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सीमा पर सैनिकों के लिए कैट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को देगा 5 हजार राखियां
July 13, 2020 • Snigdha Verma • Social

*इस बार की राखी -हिन्दुस्तानी राखी -चीन को 4 हजार करोड़ रुपये का व्यापार का घाटा होना तय *

नोएडा

चीनी सामान के बहिष्कार के अपने राष्ट्रीय अभियान " भारतीय सामान -हमारा अभिमान " के अंतर्गत कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज यह घोषणा करते हुए बताया की कैट ने इस वर्ष की राखी को देश भर में " हिन्दुस्तानी राखी त्यौहार" के रूप में मनाने का निर्णय लिया है जिसके तहत इस बार न तो कोई चीन के बनी हुई राखी अथवा राखी से सम्बंधित कोई भी राखी का सामान उपयोग में नहीं लाया जाएगा । देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जाबांज सैनिकों का उत्साहवर्धन करने के लिए कैट की महिला विंग केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को सीमा पर सुरक्षा कर रहे सैनिकों के लिए 5000 राखियां देंगी वहीँ देश के प्रत्येक शहर में मिलिट्री अस्पतालों में भर्ती सैनिकों को भी कैट की महिला विंग अस्पतालों में जाकर राखियां बांधेगी । इसके साथ ही देश के हर शहर में लोगों को रक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को भी कैट की महिला विंग राखी बांधकर उन्हें यह सन्देश देंगी की देश का प्रत्येक व्यक्ति अपने देश की सेनाओं और पुलिस बल के साथ मजबूती से खड़ा है ।

देश में राखी के त्यौहार पर एक अनुमान के अनुसार लगभग 6 हजार करोड़ का राखियों का व्यापार होता है जिसमें अकेले चीन की हिस्सेदारी लगभग 4 हजार करोड़ होती है । राखी के अवसर पर चीन से जहाँ बनी हुई राखियां आती हैं वहीँ दूसरी ओर राखी बनाने का सामान जैसे फोम, कागज़ की पन्नी, राखी धागा, मोती, बूंदे, राखी के ऊपर लगने वाला सजावटी सामान आदि चीन से आयात होता था । कैट के चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के अभियान के चलते इस वर्ष कोई भी चीनी सामान राखी में उपयोग में नहीं होगा जिसके कारण चीन को लगभग 4 हजार करोड़ के व्यापार की चपत लगना तय है ।

सुशील कुमारजैन,संयोजक कैट (दिल्ली एन सी आर) ने बताया की कैट ने देश के सभी राज्यों में काम कर रहे कैट के स्टेट चैप्टर एवं अन्य प्रमुख एसोसिएशन को एक सन्देश भेज कर सलाह दी है की इस वर्ष देश में कहीं पर भी चीन की राखी या राखी में लगने वाला सामान नहीं बेचा जाना चाहिए ! कैट ने अपने स्टेट चैप्टर से आग्रह किया है की वो अपने राज्य के शहरों में कच्ची बस्तियों में काम करने वाले लोग, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी में काम करने वाली महिलाएं, छोटे कारीगर तथा अन्य लोगों से राखियां बनवाएं और उन्हें बाज़ारों में बेचने के लिए इन सभी वर्गों के लोगों की सहायता करें । वहीँ कैट ने उन छोटे लघु उद्योगों से भी आग्रह किया है जिनके यहाँ मशीनों के द्वारा राखियां बनाई जा सकती हैं की वो भी भारतीय सामान का उपयोग कर राखियां बनायें और देश में हर जगह भारतीय वस्तुओं से बनी राखियां ही मिलें ।

सुशील कुमार जैन,संयोजक कैट (दिल्ली एन सी आर) ने बताया कि कैट ने अपनी इस पहल को अंजाम देते हुए दिल्ली, नागपुर, भोपाल, ग्वालियर, सूरत, कानपुर, तिनसुकिया, रायपुर, भुवनेश्वर, कोल्हापुर, जम्मू आदि शहरों में राखियां बनवाने का काम शुरू कर दिया है ! दिल्ली में कैट 10 राखियों का एक सेट बनवा रहा है जिसमें राखियों के अलावा एक छोटी शीशी में रोली-चावल तथा एक छोटी थैली में मिश्री होगी और इस सेट को दिल्ली के विभिन्न बाज़ारों के व्यापारिक संगठनों के जरिये पहली प्राथमिकता पर व्यापारियों एवं उनके कर्मचारियों को यह राखियां दी जाएँगी वहीँ बाज़ारों में बेचने के लिए भी यह राखियां रखी जाएंगी । इसी तरह से देश के प्रत्येक शहर में हिन्दुस्तानी राखी व्यापारिक संगठनों के जरिये दी जाएंगी ।