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उद्योगों और अर्थव्यवस्था के लिए घातक होगा जेनरेटर पर प्रतिबंध : विपिन मल्हन
October 14, 2020 • Snigdha Verma • Political

15 अक्टूबर से जेनरेटर पर पाबंदी के फैसले पर पुनर्विचार करे ईपीसीए

नोएडा। प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी नोएडा के सबसे बड़े औद्योगिक संगठन नोएडा एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन (एनईए) ने एनवायरमेंट पल्यूशन (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) अथॉरिटी (ईपीसीए) के उस आदेश का विरोध किया है, जिसमें 15 अक्टूबर से जेनरेटर पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। एनईए के अध्यक्ष विपिन मल्हन ने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सिर्फ जेनरेटर पर प्रतिबंध को किसी भी कीमत पर न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस आदेश के बाद पहले से ही गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे उद्योग बंद हो जाएंगे। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। विपिन मल्हन ने ईपीसीए से देशहित में अपने इस आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की है। 

एनईए के अध्यक्ष विपिन मल्हन ने कहा कि नोएडा शहर में 12 हजार से अधिक उद्योग काम कर रहे हैं। इनमें लगभग 90 फीसदी उद्योगों को बिजली के अभाव में जेनरेटर का सहारा लेना पड़ता है। वह कहते हैं कि सच है कि जेनरेटर से प्रदूषण होता है, लेकिन 24 घंटे बिजली की सप्लाई के बिना उद्योग कैसे चलेंगे, सरकार को इस बात पर भी गहन चिंतन करना चाहिए। वह कहते हैं कि जेनरेटर से उद्योग चलाने में उत्पादन लागत में लगभग 40 फीसदी का इजाफा हो जाता है। ऐसे में ईपीसीए के जेनरेटर पर पाबंदी के आदेश से उत्पादन कम होगा, जिसका खामियाजा खराब अर्थव्यवस्था के तौर पर हम सभी को भुगतना होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट में समय से पूर्व लॉकडाउन का खामियाजा हम भुगत रहे हैं। जीडीपी लगभग 24 प्रतिशत निगेटिव में है। ऐसे में सरकार की कोशिश उद्योगों में उत्पादन बढ़ाने की होनी चाहिए, जिससे धरातल में गई अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके। विपिन मल्हन ने कहा कि ईपीसीए का जेनरेटर पर प्रतिबंध उद्योगों और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद घातक साबित होगा। 

एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने कहा कि प्रदूषण कम करने के और भी तरीके हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन उस पर ध्यान नहीं देता है। सरकार भी स्थानीय प्रशासन को ऐसा करने की शायद छूट न देती हो, लेकिन हर शहर की अपनी समस्या होती है और उसका समाधान भी स्थानीय परिप्रेक्ष्य में ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नोएडा के उद्योगों में काम करने वाले लगभग 7 से 8 लाख लोग एक साथ शहर की सड़कों पर होते हैं। इससे जाम की स्थिति बन जाती है और जाम से प्रदूषण का होना स्वाभाविक होता है। वह कहते हैं कि उनके विचार से नोएडा के उद्योगों के साथ ही सरकारी और गैर सरकारी दफ्तरों के खुलने और बंद होने के समय में थोड़ा-थोड़ा अंतराल रखा जाए तो एक साथ सड़कों पर जमा होने वाले लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे हम प्रदूषण को कम करने में सफल हो सकते हैं। 

विपिन मल्हन ने कहा कि उद्योगों और दफ्तरों के समय पर ही स्कूलों का भी टाइम होता है। शहर के लगभग सभी स्कूलों की बसें सड़क पर ही खड़ी होती हैं। उससे भी जाम लगता है। उन्होंने कहा कि शहर के स्कूलों के खुलने और छुट्टी के समय में भी एरिया के हिसाब से परिवर्तन कर प्रदूषण को हराया जा सकता है।

एनईए अध्यक्ष ने कहा कि वह खुद भी प्रकृति और पर्यावरण के दुश्मन नहीं है। वह भी चाहते हैं कि शहर का वातावरण जीवनदायिनी हो। लेकिन, इसके लिए सिर्फ जेनरेटर पर प्रतिबंध लगाने को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय प्रशासन को इस मुद्दे पर एनईए, पर्यावरणविद, स्कूल प्रबंधन और व्यापारिक संगठनों के साथ चर्चा करना चाहिए, जिससे इसका कोई सम्मानजनक समाधान निकाला जा सकता है।