य की विजय हुई हैI इस वर्ष यह मकर संक्रांति पर्व निराशा से आशा की ओर, हीनता से श्रेष्ठता की ओर, पराजय से विजय की ओर जाने का गौरवशाली संदेश लेकर आया हैI

 

मृत्योर्मामृतम् गमय

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               भारत माता के दुर्भाग्यशाली विभाजन के समय पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) में रह जाने वाले हिंदुओं पर अमानवीय अत्याचार हो रहे थेI हिंदू बहन बेटियों का सतीत्व सुरक्षित नहीं थाI यह अत्याचार अभी भी हो रहे हैंI अनेक हिंदू परिवार अपने धर्म और सम्मान को बचाने के लिए भारत में शरण लेने आए हैंI मौत के साए में जी रहे इन हिंदुओं को अमृत मयी जीवन प्रदान करने के लिए भारत की सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाया हैI यह मृत्यु पर विजय जीवन की विजय हैI

 

                यह मकर संक्रांति पर्व पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में सताए जा रहे हिंदुओं, सिखों, पारसियों, जैनियों, बौद्ध और ईसाइयों के लिए वरदान बन आया हैI भारत में शरण लेने वाले इन लोगों को भारत की नागरिकता मिल रही हैI जो काम बहुत वर्ष पूर्व हो जाना चाहिए था, वह इस मकर संक्रांति के शुभावसर पर हो रहा हैI यह धर्म की अधर्म पर विजय हैI यह जीवन की मृत्यु पर विजय हैI यही मकर संक्रांति का संदेश हैI

भविष्य की मकर संक्रांति

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               इस वर्ष की विजय मकर संक्रांति के हर्षोल्लास में समस्त भारतवासियों में यह विश्वास जागृत हुआ है कि वह भविष्य में भी प्रत्येक मकर संक्रांति पर राष्ट्र की विजय, सामाजिक एकता और धार्मिक असमंजस का कोई ना कोई प्रसंगअवश्य आएगाI भारत के 135 करोड़ नागरिक एक राष्ट्र पुरुष के रूप में खड़े होकर राष्ट्रीय स्वाभिमान का अनुभव करेंगे

              राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनेगाI कश्मीर से भगाए गए लाखों हिंदू अपने घरों में लौटेंगेI पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश सहित अनेक देशों में हिंदू उत्पीड़न बंद होगाI भारत में समान नागरिक संहिता का स्वर्णिम युग भी आएगा और एक समय ऐसा भी आएगा जब ‘अखंड भारत’ के कोने कोने में मकर संक्रांति एवं अन्य सभी त्योहार मनाए जाएंगेI अतः इस लेख के पाठकों से निवेदन है कि यह मकर संक्रांति के इस संदेश को प्रत्येक भारतवासी तक पहुंचा देंI

 

पूर्व संघ प्रचारक, लेखक एवं पत्रकार